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घाटमपुर पढ़ने जाते पालीटेक्निक कालेज के छात्र
ब्यूरो, अमर उजाला/हमीरपुर
Updated Wed, 01 Jul 2015 12:20 AM IST
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कस्बे में करीब 15 करोड़ की लागत से बनकर तैयार राजकीय पालीटेक्निक कॉलेज
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क्षेत्र के युवाओं को तकनीकी शिक्षा नहीं दे पा रहा है। इसके लिए चयनित
छात्रों को अभी घाटमपुर के पालीटेक्निक कालेज जाना पड़ रहा है। क्षेत्र के
लोगों का कहना है कि शासन प्रशासन की उदासीनता के चलते युवाओं को अभी भी
भटकना पड़ रहा है।
क्षेत्र के युवाओं को तकनीकी शिक्षा देने के लिए बसपा सरकार के व्यवसायिक एवं प्राविधिक शिक्षा राज्यमंत्री सदल प्रसाद ने 28 फरवरी 2009 को राजकीय पालीटेक्निक कालेज के लिए तपोभूमि के पीछे भवन का शिलान्यास किया था।
भवन पांच वर्ष में बनकर तैयार हो गया। विद्यालय में सभी व्यवस्थाएं फर्नीचर आदि आ चुका है। छात्रावास व पेयजल के लिए ओवरहेड टैंक भी बनकर तैयार है। लिपिक व प्रवक्ताओं की भी नियुक्ति की जा चुकी हैं।
लेकिन भवन हैंडओवर होने के बाद भी इस कालेज के नाम चयनित छात्रों को अभी भी घाटमपुर स्थित पालीटेक्निक कॉलेज जाना पड़ता है। जिससे क्षेत्र के अभिभावकों में खासा आक्रोश है।
वहीं विद्यालय स्टाफ अपनी सुविधा के कारण यहां आने को तैयार नहीं है। जिससे दूर क्षेत्रों से आए हुए छात्रों को भी भटकना पड़ रहा है। सोमवार को गाजीपुर का छात्र धर्मेंद्र राम, कानपुर का राजेश द्विवेदी, सुमेरपुर के राजेंद्र व प्रज्ञा इस कॉलेज का चक्कर लगा चुके हैं। लेकिन भवन में ताला पड़ा होने के चलते इन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा।
क्षेत्र के युवाओं को तकनीकी शिक्षा देने के लिए बसपा सरकार के व्यवसायिक एवं प्राविधिक शिक्षा राज्यमंत्री सदल प्रसाद ने 28 फरवरी 2009 को राजकीय पालीटेक्निक कालेज के लिए तपोभूमि के पीछे भवन का शिलान्यास किया था।
भवन पांच वर्ष में बनकर तैयार हो गया। विद्यालय में सभी व्यवस्थाएं फर्नीचर आदि आ चुका है। छात्रावास व पेयजल के लिए ओवरहेड टैंक भी बनकर तैयार है। लिपिक व प्रवक्ताओं की भी नियुक्ति की जा चुकी हैं।
लेकिन भवन हैंडओवर होने के बाद भी इस कालेज के नाम चयनित छात्रों को अभी भी घाटमपुर स्थित पालीटेक्निक कॉलेज जाना पड़ता है। जिससे क्षेत्र के अभिभावकों में खासा आक्रोश है।
वहीं विद्यालय स्टाफ अपनी सुविधा के कारण यहां आने को तैयार नहीं है। जिससे दूर क्षेत्रों से आए हुए छात्रों को भी भटकना पड़ रहा है। सोमवार को गाजीपुर का छात्र धर्मेंद्र राम, कानपुर का राजेश द्विवेदी, सुमेरपुर के राजेंद्र व प्रज्ञा इस कॉलेज का चक्कर लगा चुके हैं। लेकिन भवन में ताला पड़ा होने के चलते इन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा।