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कस्बाखेड़ा में अवैध रूप से मौरंग डंप
ब्यूरो अमर उजाला, हमीरपुर
Updated Fri, 24 Jun 2016 12:27 AM IST
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बाजार में अवैध रूप से डंप मौरंग।
- फोटो : अमर उजाला
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खनिज विभाग के अधिकारियों और पुलिस की मिलीभगत से मौरंग का अवैध कारोबार करने वालों ने खनन कर अब तक सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्राली मौरंग का डंप कर रखा है। खनिज विभाग के अधिकारी सब कुछ जानकर भी आंखें बंद किए बैठे हैं।
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जानकारी के अनुसार पड़रा गांव से जो मौरंग निकाली जा रही थी उसे कस्बा खेड़ा गांव के कुछ लोग अपने ट्रैक्टरों में भरकर गांव की सरकारी जमीन जहां पर बाजार लगता है वहां पर डंप किए हैं। मौरंग का कारोबार करने वाले लोग डंप मौरंग को ऊंचे दामों पर बेच कर सरकार के राजस्व को चूना लगा रहे हैं। बता दें कि कस्बाखेड़ा गांव मौरंग डंप का अड्डा बन गया है।
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गांव के बाहर बने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के पास बड़ी मात्रा में मौरंग डंप है। कुछ ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पुलिस भी मौरंग माफिया से मिली है। बाजार में मौरंग डंप होने से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में जब एसडीएम मोहम्मद रिजवान से बात की तो उन्होंने कहा कि उन्हें मौरंग डंप की जानकारी नहीं है। वह छापेमारी कर कार्रवाई करेंगे।
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कोतवाली के पड़रा गांव में अवैध खनन के दौरान कगार के गिरने से दबे मजदूर की मौत की यह घटना पहली नहीं है। 18 मार्च 2012 को भी कोतवाली के बहगांव में भी अवैध खनन करने के दौरान कगार गिरने से दो मजदूरों की मौत हो चुकी है। इन घटनाओं के बाद भी प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस आज तक नहीं चेती है।
गौरतलब है कि बुधवार दोपहर पड़रा गांव में मौरंग का अवैध खनन करने के दौरान कगार गिर गई थी। कगार की चपेट में आने से वीरेंद्र पुत्र मानसिंह खंगार और शंकर पुत्र हरीनारायन दब गए। वीरेंद्र की मौत हो गई। उस समय दोनों मजदूर कस्बा खेड़ा गांव के वीर महाराज का ट्रैक्टर भर रहे थे। बतादें कि पड़रा गांव बिरमा नदी की तलहटी में बसा है।
नदी के आसपास के खेत मौदहा बांध डूब क्षेत्र आते हैं जहां बड़ी तादाद में मौरंग निकाली जाती है। पड़रा गांव निवासी लछीराम अहिरवार भी अपने खेत में पड़ी मौरंग से अवैध खनन करा रहा था। करीब 22 साल पहले लछीराम अहिरवार को गाटा संख्या 594/11 रकवा 0.955 का सरकार द्वारा पट्टा मिला था।
पड़रा गांव के प्रधान वीरसिंह ने बताया कि गांव में हो रहे खनन को लेकर उन्हाेंने 16 मई 2016 को डीएम, एसपी सहित उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर गांव के कुछ असरदार लोगों पर कार्रवाई की शिकायत की थी। परंतु अधिकारियों ने इस शिकायत पर जरा भी गंभीरता नहीं दिखाई।