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हमीरपुर-राठ मार्ग बनने में लगेंगे और एक साल
ब्यूरो, अमर उजाला/हमीरपुर
Updated Thu, 13 Aug 2015 11:57 PM IST
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हमीरपुर-राठ मार्ग से गुजरना कठिनाइयों से भरा है।
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इसे देखते हुए हमीरपुर से झांसी के चिरगांव तक का सफर आसान करने के लिए
विश्व बैंक की मदद से इसे बनाया जाएगा। इसके लिए करीब एक साल से प्रयास
जारी हैं, लेकिन कार्यदाई संस्था में बदलाव के चलते निर्माण कार्य फिलहाल
लटक गया है।
जिले के अंदर राठ क्षेत्र को जाने वाली मुख्य सड़क बुरी तरह जर्जर है। बेतवा नदी से निकलने वाले मौरंग से भरे ट्रक इसी सड़क से होकर गुजरते हैं। राठ मार्ग पर करीब 20 किमी सड़क पूरी तरह डैमेज है।
हालांकि जिले क ो मौरंग से अच्छा खासा राजस्व मिल रहा है। इधर मुख्यालय से राठ को जोड़ने वाले इस प्रमुख मार्ग को एसएच-42 का नाम दिया गया है। मार्ग पर जिले के 70 फीसदी लोग गुजरते हैं।
मार्ग के चौड़ीकरण की कवायद करीब एक साल से चल रही है। 10 मीटर चौड़ी सड़क बनाए जाने का सर्वे कार्य भी पूरा हो चुका है। सड़क बनाए जाने का आदेश आने के बाद शासन से मरम्मत को भेजा धन लोनिवि ने वापस कर दिया।
इधर सड़क में गड्ढों की मरम्मत न होने से बरसात के बीच लगने वाले जाम से लोगों को घंटों जूझना पड़ रहा है। गुरुवार को इस मार्ग के निर्माण के लिए पीडल्ब्यडी और विश्व बैंक के अधिकारियों ने निरीक्षण किया।
इस दौरान अधीक्षण अभियंता संजय कुमार गोयल, अधिशाषी अभियंता एसके कटेरिया, एडिड इंडिया के राजीव गुप्ता व विश्व बैंक के अधिकारी मलिक शामिल रहे।
अधिशाषी अभियंता लोनिवि झांसी एसके कटेरिया ने कहा कि हमीरपुर से चिरगांव तक बनने वाले टूलेन को तीन हिस्सों में विभाजित किया गया है। जिसमें हमीरपुर से राठ तक 322 करोड़ का स्टीमेट बना है।
गरौठा से चिरगांव तक सड़क बनाने में 227 करोड़ की लागत आएगी। जबकि राठ से गरौठा तक के बीच पड़ने वाली सड़क की नापजोख कर स्टीमेट तैयार किया जा रहा है। स्टीमेट बनने के बाद ही टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी। इन कार्यों पर करीब एक साल का समय लगेगा।
जिले के अंदर राठ क्षेत्र को जाने वाली मुख्य सड़क बुरी तरह जर्जर है। बेतवा नदी से निकलने वाले मौरंग से भरे ट्रक इसी सड़क से होकर गुजरते हैं। राठ मार्ग पर करीब 20 किमी सड़क पूरी तरह डैमेज है।
हालांकि जिले क ो मौरंग से अच्छा खासा राजस्व मिल रहा है। इधर मुख्यालय से राठ को जोड़ने वाले इस प्रमुख मार्ग को एसएच-42 का नाम दिया गया है। मार्ग पर जिले के 70 फीसदी लोग गुजरते हैं।
मार्ग के चौड़ीकरण की कवायद करीब एक साल से चल रही है। 10 मीटर चौड़ी सड़क बनाए जाने का सर्वे कार्य भी पूरा हो चुका है। सड़क बनाए जाने का आदेश आने के बाद शासन से मरम्मत को भेजा धन लोनिवि ने वापस कर दिया।
इधर सड़क में गड्ढों की मरम्मत न होने से बरसात के बीच लगने वाले जाम से लोगों को घंटों जूझना पड़ रहा है। गुरुवार को इस मार्ग के निर्माण के लिए पीडल्ब्यडी और विश्व बैंक के अधिकारियों ने निरीक्षण किया।
इस दौरान अधीक्षण अभियंता संजय कुमार गोयल, अधिशाषी अभियंता एसके कटेरिया, एडिड इंडिया के राजीव गुप्ता व विश्व बैंक के अधिकारी मलिक शामिल रहे।
अधिशाषी अभियंता लोनिवि झांसी एसके कटेरिया ने कहा कि हमीरपुर से चिरगांव तक बनने वाले टूलेन को तीन हिस्सों में विभाजित किया गया है। जिसमें हमीरपुर से राठ तक 322 करोड़ का स्टीमेट बना है।
गरौठा से चिरगांव तक सड़क बनाने में 227 करोड़ की लागत आएगी। जबकि राठ से गरौठा तक के बीच पड़ने वाली सड़क की नापजोख कर स्टीमेट तैयार किया जा रहा है। स्टीमेट बनने के बाद ही टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी। इन कार्यों पर करीब एक साल का समय लगेगा।