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बारिश से किसानों की मुसीबतें बढ़ीं
ब्यूरो/अमर उजाला, हमीरपुर
Updated Mon, 26 Jan 2015 01:13 AM IST
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मौसम की मार से हर कोई परेशान है। बरसात होने से अन्नदाता बेचैन है। दलहनी
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फसलों के बर्बाद होने का खतरा मंडराने लगा है। मसूर की फसल में अभी तक फूल
नहीं आया है। वहीं ठिठुरन जारी रहने से लोग परेशान है। मौसम की खराबी के
बीच अधिकतम तापमान छह डिग्री घट गया। वहीं तीन एमएम वर्षा रिकार्ड की गई।
बीते 17 दिसंबर से लेकर अब तक मौसम खराब चल रहा है। इस बीच तीन बार बरसात हो चुकी है। रविवार को जिले के कुछ स्थानों पर हल्की तो कहीं झमाझम बरसात हुई। इससे खेतों में खड़ी मसूर की फसलों में पानी भर गया। मुस्करा क्षेत्र के कंधौली के किसान श्रीकांत राजपूत ने बताया कि उनके क्षेत्र में मसूर की फसलें सर्वाधिक बोई जाती है।
पैदावार भी ठीकठाक होती है। बताया कि छानी, गुंदेला गांवों के किसान भी मसूर ज्यादा पैदाकर रहे है। उसने कहा कि खराब मौसम के चलते मसूर की फसल में फूल नहीं लग सका है। कहते है कि फरवरी के अंतिम सप्ताह तक मसूर की फसल की कटाई होने लगती है। लेकिन इस बार जब फूल ही नहीं आया तो फसल में फल कब आएगा।
इसी क ो लेकर किसानों में बेचैनी है। वहीं अरहर, चना और मटर की फसलों पर भी क्रुप्रभाव पड़ रहा है। रिठारी के चंद्रभान सिंह ने बताया कि फसलों को सबसे ज्यादा धूप की जरूरत है। लेकिन बार-बार बरसात होने व धूप न निकलने से फसलें बर्बाद हो रही है।
कहते है कि पिछले साल भी इसी प्रकार अतिवृष्टि के चलते फसलों में फूल न आने से फलत रुक गई थी। जिससे किसान तबाह हो गया। बरसात के बीच तापमान में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई। मौैसम विभाग के मुताबिक अधिकतम तापमान 16.2 डिग्री रह गया। वहीं न्यूनतम तापमान 6.2 डिग्री पहुंचा।
भरुआसुमेरपुर प्रतिनिधि के अनुसार, मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार रविवार को एक बार फिर मौसम में तब्दीली आ गई। कोहरा छटने के साथ ही आसमान में बादल मंडराने लगे। हल्की बूंदा बांदी से शुरू हुई बरसात दोपहर होते होेते तेज हो गई। इस बारिश से मटर, मसूर, चना, अरहर व सरसों की फसलों में नुकसान होने की संभावना बढ़ गई है।
इस बरसात से किसानों के चेहरों में चिंता की लकीरें नजर आने लगी है। टेढ़ा के किसान सौरभ सिंह, गोपी श्याम द्विवेदी, पंधरी के नवीन सिंह आदि का कहना है कि मौसम खराब होने से फसलों की ग्रोथ रूक गई है। धूप न निकलने से फसलों के फूलने व फलने में ग्रहण लग गया है। जिससे पैदावार में असर पड़ेगा।
बीते 17 दिसंबर से लेकर अब तक मौसम खराब चल रहा है। इस बीच तीन बार बरसात हो चुकी है। रविवार को जिले के कुछ स्थानों पर हल्की तो कहीं झमाझम बरसात हुई। इससे खेतों में खड़ी मसूर की फसलों में पानी भर गया। मुस्करा क्षेत्र के कंधौली के किसान श्रीकांत राजपूत ने बताया कि उनके क्षेत्र में मसूर की फसलें सर्वाधिक बोई जाती है।
पैदावार भी ठीकठाक होती है। बताया कि छानी, गुंदेला गांवों के किसान भी मसूर ज्यादा पैदाकर रहे है। उसने कहा कि खराब मौसम के चलते मसूर की फसल में फूल नहीं लग सका है। कहते है कि फरवरी के अंतिम सप्ताह तक मसूर की फसल की कटाई होने लगती है। लेकिन इस बार जब फूल ही नहीं आया तो फसल में फल कब आएगा।
इसी क ो लेकर किसानों में बेचैनी है। वहीं अरहर, चना और मटर की फसलों पर भी क्रुप्रभाव पड़ रहा है। रिठारी के चंद्रभान सिंह ने बताया कि फसलों को सबसे ज्यादा धूप की जरूरत है। लेकिन बार-बार बरसात होने व धूप न निकलने से फसलें बर्बाद हो रही है।
कहते है कि पिछले साल भी इसी प्रकार अतिवृष्टि के चलते फसलों में फूल न आने से फलत रुक गई थी। जिससे किसान तबाह हो गया। बरसात के बीच तापमान में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई। मौैसम विभाग के मुताबिक अधिकतम तापमान 16.2 डिग्री रह गया। वहीं न्यूनतम तापमान 6.2 डिग्री पहुंचा।
भरुआसुमेरपुर प्रतिनिधि के अनुसार, मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार रविवार को एक बार फिर मौसम में तब्दीली आ गई। कोहरा छटने के साथ ही आसमान में बादल मंडराने लगे। हल्की बूंदा बांदी से शुरू हुई बरसात दोपहर होते होेते तेज हो गई। इस बारिश से मटर, मसूर, चना, अरहर व सरसों की फसलों में नुकसान होने की संभावना बढ़ गई है।
इस बरसात से किसानों के चेहरों में चिंता की लकीरें नजर आने लगी है। टेढ़ा के किसान सौरभ सिंह, गोपी श्याम द्विवेदी, पंधरी के नवीन सिंह आदि का कहना है कि मौसम खराब होने से फसलों की ग्रोथ रूक गई है। धूप न निकलने से फसलों के फूलने व फलने में ग्रहण लग गया है। जिससे पैदावार में असर पड़ेगा।