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बारिश के बाद, दीमक कुतर रही फसल
ब्यूरो, अमर उजाला/हमीरपुर
Updated Mon, 20 Apr 2015 12:08 AM IST
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गेहूं किसानों की आफत कम होने का नाम नहीं ले रही है। बीते दिनों हुई जोरदार बारिश के बाद कटी पड़ी फसल में दीपक लग गई है। यह तेजी से बालियों और नरई पौधों को चट कर रहा है। दीमक के साथ ही सूड़ी व नन्हें कीड़े भी फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। सुबह व रात को नमी होने पर दीमकों की तादाद खूब बढ़ रही है। गट्ठरों की नमी से अभी एक दो दिन तक कटाई व थ्रेसिंग की संभावना नहीं है। इससे यह नुकसान और बढ़ सकता है। मड़ाई के बाद भी दीमक गेहूं के साथ घर पहुंच किसानों का संकट बढ़ाएगी।
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इस बार रबी के सीजन में 2,64 ,273 हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई हुई थी। इसमें 1,03,072 हेक्टेयर रकबे में गेहूं बोया गया। मंगलवार व बुधवार को बारिश के बाद 50 फीसदी से अधिक फसल का नुकसान हो चुका है। अब दीमक, नन्हे कीट और सूड़ी आफत मचा रही है। सबसे बड़ा खतरा दीमक से है। यह तेजी से फै ल रही है।
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दीमक की जद में बाली और नई दोनों है। रविवार को किसान गट्ठरों को खेत में पलट रहे थे। दीमक और सूड़ी के झुंड देखकर उनके मुंह से आह निकल गई। एक बीघा में करीब सवां क्विंटल पैदावार का अनुमान था। 20 से 25 किलो पैदावार दीमक साफ कर जाएगी। पता नही कितना गेहूं घर ले जा पाएंगे।
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खरौंज के महिला किसान जुमरतिया ने बताया कि पूरे इलाके में यही हाल है। दीमक तेजी से बढ़ रही है। वह दानों को मिट्टी बना रही है। मजबूरी है कि गट्ठरों के सूख न पाने से थ्रेसिंग नहीं कर पा रहे हैं। अगर दीमकों का हमला बढ़ता रहा तो मड़ाई से भी कोई फायदा नहीं होगा। लागत तो पहले ही डूब गई है।
खरौंज के किसान अयूब हसन ने बताया कि कुछ दिन पूर्व कु छ गेहूं की फसल की थ्रेसिंग कराई जिसमें 2 क्विंटल प्रति बीघा पैदावार निकली है। कहा कि भारी बारिश से उसके खेतों में फसल कटी पड़ी है। दोपहर को पूरे कुनबे के साथ खेत में गट्ठरों को पलट रहे थे। गट्ठर पलटो तो दीमक तेजी से रेंगकर दूसरे गट्ठरों की ओर भागने लगती है। इन्हें लगता है कि दीमक इनके भविष्य को कुतर रहे है।
जल्ला गांव के रामस्वरूप, महेंद्र, गोरेलाल बताते है कि मड़ाई के बाद भी दीमक गेहूं के साथ जाएगी। जिससे यह आगे भी नुकसान पहुंचाएगी। कंडौर के किसान राजू राज व वीरेंद्र, उदय सिंह का कहना है कि दीमक से बचने के लिए गट्ठरों के बाली वाले हिस्से को ऊपर की ओर रखकर खड़ा कर रहे हैं।
प्रगतिशील किसान आशीष पालीवाल का कहना है कि गेहूं के गट्ठरों की नमी से ही दीमक बढ़ रही है। फसल को नुकसान से बचाने के लिए बाली वाले हिस्से को ऊपर की ओर रखकर गट्ठर रखना चाहिए। जब तक फसल पूरी तरह सूख न जाए, थ्रेसरिंग न करें।