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सीबीआई की रिपोर्ट में शामिल हो सकते कई कारोबारी
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हमीरपुर। जिला प्रशासन की ओर से जारी मौरंग पट्टों को हाईकोर्ट ने 16 अक्तूबर 2016 को निरस्त कर दिया, लेकिन इसके बावजूद मौरंग खनन का खेल जारी रहा। अप्रैल 2017 को जांच के दौरान जनहित याचिकाकर्ता विजय द्विवेदी एडवोकेट ने सीबीआई को तस्दीक के तौर पर खनन के दौरान कई खदानों में लड़ाई-झगड़ों के साथ गोलीबारी की घटनाओं में दर्ज मुकदमों की सूची दी।
सीबीआई को ऐसे कारोबारियों के भी पुख्ता सुबूत हाथ लगे हैं। सीबीआई की एफआईआर में 11 को नामजद करते हुए अन्य लोगों को शामिल किया गया है। ऐसे में इस कारोबार में लिप्त रहे कई बड़े मौरंग कारोबारियों की गर्दन भी अन्य में फंस सकती है।
जलालपुर में 29 दिसंबर 2015 को अवैध मौरंग को लेकर एक गोलीबारी का मामला दर्ज हुआ था। तब सपा के सदर विधायक रहे शिवचरन प्रजापति के पुत्र आलोक कुमार का भी नाम बेतवा नदी पर भेड़ी खरका घाट में करीब साढ़े तीन माह तक मौरंग का खनन करने में आया था।
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उस समय बेतवा नदी पर बने अस्थायी पुल का ठेका मत्स्य जीवी साधन समिति भेड़ीडांडा के नाम से संचालित था। उसमें जिला पंचायत की ओर से प्रति ट्रक 80 रुपये पथकर लेना था, लेकिन सत्ता की हनक में अवैध खनन कर ट्रक बिना पथकर दिए निकलवानेे शुरू कर दिए गए थे। तब पथकर वसूली करने वाले जलालपुर निवासी संजय मिश्रा ने सीबीआई को एफआईआर की कापी सौंपी थी।
जिसमें कहा था कि खदान से प्रतिदिन करीब 1300 ट्रक मौरंग करीब साढ़े तीन माह तक अस्थायी पुल से निकाले गए। पथकर मांगने पर सपा विधायक रहे शिवचरन प्रजापति के पुत्र ने एक दर्जन से अधिक हथियारबंद साथियों के साथ उसे व उसके साथी प्रदीप व कुर्बान पर हमला बोलकर मरणासन्न कर दिया था।
दहशत फैलाने के लिए हवाई फायरिंग की। तब लंबे प्रयास के बाद समिति के अध्यक्ष छंग्गा प्रसाद की तहरीर पर सदर विधायक के पुत्र आलोक कुमार, परशुराम, तनहा, श्यामबाबू, सिद्धगोपाल निवासी हमीरपुर, बच्चा, ईद्दू पहलवान निवासी मौदहा सहित चार अन्य के खिलाफ प्राणघातक हमले का मामला दर्ज हो सका था।
इसी तरह नौ नवंबर 2013 में पत्यौरा ग्राम के मजरा मलिहाताला व शिवरामपुर डेरा के ग्रामीणों ने खेतों से रास्ता बनाकर मौरंग निकालने की शिकायत को प्रशासन के अनसुना करने पर नाराज लोगों ने गड्ढा खोदकर जाम लगाया था। इस पर पट्टा संचालक रमेशचंद्र गुप्ता निवासी बांगरमऊ जनपद उन्नाव की ओर से गांव निवासी देवनारायन, रामकुमार, गंगाराम, छोटे व रामबाबू सहित 20 लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं सहित 3/5 लोक संपत्ति क्षति निवारक अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया था।
सीबीआई की गिरफ्त में आ सकते कई थानेदार
16 अक्तूबर 2015 को उच्च न्यायालय ने जिले में संचालित 60 मौरंग खनन के पट्टों को निरस्त किया। हाईकोर्ट ने सीबीआई को जांच के आदेश दिए तो सिंडीकेट समेत खनन कारोबारियों ने अपना बोरिया बिस्तर समेट लिया। इसी बीच करीब चार माह पुलिस की छत्रछाया में अवैध खनन का कारोबार जारी रहा। शाम ढलते ही रात के अंधेरे में पुलिस ने मौरंग की जमकर चोरी करवाई। इस पर सीबीआई ने अप्रैल 2017 में खनन की जांच की। जिसमें जिले के ज्यादातर थानाध्यक्षों को तलब किया था। ऐसे कई थानेदार सीबीआई की गिरफ्त में आ सकते हैं।
राजस्व घाटे को पूरा करने को बढ़ाई रायल्टी
अवैध खनन वर्ष 2007 से शुरू हुआ। तब जिले में प्रति ट्रक पर नौ घनमीटर मौरंग लोड होती रही। इस पर खनिज विभाग रायल्टी के रूप में 270 रुपया लेता था। लेकिन बसपा सरकार में सिंडीकेट का उदय हुआ तो 100 रुपये प्रति ट्रक अवैध रूप वसूली शुरू हुई। जो सपा शासन काल तक 11 हजार रुपये तक पहुंच गई। इस पर खनिज राजस्व घट गया तो वसूली की भरपाई के लिए शासन स्तर से रायल्टी बढ़ाई। नौ घनमीटर मौरंग में 900 रुपये रायल्टी वसूली जाने लगी।
अवैध खनन के दौरान हुए क्षेत्रों में कई बवाल, अवैध खनन करने वाले दुबके
रोक के बावजूद प्रशासन के शह पर सत्तादल के लोग कराते रहे हैं अवैध खनन
अमर उजाला ब्यूरो
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सीबीआई को ऐसे कारोबारियों के भी पुख्ता सुबूत हाथ लगे हैं। सीबीआई की एफआईआर में 11 को नामजद करते हुए अन्य लोगों को शामिल किया गया है। ऐसे में इस कारोबार में लिप्त रहे कई बड़े मौरंग कारोबारियों की गर्दन भी अन्य में फंस सकती है।
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जलालपुर में 29 दिसंबर 2015 को अवैध मौरंग को लेकर एक गोलीबारी का मामला दर्ज हुआ था। तब सपा के सदर विधायक रहे शिवचरन प्रजापति के पुत्र आलोक कुमार का भी नाम बेतवा नदी पर भेड़ी खरका घाट में करीब साढ़े तीन माह तक मौरंग का खनन करने में आया था।
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उस समय बेतवा नदी पर बने अस्थायी पुल का ठेका मत्स्य जीवी साधन समिति भेड़ीडांडा के नाम से संचालित था। उसमें जिला पंचायत की ओर से प्रति ट्रक 80 रुपये पथकर लेना था, लेकिन सत्ता की हनक में अवैध खनन कर ट्रक बिना पथकर दिए निकलवानेे शुरू कर दिए गए थे। तब पथकर वसूली करने वाले जलालपुर निवासी संजय मिश्रा ने सीबीआई को एफआईआर की कापी सौंपी थी।
जिसमें कहा था कि खदान से प्रतिदिन करीब 1300 ट्रक मौरंग करीब साढ़े तीन माह तक अस्थायी पुल से निकाले गए। पथकर मांगने पर सपा विधायक रहे शिवचरन प्रजापति के पुत्र ने एक दर्जन से अधिक हथियारबंद साथियों के साथ उसे व उसके साथी प्रदीप व कुर्बान पर हमला बोलकर मरणासन्न कर दिया था।
दहशत फैलाने के लिए हवाई फायरिंग की। तब लंबे प्रयास के बाद समिति के अध्यक्ष छंग्गा प्रसाद की तहरीर पर सदर विधायक के पुत्र आलोक कुमार, परशुराम, तनहा, श्यामबाबू, सिद्धगोपाल निवासी हमीरपुर, बच्चा, ईद्दू पहलवान निवासी मौदहा सहित चार अन्य के खिलाफ प्राणघातक हमले का मामला दर्ज हो सका था।
इसी तरह नौ नवंबर 2013 में पत्यौरा ग्राम के मजरा मलिहाताला व शिवरामपुर डेरा के ग्रामीणों ने खेतों से रास्ता बनाकर मौरंग निकालने की शिकायत को प्रशासन के अनसुना करने पर नाराज लोगों ने गड्ढा खोदकर जाम लगाया था। इस पर पट्टा संचालक रमेशचंद्र गुप्ता निवासी बांगरमऊ जनपद उन्नाव की ओर से गांव निवासी देवनारायन, रामकुमार, गंगाराम, छोटे व रामबाबू सहित 20 लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं सहित 3/5 लोक संपत्ति क्षति निवारक अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया था।
सीबीआई की गिरफ्त में आ सकते कई थानेदार
16 अक्तूबर 2015 को उच्च न्यायालय ने जिले में संचालित 60 मौरंग खनन के पट्टों को निरस्त किया। हाईकोर्ट ने सीबीआई को जांच के आदेश दिए तो सिंडीकेट समेत खनन कारोबारियों ने अपना बोरिया बिस्तर समेट लिया। इसी बीच करीब चार माह पुलिस की छत्रछाया में अवैध खनन का कारोबार जारी रहा। शाम ढलते ही रात के अंधेरे में पुलिस ने मौरंग की जमकर चोरी करवाई। इस पर सीबीआई ने अप्रैल 2017 में खनन की जांच की। जिसमें जिले के ज्यादातर थानाध्यक्षों को तलब किया था। ऐसे कई थानेदार सीबीआई की गिरफ्त में आ सकते हैं।
राजस्व घाटे को पूरा करने को बढ़ाई रायल्टी
अवैध खनन वर्ष 2007 से शुरू हुआ। तब जिले में प्रति ट्रक पर नौ घनमीटर मौरंग लोड होती रही। इस पर खनिज विभाग रायल्टी के रूप में 270 रुपया लेता था। लेकिन बसपा सरकार में सिंडीकेट का उदय हुआ तो 100 रुपये प्रति ट्रक अवैध रूप वसूली शुरू हुई। जो सपा शासन काल तक 11 हजार रुपये तक पहुंच गई। इस पर खनिज राजस्व घट गया तो वसूली की भरपाई के लिए शासन स्तर से रायल्टी बढ़ाई। नौ घनमीटर मौरंग में 900 रुपये रायल्टी वसूली जाने लगी।
अवैध खनन के दौरान हुए क्षेत्रों में कई बवाल, अवैध खनन करने वाले दुबके
रोक के बावजूद प्रशासन के शह पर सत्तादल के लोग कराते रहे हैं अवैध खनन
अमर उजाला ब्यूरो