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दस्यु सरगना के भाई की हत्या में फरार सजायाफ्ता गिरफ्तार
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हमीरपुर। सुमेरपुर थानाक्षेत्र के पत्योरा गांव में दस्यु सरगना रामकरन सिंह के भाई की हत्या के मामले में फरार सजायाफ्ता को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इस हत्याकांड में उच्च न्यायालय प्रयागराज ने पांच लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। जिसमें एक को डकैतों ने पहले ही घेरकर मार डाला था। वहीं चार में एक ने सजा के डर से आत्महत्या कर ली थी। दो पहले से जेल में है, तीसरे को अब पुलिस ने पकड़ा है।
पत्योरा में दस्यु सरगना रामकरन सिंह के भाई जयकरन सिंह को वर्ष 1980 में गोलियों से भून डाला गया था। इस हत्याकांड में जनपद न्यायाधीश ने वर्ष 1981 में पांच लोगों को निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया था। इस मामले की अपील पीड़ित पक्ष ने उच्च न्यायालय प्रयागराज में की थी।
25 वर्ष बाद उच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोपितों में रामबहादुर सिंह, अयोध्या सिंह, रणविजय सिंह पुत्रगण लल्लू सिंह, इंद्रपाल सिंह पुत्र पृथ्वीराज सिंह तथा जगत सिंह पुत्र रजवा को दोषी करार देते हुए आजीवन कैद की सजा दी थी। सजा के भय से रणविजय सिंह ने अपने घर में सल्फास की गोलियां खाकर आत्महत्या कर ली थी।
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जबकि इंद्रपाल सिंह व जगत सिंह को पुलिस ने 4 मई 2006 को गिरफ्तार कर सेंट्रल जेल नैनी भेजा था। इस हत्याकांड में सजायाफ्ता अयोध्या सिंह 15 सालों से फरार चल रहा था। जिसे पुलिस ने पत्योरा गांव के पास से गिरफ्तार किया है। अपर पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार सिंह ने बताया सजायाफ्ता को सुमेरपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
1975 में हुई थी गाय की हत्या
दस्यु सरगना रामकरन सिंह ने वर्ष 1975 में एक गाय को भाला मार दिया था। जिससे उसकी मौत होने पर परिजनों ने उसे गंगा स्नान कराने के बाद रामजानकी मंदिर में पंचायत बैठाई थी। तब सभी ग्रामवासी भोज खाने को राजी हो गए, लेकिन रामबहादुर सिंह ने पंचायत का विरोध कर भोज में अपने पूरे मोहल्ले के लोगों को जाने से मना कर दिया था। वहीं से दुश्मनी का बीज पड़ गया और रामकरन सिंह पूर्व दस्यु सरगना राजाभइया सिंह (सुरौली बुजुर्ग) की गैंग में जा मिला तथा 21/22 जून 1976 को गांव में रामबहादुर सिंह के यहां डकैती डाली। जिसमें पांच हत्याएं हुईं। उसमें चार ग्रामीण व एक डकैत रामपाल सिंह (बेंदा जौहरपुर, बांदा) भी मारा गया था।
14 साल चला तीन परिवारों में खूनी खेल
पकड़े गए आरोपी के भाई जयबहादुर सिंह ने बताया वर्ष 1976 से दस्यु सरगना रामकरन सिंह के एनकाउंटर तक लगभग 14 साल तक खूनी खेल चला। जिसमें एक दर्जन से अधिक लोग मारे गए। बताया वर्ष 1976 में घर में हुई डकैती के दौरान उसकी पत्नी किशोरी की हत्या हो गई। उस समय उसके तीन पुत्र में सबसे छोटा 6 माह का था। पूरा परिवार बिखर गया और आज 44 साल का लंबा समय गुजरने के बाद भी पुरानी यादें ताजा हो गईं। कहा तीन परिवारों के बीच चली यह दुश्मनी में बहुत कुछ खोया है।
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पत्योरा में दस्यु सरगना रामकरन सिंह के भाई जयकरन सिंह को वर्ष 1980 में गोलियों से भून डाला गया था। इस हत्याकांड में जनपद न्यायाधीश ने वर्ष 1981 में पांच लोगों को निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया था। इस मामले की अपील पीड़ित पक्ष ने उच्च न्यायालय प्रयागराज में की थी।
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25 वर्ष बाद उच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोपितों में रामबहादुर सिंह, अयोध्या सिंह, रणविजय सिंह पुत्रगण लल्लू सिंह, इंद्रपाल सिंह पुत्र पृथ्वीराज सिंह तथा जगत सिंह पुत्र रजवा को दोषी करार देते हुए आजीवन कैद की सजा दी थी। सजा के भय से रणविजय सिंह ने अपने घर में सल्फास की गोलियां खाकर आत्महत्या कर ली थी।
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जबकि इंद्रपाल सिंह व जगत सिंह को पुलिस ने 4 मई 2006 को गिरफ्तार कर सेंट्रल जेल नैनी भेजा था। इस हत्याकांड में सजायाफ्ता अयोध्या सिंह 15 सालों से फरार चल रहा था। जिसे पुलिस ने पत्योरा गांव के पास से गिरफ्तार किया है। अपर पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार सिंह ने बताया सजायाफ्ता को सुमेरपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
1975 में हुई थी गाय की हत्या
दस्यु सरगना रामकरन सिंह ने वर्ष 1975 में एक गाय को भाला मार दिया था। जिससे उसकी मौत होने पर परिजनों ने उसे गंगा स्नान कराने के बाद रामजानकी मंदिर में पंचायत बैठाई थी। तब सभी ग्रामवासी भोज खाने को राजी हो गए, लेकिन रामबहादुर सिंह ने पंचायत का विरोध कर भोज में अपने पूरे मोहल्ले के लोगों को जाने से मना कर दिया था। वहीं से दुश्मनी का बीज पड़ गया और रामकरन सिंह पूर्व दस्यु सरगना राजाभइया सिंह (सुरौली बुजुर्ग) की गैंग में जा मिला तथा 21/22 जून 1976 को गांव में रामबहादुर सिंह के यहां डकैती डाली। जिसमें पांच हत्याएं हुईं। उसमें चार ग्रामीण व एक डकैत रामपाल सिंह (बेंदा जौहरपुर, बांदा) भी मारा गया था।
14 साल चला तीन परिवारों में खूनी खेल
पकड़े गए आरोपी के भाई जयबहादुर सिंह ने बताया वर्ष 1976 से दस्यु सरगना रामकरन सिंह के एनकाउंटर तक लगभग 14 साल तक खूनी खेल चला। जिसमें एक दर्जन से अधिक लोग मारे गए। बताया वर्ष 1976 में घर में हुई डकैती के दौरान उसकी पत्नी किशोरी की हत्या हो गई। उस समय उसके तीन पुत्र में सबसे छोटा 6 माह का था। पूरा परिवार बिखर गया और आज 44 साल का लंबा समय गुजरने के बाद भी पुरानी यादें ताजा हो गईं। कहा तीन परिवारों के बीच चली यह दुश्मनी में बहुत कुछ खोया है।