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सुप्रीम कोर्ट से पूर्व विधायक चंदेल की जमानत अर्जी हुई खारिज
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हमीरपुर। सामूहिक हत्याकांड के मामले में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे पूर्व विधायक अशोक सिंह चंदेल की जमानत की अर्जी सुप्रीम कोर्ट से खारिज हो गई। मेडिकल बोर्ड के सामने कोई गंभीर बीमारी न होने पर उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी गई है। वहीं, इसी हत्याकांड में एक अन्य आरोपी नसीम खां को छह सप्ताह के लिए जमानत मिली है।
26 जनवरी 1997 की शाम सुभाष बाजार स्थित नसीम बंदूक वाले की दुकान के सामने सामूहिक हत्याकांड हुआ था। इसमें भाजपा नेता राजीव शुक्ला के बड़े भाई राजेेश, राकेश शुक्ला, भतीजा गुड्डा, श्रीकांत पांडेय व वेदनायक की हत्या हुई थी। राजीव शुक्ला व रविकांत पांडेय गोली लगने से घायल हुए थे। इस मामले में पूर्व विधायक अशोक चंदेल के अलावा श्याम सिंह, साहब सिंह, झंडू सिंह, रुक्कू, शराब कारोबारी रघुवीर सिंह व उनके बेटे आशुतोष सिंह, प्रदीप सिंह, उत्तम सिंह, भान सिंह एडवोकेट व नसीम खां को नामजद किया गया था। मुकदमे के दौरान आरोपी झंडू सिंह की मौत हो चुकी है। वहीं रुक्कू पहले से ही आजीवन कारावास की सजा में जिला जेल में बंद हैं।
इस मामले में 19 अप्रैल 2019 को हाईकोर्ट इलाहाबाद की डबल बेंच ने पूर्व विधायक समेत नौ दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। 13 मई 2019 से वह जेल में निरुद्ध हैं। पूर्व विधायक मौजूदा में आगरा व अन्य आरोपी अलग-अलग जिलों की जेल में बंद हैं। मामले में एक आरोपी रघुवीर सिंह करीब तीन माह पूर्व जमानत पर रिहा हो चुका है।
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पूर्व विधायक के स्थानीय अधिवक्ता प्राणेश सिंह ने बताया कि आरोपी नसीम खां और पूर्व विधायक अशोक चंदेल की जमानत की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में बहस हुई। पूर्व विधायक का मेडिकल बोर्ड के सामने कोई गंभीर बीमारी न होने पर कोर्ट ने उनकी जमानत निरस्त कर दी।
वादी ने की थी मेडिकल बोर्ड से चेकअप कराने की मांग
हमीरपुर। मामले के वादी भाजपा नेता राजीव शुक्ला ने बताया कि पूर्व विधायक ने एक डॉक्टर से साठगांठ कर आगरा से लखनऊ मेडिकल कालेज रेफर कराया और जमानत के लिए मेडिकल के पेपर तैयार कराए। उन्होंने इसका विरोध कर मेडिकल बोर्ड से चेकअप कराने की मांग की। इस पर मेडिकल बोर्ड में पूर्व विधायक को कोई गंभीर बीमारी सामने नहीं आई। इसके चलते शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से इनकी जमानत निरस्त हो गई।
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26 जनवरी 1997 की शाम सुभाष बाजार स्थित नसीम बंदूक वाले की दुकान के सामने सामूहिक हत्याकांड हुआ था। इसमें भाजपा नेता राजीव शुक्ला के बड़े भाई राजेेश, राकेश शुक्ला, भतीजा गुड्डा, श्रीकांत पांडेय व वेदनायक की हत्या हुई थी। राजीव शुक्ला व रविकांत पांडेय गोली लगने से घायल हुए थे। इस मामले में पूर्व विधायक अशोक चंदेल के अलावा श्याम सिंह, साहब सिंह, झंडू सिंह, रुक्कू, शराब कारोबारी रघुवीर सिंह व उनके बेटे आशुतोष सिंह, प्रदीप सिंह, उत्तम सिंह, भान सिंह एडवोकेट व नसीम खां को नामजद किया गया था। मुकदमे के दौरान आरोपी झंडू सिंह की मौत हो चुकी है। वहीं रुक्कू पहले से ही आजीवन कारावास की सजा में जिला जेल में बंद हैं।
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इस मामले में 19 अप्रैल 2019 को हाईकोर्ट इलाहाबाद की डबल बेंच ने पूर्व विधायक समेत नौ दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। 13 मई 2019 से वह जेल में निरुद्ध हैं। पूर्व विधायक मौजूदा में आगरा व अन्य आरोपी अलग-अलग जिलों की जेल में बंद हैं। मामले में एक आरोपी रघुवीर सिंह करीब तीन माह पूर्व जमानत पर रिहा हो चुका है।
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पूर्व विधायक के स्थानीय अधिवक्ता प्राणेश सिंह ने बताया कि आरोपी नसीम खां और पूर्व विधायक अशोक चंदेल की जमानत की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में बहस हुई। पूर्व विधायक का मेडिकल बोर्ड के सामने कोई गंभीर बीमारी न होने पर कोर्ट ने उनकी जमानत निरस्त कर दी।
वादी ने की थी मेडिकल बोर्ड से चेकअप कराने की मांग
हमीरपुर। मामले के वादी भाजपा नेता राजीव शुक्ला ने बताया कि पूर्व विधायक ने एक डॉक्टर से साठगांठ कर आगरा से लखनऊ मेडिकल कालेज रेफर कराया और जमानत के लिए मेडिकल के पेपर तैयार कराए। उन्होंने इसका विरोध कर मेडिकल बोर्ड से चेकअप कराने की मांग की। इस पर मेडिकल बोर्ड में पूर्व विधायक को कोई गंभीर बीमारी सामने नहीं आई। इसके चलते शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से इनकी जमानत निरस्त हो गई।