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कल्याण सिंह का 72 किलो चांदी के सिक्के से हुआ था तुलादान
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हमीरपुर। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि में विवादित ढांचा ढहने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के जिला आगमन पर लोगों ने गर्मजोशी के साथ उनका स्वागत किया था। मंदिर के लिए सीएम की कुर्सी दांव पर लगाकर वह आम जनता के इतने करीब आ गए थे कि पार्टी नेताओं ने जनता की मदद से 72 किलो चांदी के सिक्के से तुलादान किया था। उनके निधन से पूरे जिले में शोक की लहर हैं।
भाजपा नेता व संघ के पूर्व जिला कार्यवाह सरस्वती शरण द्विवेदी ने बताया विवादित ढांचा ढहने के बाद कल्याण सिंह दिसंबर 1992 में जिले के राठ कस्बा आए थे। उनका स्वागत हजारों लोगों ने किया था। एसडीएम कोर्ट के पास मैदान में आयोजित सभा में उन्होंने कहा था कि भगवान श्रीराम के लिए कुर्सी ही नहीं जान भी न्यौछावर है। तब उनका 72 किलो चांदी के सिक्के से तुलादान किया गया था।
उन्होंने सारे सिक्के पार्टी कोष में ही दान कर दिए थे। बताया पूर्व विधायक ओंकार नाथ दुबे ने सुमेरपुर कस्बे में एक महिला की दोबारा नसबंदी किए जाने के मामले में आंदोलन किया तो पुलिस के लाठीचार्ज में घायल हुए थे। इस घटना की जानकारी होते ही कल्याण सिंह ने आकर हुंकार भरी थी। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण सिंह दादा ने कहा कल्याण सिंह कार्यकर्ताओं की बहुत सुनते थे। उन्हें पद का जरा भी घमंड नहीं था। राठ कस्बा और स्वामीजी के बरहरा गांव वह कई बार आए थे। स्वामीजी के प्रति बड़ी आस्था होने से उन्होंने मौदहा बांध का नाम स्वामी ब्रह्मानंद रखा था।
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मानवती कांड में भरी थी हुंकार
मायावती सरकार में चरखारी के विधायक उदय प्रकाश पर एक महिला से अभद्रता का आरोप था। इस मामले में पूर्व विधायक बादशाह सिंह ने बड़ा आंदोलन किया था। तब तत्कालीन एसपी जवाहरलाल त्रिपाठी ने बादशाह सिंह को गिरफ्तार कर यातनाएं दीं थी। इसकी गूंज फैलने पर उमा भारती आईं और मानवती को दिल्ली लिए जा रही थी, तभी पुलिस ने घेराबंदी कर रोक लिया था। उस समय डीएम उमा वर्मा और एसपी में टकराव भी हो गया था। इस घटना को लेकर कल्याण सिंह आए थे और पुलिस व सरकार को खुली चुनौती दी थी।
दस्यु बलराम खंगार गैंग का कराया था खात्मा
हमीरपुर। कल्याण सिंह के शासनकाल में बुंदेलखंड क्षेत्र में कई दस्यु पर बड़ी कार्रवाई हुई थी। दस्यु बलराम खंगार गैंग ने आठ लोगों की सामूहिक हत्या कर दी थी। तब कल्याण सिंह ने न सिर्फ तत्कालीन एक आईपीएस सुरेश चंद्र धुसिया को सस्पेंड किया था, बल्कि कई अफसरों पर कार्रवाई भी की थी। सामूहिक नरसंहार को अंजाम देने वाले पूरे गैंग का पंद्रह दिन में ही सफाया कर दिया गया था। उस समय कल्याण सिंह के निर्देश पर तत्कालीन राजस्व मंत्री राजनाथ सिंह और तत्कालीन डीजीपी श्रीराम अरुण आए थे।
पूर्व सीएम के निधन पर दी श्रद्धांजलि
राठ। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के निधन की जानकारी होते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। भाजपाइयों ने पूर्व सीएम के चित्र पर पुष्प अर्पित कर दो मिनट का मौन रखा। पूर्व मुख्यमंत्री का राठ क्षेत्र से विशेष लगाव था। रविवार को जिला महामंत्री उमाकांत राजपूत के आवास पर कार्यकर्ताओं ने पूर्व सीएम के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनकी आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा। पूर्व विधायक छोटेलाल वर्मा, किसान मोर्चा के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष कृष्ण कुमार गुप्ता बंटी, भूपेंद्र चौबे, राजीव आर्य उर्फ रज्जू, जितेंद्र अहिरवार, कर्ण राजपूत, अवधेश शर्मा, तरुण सिंह, आनंद सक्सेना, सभासद बृजेंद्र अनुरागी, राजेश अनुरागी आदि रहे।
बुंदेलखंडी भोजन माड़े का लिया था आनंद
गोहांड। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का गोहांड क्षेत्र से खासा लगाव था। अतीत पर गौर करें तो प्राथमिक पाठशाला के सामने बाबूजी ने तख्त पर बैठकर गिने चुने लोगों के उपस्थिति में पार्टी का सहयोग करने की अपील करने से लेकर मुख्यमंत्री कार्यकाल तक और भाजपा छोड़कर 2000 में राष्ट्रीय क्रांति पार्टी बनाने तक उनका संपर्क क्षेत्र से रहा। अनेक बार उनका कस्बा व क्षेत्र में आना जाना रहा। पूर्व चेयरमैन शंकर सिंह व मोहन सिंह राजपूत ने बताया अक्तूबर 2001 में राष्ट्रीय क्रांति पार्टी के बैनर तले नगर तिराहे पर उनकी बिरादरी बाहुल्य क्षेत्र होने की वजह से भारी जनसभा हुई। उनके साथ घनिष्ठ सहयोगी कुसुम राय भी थी। जनसभा के बाद मोहन सिंह राजपूत के आवास पर आकर बुंदेलखंडी भोजन माड़ो का आनंद लिया था।
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भाजपा नेता व संघ के पूर्व जिला कार्यवाह सरस्वती शरण द्विवेदी ने बताया विवादित ढांचा ढहने के बाद कल्याण सिंह दिसंबर 1992 में जिले के राठ कस्बा आए थे। उनका स्वागत हजारों लोगों ने किया था। एसडीएम कोर्ट के पास मैदान में आयोजित सभा में उन्होंने कहा था कि भगवान श्रीराम के लिए कुर्सी ही नहीं जान भी न्यौछावर है। तब उनका 72 किलो चांदी के सिक्के से तुलादान किया गया था।
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उन्होंने सारे सिक्के पार्टी कोष में ही दान कर दिए थे। बताया पूर्व विधायक ओंकार नाथ दुबे ने सुमेरपुर कस्बे में एक महिला की दोबारा नसबंदी किए जाने के मामले में आंदोलन किया तो पुलिस के लाठीचार्ज में घायल हुए थे। इस घटना की जानकारी होते ही कल्याण सिंह ने आकर हुंकार भरी थी। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण सिंह दादा ने कहा कल्याण सिंह कार्यकर्ताओं की बहुत सुनते थे। उन्हें पद का जरा भी घमंड नहीं था। राठ कस्बा और स्वामीजी के बरहरा गांव वह कई बार आए थे। स्वामीजी के प्रति बड़ी आस्था होने से उन्होंने मौदहा बांध का नाम स्वामी ब्रह्मानंद रखा था।
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मानवती कांड में भरी थी हुंकार
मायावती सरकार में चरखारी के विधायक उदय प्रकाश पर एक महिला से अभद्रता का आरोप था। इस मामले में पूर्व विधायक बादशाह सिंह ने बड़ा आंदोलन किया था। तब तत्कालीन एसपी जवाहरलाल त्रिपाठी ने बादशाह सिंह को गिरफ्तार कर यातनाएं दीं थी। इसकी गूंज फैलने पर उमा भारती आईं और मानवती को दिल्ली लिए जा रही थी, तभी पुलिस ने घेराबंदी कर रोक लिया था। उस समय डीएम उमा वर्मा और एसपी में टकराव भी हो गया था। इस घटना को लेकर कल्याण सिंह आए थे और पुलिस व सरकार को खुली चुनौती दी थी।
दस्यु बलराम खंगार गैंग का कराया था खात्मा
हमीरपुर। कल्याण सिंह के शासनकाल में बुंदेलखंड क्षेत्र में कई दस्यु पर बड़ी कार्रवाई हुई थी। दस्यु बलराम खंगार गैंग ने आठ लोगों की सामूहिक हत्या कर दी थी। तब कल्याण सिंह ने न सिर्फ तत्कालीन एक आईपीएस सुरेश चंद्र धुसिया को सस्पेंड किया था, बल्कि कई अफसरों पर कार्रवाई भी की थी। सामूहिक नरसंहार को अंजाम देने वाले पूरे गैंग का पंद्रह दिन में ही सफाया कर दिया गया था। उस समय कल्याण सिंह के निर्देश पर तत्कालीन राजस्व मंत्री राजनाथ सिंह और तत्कालीन डीजीपी श्रीराम अरुण आए थे।
पूर्व सीएम के निधन पर दी श्रद्धांजलि
राठ। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के निधन की जानकारी होते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। भाजपाइयों ने पूर्व सीएम के चित्र पर पुष्प अर्पित कर दो मिनट का मौन रखा। पूर्व मुख्यमंत्री का राठ क्षेत्र से विशेष लगाव था। रविवार को जिला महामंत्री उमाकांत राजपूत के आवास पर कार्यकर्ताओं ने पूर्व सीएम के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनकी आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा। पूर्व विधायक छोटेलाल वर्मा, किसान मोर्चा के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष कृष्ण कुमार गुप्ता बंटी, भूपेंद्र चौबे, राजीव आर्य उर्फ रज्जू, जितेंद्र अहिरवार, कर्ण राजपूत, अवधेश शर्मा, तरुण सिंह, आनंद सक्सेना, सभासद बृजेंद्र अनुरागी, राजेश अनुरागी आदि रहे।
बुंदेलखंडी भोजन माड़े का लिया था आनंद
गोहांड। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का गोहांड क्षेत्र से खासा लगाव था। अतीत पर गौर करें तो प्राथमिक पाठशाला के सामने बाबूजी ने तख्त पर बैठकर गिने चुने लोगों के उपस्थिति में पार्टी का सहयोग करने की अपील करने से लेकर मुख्यमंत्री कार्यकाल तक और भाजपा छोड़कर 2000 में राष्ट्रीय क्रांति पार्टी बनाने तक उनका संपर्क क्षेत्र से रहा। अनेक बार उनका कस्बा व क्षेत्र में आना जाना रहा। पूर्व चेयरमैन शंकर सिंह व मोहन सिंह राजपूत ने बताया अक्तूबर 2001 में राष्ट्रीय क्रांति पार्टी के बैनर तले नगर तिराहे पर उनकी बिरादरी बाहुल्य क्षेत्र होने की वजह से भारी जनसभा हुई। उनके साथ घनिष्ठ सहयोगी कुसुम राय भी थी। जनसभा के बाद मोहन सिंह राजपूत के आवास पर आकर बुंदेलखंडी भोजन माड़ो का आनंद लिया था।