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कम पैदावार पर ताव खा गया भूसा
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हमीरपुर। इस बार भूसे पर महंगाई की मार है। एक क्विंटल भूसे का दाम एक हजार तक है। भूसा कम मात्रा में मिल रहा है।
अन्ना मवेशियों के फसल बर्बाद करने की वजह से किसानों ने इस बार गेहूं बुआई का रकबा कम कर दिया। ज्यादातर किसानों ने लाही या सरसों के साथ मटर की फसलें बोई। बीच-बीच में बारिश व मौसम खराब होने से लाही और मटर की पैदावार भी कम रही। गेहूं की बुआई का रकबा घटने से इस बार बाजार भाव एमएसपी से अधिक है। इसी वजह से सरकारी गेहूं की खरीद के लिए बनाए गए क्रय केंद्रों पर से किसान अनाज लेकर नहीं जा रहे हैं। महंगाई का असर भूसे पर भी दिख रहा है। भूूसा का सीजन पर दाम आठ सौ रुपये से लेकर एक हजार रुपये प्रति क्विंटल है। किसान गेहूं के साथ ही भूसा खेत से उठाकर भंडारण कर रहे है। इस वजह से कम भूसा खरीदने गांव के पशुपालकों को जरूरत का भूसा खरीदने के लिए भटकना पड़ रहा है।
पत्योरा के रामबाबू सोनकर ने कहा कि अन्ना मवेशियों की वजह से दो बीघा गेहूं बोया था। सोचा था जरूरत का भूसा खरीद लिया जाएगा। अब भूसा नहीं मिल रहा है। कारीमाटी के बबलू सिंह का कहना है कि भूसे की महंगाई रिकार्ड तोड़ रही है। ऐसे में दूध का मूल्य प्रभावित होगा। दूध भी महंगाई की मार से अछूता नहीं रहेगा।
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अन्ना मवेशियों के फसल बर्बाद करने की वजह से किसानों ने इस बार गेहूं बुआई का रकबा कम कर दिया। ज्यादातर किसानों ने लाही या सरसों के साथ मटर की फसलें बोई। बीच-बीच में बारिश व मौसम खराब होने से लाही और मटर की पैदावार भी कम रही। गेहूं की बुआई का रकबा घटने से इस बार बाजार भाव एमएसपी से अधिक है। इसी वजह से सरकारी गेहूं की खरीद के लिए बनाए गए क्रय केंद्रों पर से किसान अनाज लेकर नहीं जा रहे हैं। महंगाई का असर भूसे पर भी दिख रहा है। भूूसा का सीजन पर दाम आठ सौ रुपये से लेकर एक हजार रुपये प्रति क्विंटल है। किसान गेहूं के साथ ही भूसा खेत से उठाकर भंडारण कर रहे है। इस वजह से कम भूसा खरीदने गांव के पशुपालकों को जरूरत का भूसा खरीदने के लिए भटकना पड़ रहा है।
पत्योरा के रामबाबू सोनकर ने कहा कि अन्ना मवेशियों की वजह से दो बीघा गेहूं बोया था। सोचा था जरूरत का भूसा खरीद लिया जाएगा। अब भूसा नहीं मिल रहा है। कारीमाटी के बबलू सिंह का कहना है कि भूसे की महंगाई रिकार्ड तोड़ रही है। ऐसे में दूध का मूल्य प्रभावित होगा। दूध भी महंगाई की मार से अछूता नहीं रहेगा।
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