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नए नियम से मंडी का राजस्व आधा
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भरुआसुमेरपुर। प्रदेश सरकार की ओर से मंडी एक्ट में बदलाव करने से गल्ला मंडियों के राजस्व पर असर पड़ने लगा है। बाहर होने वाली खरीद-फरोख्त नियंत्रण से बाहर होने के कारण राजस्व में गिरावट आई है और इसका सीधा असर मंडी के अंदर होने वाली खरीद-फरोख्त पर पड़ा है। राजस्व आधा रह गया है।
प्रदेश सरकार ने किसानों व व्यापारियों को सुविधा देने के लिए मंडी प्राविधानों में कुछ संसोधन किया था। इसका सीधा असर मंडियों के कामकाज पर दिखने लगा है। पूर्व व्यवस्था में मंडी के अंदर व बाहर जो भी खरीद फरोख्त होती थी। उसमें भी मंडी शुल्क देय था। मगर अब एक्ट में संशोधन होने पर ऐसा नहीं है। वर्तमान में बाहर होने वाली खरीद-फरोख्त में किसी तरह का मंडी शुल्क देय नहीं है और मंडी कर्मी इस खरीद-फरोख्त में हस्तक्षेप नहीं कर सकते हैं। इस वजह से बाहर बिकने वाले जिंसों मसलन गुड़, चावल, सब्जी, लकड़ी आदि में मंडी का नियंत्रण खत्म हो गया है। पिछले वर्ष तक मंडी शुल्क दो प्रतिशत था। अब यह एक प्रतिशत कर दिया गया है।
इस वजह से मंडी के राजस्व में पिछले वर्ष की तुलना में 50 फीसदी राजस्व की कमी दर्ज हुई है। मंडी सचिव बृजेश कुमार निगम ने बताया जुलाई 2020 में 36 लाख 93 हजार 96 रुपये राजस्व मिला था। जुलाई माह तक कुल राजस्व दो करोड़ 29 लाख 11 हजार 877 रुपये प्राप्त हुआ था। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष जुलाई माह में 26 लाख 61 हजार 417 रुपये आया है। जबकि अब तक कुल राजस्व 1 करोड़ 6 लाख 78 हजार 519 रुपये प्राप्त हुआ है। बताया तमाम व्यापारी मंडी शुल्क की अदायगी से बचने के लिए मंडी के बाहर खरीद फरोख्त करने लगे हैं। तिलहन व दलहन की ज्यादातर खरीद अब बाहर होने लगी है। इससे मंडी के राजस्व को करारा झटका लगा है।
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प्रदेश सरकार ने किसानों व व्यापारियों को सुविधा देने के लिए मंडी प्राविधानों में कुछ संसोधन किया था। इसका सीधा असर मंडियों के कामकाज पर दिखने लगा है। पूर्व व्यवस्था में मंडी के अंदर व बाहर जो भी खरीद फरोख्त होती थी। उसमें भी मंडी शुल्क देय था। मगर अब एक्ट में संशोधन होने पर ऐसा नहीं है। वर्तमान में बाहर होने वाली खरीद-फरोख्त में किसी तरह का मंडी शुल्क देय नहीं है और मंडी कर्मी इस खरीद-फरोख्त में हस्तक्षेप नहीं कर सकते हैं। इस वजह से बाहर बिकने वाले जिंसों मसलन गुड़, चावल, सब्जी, लकड़ी आदि में मंडी का नियंत्रण खत्म हो गया है। पिछले वर्ष तक मंडी शुल्क दो प्रतिशत था। अब यह एक प्रतिशत कर दिया गया है।
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इस वजह से मंडी के राजस्व में पिछले वर्ष की तुलना में 50 फीसदी राजस्व की कमी दर्ज हुई है। मंडी सचिव बृजेश कुमार निगम ने बताया जुलाई 2020 में 36 लाख 93 हजार 96 रुपये राजस्व मिला था। जुलाई माह तक कुल राजस्व दो करोड़ 29 लाख 11 हजार 877 रुपये प्राप्त हुआ था। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष जुलाई माह में 26 लाख 61 हजार 417 रुपये आया है। जबकि अब तक कुल राजस्व 1 करोड़ 6 लाख 78 हजार 519 रुपये प्राप्त हुआ है। बताया तमाम व्यापारी मंडी शुल्क की अदायगी से बचने के लिए मंडी के बाहर खरीद फरोख्त करने लगे हैं। तिलहन व दलहन की ज्यादातर खरीद अब बाहर होने लगी है। इससे मंडी के राजस्व को करारा झटका लगा है।
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