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Hamirpur News: ब्रोंकाइटिस, त्वचा रोग व अस्थमा का कारण बनती है गाजर घास
Tue, 22 Aug 2023 01:13 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
Updated Tue, 22 Aug 2023 01:13 AM IST
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हमीरपुर। मानव व पशुओं के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक गाजर घास के नियंत्रण को कृषि विभाग ने एडवायजरी जारी की है। जिला कृषि अधिकारी ने खेतों में खरपतवार के रूप में पैदा होने वाली गाजर घास को फूल लगने से पूर्व उखाड़ कर कंपोस्ट बना प्रयोग करने की सलाह दी है। साथ ही इसे दवाओं का प्रयोग करने के साथ अन्य तरीकों से नष्ट करने की जानकारी दी है।
जिला कृषि अधिकारी डॉ. हरीशंकर चौधरी ने बताया कि गाजर घास (पार्थेनियम हिस्टेरोफोरस) जिसे आमतौर पर कांग्रेस घास, सफेद टोपी असाडी, गाजरी, चटक चांदनी आदि नामों से जाना जाता है। इसमें लगभग 5000 से 25000 बीज/पौधा पैदा करने की क्षमता होती है। बीज अपने कम वजन के कारण हवा, पानी और मानवीय गतिविधियों द्वारा आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंच जाते हैं।
गाजर घास को सबसे अधिक खतरनाक खरपतवारों में गिना जाता है क्योंकि यह मनुष्यों और पशुओं में त्वचा रोग (डरमेटाइटिस), अस्थमा व ब्रोंकाइटिस जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनता है। फूल आने से पहले इस खरपतवार को उखाड़कर कंपोस्ट या बर्मी कंपोस्ट बना लें। इसे विस्थापित करने के लिए चकोड़ा व गेंदा जैसे स्वस्थायी प्रतिस्पर्धी पौधों की प्रजातियों के बीज का छिड़काव करें।
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अकृषित क्षेत्रों में संपूर्ण वनस्पति नियंत्रण के लिए ग्लाइफोसेट (1 1.5%) जैसे शाकनाशी का छिड़काव करें। मिश्रित वनस्पति में पार्थेनियम के नियंत्रण को मेट्रिब्यूजिन (0.3-0.5%) या 2,4-डी (1.0-1.5%) का छिड़काव फूल आने से पहले करें। ब्लाक स्थित राजकीय कृषि बीज भंडार / कृषि रक्षा इकाई पर संपर्क कर सकते है। अधिक जानकारी के लिए रोगग्रस्त पौधों की फोटो खींच कर व्हाट्सअप नंबर 9452247111 या 9452257111 पर भेजें या रोग के संबंध में एसएमएस करें और 24-48 घंटे के अंदर अपनी समस्या का समाधान पाए।
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जिला कृषि अधिकारी डॉ. हरीशंकर चौधरी ने बताया कि गाजर घास (पार्थेनियम हिस्टेरोफोरस) जिसे आमतौर पर कांग्रेस घास, सफेद टोपी असाडी, गाजरी, चटक चांदनी आदि नामों से जाना जाता है। इसमें लगभग 5000 से 25000 बीज/पौधा पैदा करने की क्षमता होती है। बीज अपने कम वजन के कारण हवा, पानी और मानवीय गतिविधियों द्वारा आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंच जाते हैं।
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गाजर घास को सबसे अधिक खतरनाक खरपतवारों में गिना जाता है क्योंकि यह मनुष्यों और पशुओं में त्वचा रोग (डरमेटाइटिस), अस्थमा व ब्रोंकाइटिस जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनता है। फूल आने से पहले इस खरपतवार को उखाड़कर कंपोस्ट या बर्मी कंपोस्ट बना लें। इसे विस्थापित करने के लिए चकोड़ा व गेंदा जैसे स्वस्थायी प्रतिस्पर्धी पौधों की प्रजातियों के बीज का छिड़काव करें।
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अकृषित क्षेत्रों में संपूर्ण वनस्पति नियंत्रण के लिए ग्लाइफोसेट (1 1.5%) जैसे शाकनाशी का छिड़काव करें। मिश्रित वनस्पति में पार्थेनियम के नियंत्रण को मेट्रिब्यूजिन (0.3-0.5%) या 2,4-डी (1.0-1.5%) का छिड़काव फूल आने से पहले करें। ब्लाक स्थित राजकीय कृषि बीज भंडार / कृषि रक्षा इकाई पर संपर्क कर सकते है। अधिक जानकारी के लिए रोगग्रस्त पौधों की फोटो खींच कर व्हाट्सअप नंबर 9452247111 या 9452257111 पर भेजें या रोग के संबंध में एसएमएस करें और 24-48 घंटे के अंदर अपनी समस्या का समाधान पाए।