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Hamirpur News: पाकिस्तान से युद्ध को लेकर फड़कने लगी पूर्व सैनिकों की भुजाएं

Thu, 08 May 2025 12:22 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर Updated Thu, 08 May 2025 12:22 AM IST
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Arms of ex-soldiers started trembling for war with Pakistan
हमीरपुर। भारत व पाकिस्तान के बीच बन रहे युद्ध जैसे हालात के बाद मंगलवार की रात भारत की ओर से की गई एयर स्ट्राइक को जिले के पूर्व सैनिकों ने उचित बताया। वहीं, वर्ष 1971 में हुए भारत-पाक युद्ध की यादें ताजा हो गई। पूर्व सैनिकों ने फिर इसमें शामिल होने की इच्छा जताई। कहाकि पहले देश के पास इतने संसाधन नहीं थे तब पाक को धूल चटाई थी अब यदि युद्ध हुआ तो उसे मिट्टी में मिला देंगे।
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- एयर फोर्स में रहे मुख्यालय निवासी रघुनाथ सचान के अनुसार वह 1971 में हुए भारत पाक युद्ध में शामिल रहे। उस दौरान उनकी शिलांग में तैनाती थी। बांग्लादेश पहुंच पाकिस्तान को चारों ओर से घेर लिया। वहां सेना के जवानों ने जमीन पर आमने सामने लड़ पाक के छक्के छुड़ाए। वहीं, एयर फोर्स ने बमबारी कर पाक सैनिकाें को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर कर दिया। बड़े एयरक्रॉफ्ट से बमबारी की जाती थी।
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अब आमने-सामने नहीं होती लड़ाई
- जिले के मलेहटा गांव निवासी पूर्व सैनिक वीर प्रताप सिंह के अनुसार 1971 में अब जैसे संसाधन नहीं थे। उस दौरान जमीन पर आमने-सामने लड़ाई लड़ी जाती थी। इसमें जवान शहीद होने के साथ घायल बहुत होते थे। तब सेना ने अदम्य साहस दिखा दुश्मन को हराया। अब तो ऐसी तकनीक आ गई की बैठे-बैठे कहीं भी दुश्मन को खोज कर मार गिराया जा सकता है।
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आतंकवाद बर्दाश्त नहीं, युद्ध मजबूरी
- पाकिस्तान से 1971 की लड़ाई के गवाह रहे सुमेरपुर कस्बा निवासी नायब सूबेदार शिवकुमार तिवारी के अनुसार युद्ध की घोषणा होने पर वह अंबाला से 12 अक्टूबर 1971 को पाकिस्तान बॉर्डर के लिए रवाना हुए। 6 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान ने भारत पर हवाई हमला किया। इसका देश के जवानों ने मुंहतोड़ जवाब दिया था। 12 दिन तक चले युद्ध के बाद 17 दिसंबर 1971 को सीज फायर की घोषणा की गई थी। कहा कि किसी भी देश के लिए युद्ध अच्छा नहीं है। लेकिन आतंकवाद को किसी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। भारत सरकार ने जो निर्णय किया है वह बहुत अच्छा है।
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पहलगाम का बदला लिया
- 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध में अपने शौर्य का लोहा मनवा चुके रिटायर्ड कर्नल प्रेम प्रताप सिंह पाकिस्तान पर सेना की कार्रवाई से खुश नजर आए। कहते हैं कि सरकार द्वारा पहलगाम का बदला अच्छी तरह लिया जा रहा है। हमारी सेना पाकिस्तान पोषित आतंकवाद को उसकी सरजमीं पर मिटाने में लगी है। भारतीय सेना जान हथेली पर रखकर सरहदों की हिफाजत करती है। बताया कि 1971 के युद्ध में उनकी पलटन के लांस नायक अलबर्ट एक्का ने असाधारण साहस का परिचय दिया था। अपना बलिदान देते हुए पाकिस्तानी सेना को धूल चटाई थी। उनके शौर्य के लिए मरणोपरांत परमवीर चक्र प्रदान किया गया था।

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आतंक का समूल नाश करने की जरूरत
- राठ के सिकंदरपुरा मोहल्ला निवासी राम मिलन तिवारी आर्मी मेडिकल कोर में आर्नर लेफ्टिनेंट पद से रिटायर्ड हुए। कहते हैं कि 1971 में शिलांग में पहली पोस्टिंग थी। उन्होंने भारत पाकिस्तान के युद्ध में 24 घंटे की सेवा दी थी। कहा कि पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आएगा। उसके खिलाफ कोई भी कार्रवाई की जाती है तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोना रोता है। कहा कि अब निर्णायक जंग का समय है। आतंक का समूल नाश करना होगा, तभी अपने मुल्क में अमन चैन रहेगा। देर रात भारतीय फौज द्वारा की गई स्ट्राइक पर खुशी जताई। कहा हमारी सेनाएं हर मोर्चा फतह करने की क्षमता रखतीं हैं।
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