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नए शासनादेश से किसानों की दुश्वारियां बढ़ीं
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मौदहा। गुरुवार सुबह शासन से आए नए शासनादेश से किसानों में आक्रोश है। नए शासनादेश के अनुसार किसान की उपज का मात्र तीस क्विंटल गेहूं ही सरकारी खरीद केंद्र में खरीदा जाएगा। जबकि अप्रैल में कराए गए पंजीकरण में एक बीघा में छह क्विंटल गेहूं खरीदने का प्रावधान रखा गया था। जिसके चलते बड़ी संख्या में गेहूं लिए किसान मंडी में अपने नंबर का इंतजार कर रहे हैं। नए शासनादेश को सुनते ही किसानों में आक्रोश है। आक्रोशित किसानों ने गल्ला मंडी में नारेबाजी कर एसडीएम व तहसीलदार से मिलने पहुंचे।
वहीं कोरोना काल में भी किसान आंदोलन होने की संभावना बढ़ गई है। कस्बे में चार गेहूं खरीद केंद्र पीसीएफ, विपणन शाखा के दो, एक सहकारी क्रय विक्रय संचालित हैं। गेहूं की तौल न होने से किसानों को चार-पांच दिन मंडी में रहना पड़ रहा है। लेकिन बीते कुछ समय से एक केंद्र संचालक बीमार चल रहे हैं। ऐसे में पंजीकृत किसानों को तीन केंद्रों पर तौल कराने के लिए निर्धारित किया गया था। इनमें पहले से पंजीकरण कराए किसानों की गेहूं खरीद प्रभावित चल रही है। बारदाना के अभाव में किसानों को हफ्तों मंडी में पड़ा रहना पड़ा।
मुटनी गांव से आए किसान रमाशंकर कुशवाहा ने बताया वह पांच दिन से मंडी में पड़े हैं। उनका टोकन 137 क्विंटल का है, लेकिन अब मात्र तीस क्विंटल ही गेहूं तौला जाना है। बाकी गेहूं उन्हें आढ़तियों को औने पौने दामों पर बेचना पड़ेगा।
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किसान हकीमुद्दीन ने कहा एक सप्ताह से तौल कराने के लिए मंडी में पड़े हैं, लेकिन नया शासनादेश सुनकर वह परेशान हैं। कहा उन्हें ट्रैक्टर का एक सप्ताह का भाड़ा देना पड़ेगा। जबकि कमीशन देने वालों का गेहूं तौल लिया जाता है।
मांचा के जीशान अली ने बताया दलालों के माध्यम से जिनकी सेटिंग हो जाती है। उनका गेहूं तौल लिया जाता है। नहीं तो कहीं बारदाना, कहीं जगह न होने तो कभी ऑनलाइन फीडिंग का बहाना बनाकर तौल बंद कर दी जाती है।
बुधवार से कंप्यूटरों में लोड किए गए साफ्टवेयर सिर्फ 30 क्विंटल ही ले रहे हैं। अभी शासनादेश नहीं आया है। कहा उन्हें इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। इसके लिए विपणन अधिकारी से जानकारी कर बताएंगे। - राजेश कुमार यादव, एडीएम गेहूं खरीद
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वहीं कोरोना काल में भी किसान आंदोलन होने की संभावना बढ़ गई है। कस्बे में चार गेहूं खरीद केंद्र पीसीएफ, विपणन शाखा के दो, एक सहकारी क्रय विक्रय संचालित हैं। गेहूं की तौल न होने से किसानों को चार-पांच दिन मंडी में रहना पड़ रहा है। लेकिन बीते कुछ समय से एक केंद्र संचालक बीमार चल रहे हैं। ऐसे में पंजीकृत किसानों को तीन केंद्रों पर तौल कराने के लिए निर्धारित किया गया था। इनमें पहले से पंजीकरण कराए किसानों की गेहूं खरीद प्रभावित चल रही है। बारदाना के अभाव में किसानों को हफ्तों मंडी में पड़ा रहना पड़ा।
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मुटनी गांव से आए किसान रमाशंकर कुशवाहा ने बताया वह पांच दिन से मंडी में पड़े हैं। उनका टोकन 137 क्विंटल का है, लेकिन अब मात्र तीस क्विंटल ही गेहूं तौला जाना है। बाकी गेहूं उन्हें आढ़तियों को औने पौने दामों पर बेचना पड़ेगा।
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किसान हकीमुद्दीन ने कहा एक सप्ताह से तौल कराने के लिए मंडी में पड़े हैं, लेकिन नया शासनादेश सुनकर वह परेशान हैं। कहा उन्हें ट्रैक्टर का एक सप्ताह का भाड़ा देना पड़ेगा। जबकि कमीशन देने वालों का गेहूं तौल लिया जाता है।
मांचा के जीशान अली ने बताया दलालों के माध्यम से जिनकी सेटिंग हो जाती है। उनका गेहूं तौल लिया जाता है। नहीं तो कहीं बारदाना, कहीं जगह न होने तो कभी ऑनलाइन फीडिंग का बहाना बनाकर तौल बंद कर दी जाती है।
बुधवार से कंप्यूटरों में लोड किए गए साफ्टवेयर सिर्फ 30 क्विंटल ही ले रहे हैं। अभी शासनादेश नहीं आया है। कहा उन्हें इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। इसके लिए विपणन अधिकारी से जानकारी कर बताएंगे। - राजेश कुमार यादव, एडीएम गेहूं खरीद