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अब प्रशासन भी सजग
Hamirpur
Updated Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
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बीहड़ी गांव कैंथी अनोखे आंदोलन रामधुन के चलते चर्चा में
हमीरपुर। सुमेरपुर विकासखंड क्षेत्र का बीहड़ी गांव कैंथी इस समय अनोखे आंदोलन के चलते चर्चा में है। गांव का विकास न होने के चलते यहां के लोग गांव के शिवमंदिर में रामधुन करने में लगे हुए है। गांव के लोग जब शासन प्रशासन को प्रार्थना पत्र दे-देकर थक हार गए तो उन्होंने एकजुट होकर शिव के दरबार में रामधुन गानी शुरू कर दी। इस आंदोलन में शामिल एक ग्रामीण हताशा और निराशा के चलते जान भी गंवा बैठा। तब कहीं प्रशासन को इस गांव की सुध आई है और धीरे-धीरे ही सही यहां के विकास के लिए कदम उठाए जाने लगे हैं। जहां शुक्रवार को खाली पड़े एएनएम सेंटर पर कर्मी तैनात कर गांव के लिए विद्युत तार और खंभे उपलब्ध कराए गए वहीं अब मुख्य मांग पुल का एप्रोच मार्ग बनाए जाने के लिए भी लोनिवि ने तेजी दिखाना शुरू कर दिया है।
गौरतलब हो कि वर्ष 2006 में पुल के एप्रोच मार्ग के लिए 473.39 लाख रुपए जारी किए गए। लेकिन भूल बस यह धनराशि बांदा जनपद के सेतु अंश में चली गई। इस धनराशि को वापस लाने के लिए विभागीय अधिकारियों के पत्राचार में करीब 6 वर्ष लग गए। लेकिन अभी तक यह धनराशि आवंटित नही की जा सकी। इसके साथ ही 6 वर्ष में महंगाई के बढ़ने के साथ ही एप्रोच मार्ग को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए लोक निर्माण के अभियंताओं ने पुनरीक्षित आगणन तैयार किया है। जिससे यह लागत बढ़कर 797.20 लाख रुपए हो गई है। इसके साथ ही झांसी के मुख्य अभियंता एसके अग्रवाल ने बीते 16 अक्तूबर को मुख्य अभियंता सेतु लखनऊ को पत्र लिखकर बताया कि इस एप्रोच मार्ग में सुमेरपुर की तरफ 1.10 हे. व कैंथी की तरफ 0.71 हे. किसानों की भूमि लेनी पड़ेगी। इसके साथ ही अतिरिक्त पहुंच मार्ग के लिए कैंथी की तरफ 2.25 हे. भूमि अधिगृहीत करनी पड़ेगी।
इस भूमि के एवज में किसानों को मुआवजे के लिए 16.28 लाख रूपए की जरूरत पड़ेगी। स्थानीय लोनिवि प्रांतीय खंड के अधिशाषी अभियंता आरके तिवारी ने अपर जिलाधिकारी को लिखे पत्र में बताया है कि पुनरीक्षित आगणन की स्वीकृति के लिए पत्रावलियां मुख्य अभियंता सेतु को प्रेषित की जा चुकी हैं।
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हमीरपुर। सुमेरपुर विकासखंड क्षेत्र का बीहड़ी गांव कैंथी इस समय अनोखे आंदोलन के चलते चर्चा में है। गांव का विकास न होने के चलते यहां के लोग गांव के शिवमंदिर में रामधुन करने में लगे हुए है। गांव के लोग जब शासन प्रशासन को प्रार्थना पत्र दे-देकर थक हार गए तो उन्होंने एकजुट होकर शिव के दरबार में रामधुन गानी शुरू कर दी। इस आंदोलन में शामिल एक ग्रामीण हताशा और निराशा के चलते जान भी गंवा बैठा। तब कहीं प्रशासन को इस गांव की सुध आई है और धीरे-धीरे ही सही यहां के विकास के लिए कदम उठाए जाने लगे हैं। जहां शुक्रवार को खाली पड़े एएनएम सेंटर पर कर्मी तैनात कर गांव के लिए विद्युत तार और खंभे उपलब्ध कराए गए वहीं अब मुख्य मांग पुल का एप्रोच मार्ग बनाए जाने के लिए भी लोनिवि ने तेजी दिखाना शुरू कर दिया है।
गौरतलब हो कि वर्ष 2006 में पुल के एप्रोच मार्ग के लिए 473.39 लाख रुपए जारी किए गए। लेकिन भूल बस यह धनराशि बांदा जनपद के सेतु अंश में चली गई। इस धनराशि को वापस लाने के लिए विभागीय अधिकारियों के पत्राचार में करीब 6 वर्ष लग गए। लेकिन अभी तक यह धनराशि आवंटित नही की जा सकी। इसके साथ ही 6 वर्ष में महंगाई के बढ़ने के साथ ही एप्रोच मार्ग को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए लोक निर्माण के अभियंताओं ने पुनरीक्षित आगणन तैयार किया है। जिससे यह लागत बढ़कर 797.20 लाख रुपए हो गई है। इसके साथ ही झांसी के मुख्य अभियंता एसके अग्रवाल ने बीते 16 अक्तूबर को मुख्य अभियंता सेतु लखनऊ को पत्र लिखकर बताया कि इस एप्रोच मार्ग में सुमेरपुर की तरफ 1.10 हे. व कैंथी की तरफ 0.71 हे. किसानों की भूमि लेनी पड़ेगी। इसके साथ ही अतिरिक्त पहुंच मार्ग के लिए कैंथी की तरफ 2.25 हे. भूमि अधिगृहीत करनी पड़ेगी।
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इस भूमि के एवज में किसानों को मुआवजे के लिए 16.28 लाख रूपए की जरूरत पड़ेगी। स्थानीय लोनिवि प्रांतीय खंड के अधिशाषी अभियंता आरके तिवारी ने अपर जिलाधिकारी को लिखे पत्र में बताया है कि पुनरीक्षित आगणन की स्वीकृति के लिए पत्रावलियां मुख्य अभियंता सेतु को प्रेषित की जा चुकी हैं।
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