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चार लेखपालों ने हड़पे दैवी आपदा के 52 लाख

Thu, 20 Oct 2016 10:52 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, हमीरपुर
अमर उजाला ब्यूरो, हमीरपुर Updated Thu, 20 Oct 2016 10:52 PM IST
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52 million of the natural disaster Defalcation by four Lekpal
प्रतीकात्मक।

चार लेखपालों ने दैवी आपदा से पीड़ित किसानों को बांटे जाने के लिए केंद्र सरकार से मिली राशि से 52 लाख रुपये हड़प लिए। इसके लिए उन्होंने भूमिहीनों को बड़ा किसान बताकर उनके नाम से चेक कैश करा लिए। एक रिटायर्ड फौजी ने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी हासिल की तो घोटाले की परतें खुलने लगीं। सरीला एसडीएम रामसुरेश वर्मा ने चारों लेखपालों को निलंबित कर दिया है। तहसीलदार ने जरिया थाने में इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

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वर्ष 2015-16 की प्राकृतिक आपदा में क्षेत्र के किसानों को कृषि निवेश अनुदान के तहत राहत राशि का वितरण नियमानुसार किए जाने के निर्देश जारी हुए थे लेकिन मुआवजे के वितरण में भारी धांधली की गई। शिकायतों पर अधिकारी चुप्पी साधे रहे। इस पर टोलारावत गांव के रिटायर्ड फौजी हरचरन ने जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत मुआवजे के वितरण की जानकारी मांगी, तो घोटाला सामने आ गया। प्रशासन की भी आंखें खुलीं। गहराई से छानबीन में धांधली परत दर परत खुलने लगीं।
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तहसीलदार मनोज कुमार की ओर से थाना जरिया में दर्ज कराई गई रिपोर्ट के मुताबिक कस्बे में तैनात रहे लेखपाल योगेंद्र प्रसाद ने 34 चेकों के माध्यम से 6,06,708 रुपये निकाले हैं। पुरैनी गांव में तैनात रहे लेखपाल राम सजीवन ने 232 चेकों के माध्यम से 41,27,903 रुपये तथा छिबौली में तैनात रहे लेखपाल जगतराम ने 35 चेकों के जरिए 3,67,894 रुपये हड़पे हैं। बौखर में तैनात रहे लेखपाल रामजीवन दुबे ने 12 चेकाें के माध्यम से 1,64,571 रुपये का गबन किया है। इस रकम का बैंकाें से भुगतान भी हो गया है। तहसील क्षेत्र में पांच करोड़ के घोटाले की चर्चा है।
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हरचरन फौजी की मेहनत रंग लाई
मुआवजा वितरण में धांधली को उजागर करने का श्रेय क्षेत्र के टोलारावत गांव निवासी समाजसेवी व रिटायर्ड फौजी हरचरन को जाता है। उन्होंने पांच लोगों को फर्जी तरीके से जारी किए गए 19 चेकों की जानकारी जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत तहसीलदार सरीला से मांगी थी।

हरचरन फौजी ने बताया कि 2015 में वह राठ क्षेत्र की बसेला स्टेट बैंक का ग्राहक केंद्र चलाते थे। उसी समय उनके केंद्र से पांच लोगों ने 17 चेकों का भुगतान लिया था। धांधली की आशंका पर उन्होंने जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत तहसीलदार से जानकारी मांग ली थी।

तब तहसीलदार ने चेकाें की जानकारी उपलब्ध न होने की बात कहकर मामला दबा दिया था। हालांकि तहसीलदार मनोज कुमार ने गबन के आरोपी लेखपालों के विरुद्ध की गई कार्रवाई में हरचरन सिंह की शिकायत का भी जिक्र किया है। फौजी का कहना है कि मामला पूरी तरह नहीं खुला तो इसे उजागर कराने के लिए वह अनशन पर भी बैठेेंगे।

लेखपाल छुपाते रहे सूचनाएं
तहसीलदार मनोज कुमार ने बताया कि आरोपी लेखपालों ने मनमाने ढंग से चेक बनाकर सरकारी धन हड़पा है। कई बार चेकाें के भुगतान से संबंधित सूचना मांगी गई लेकिन लेखपालों ने जानकारी नहीं दी। तब उन्होंने बैंकों से जानकारी ली। चारों लेखपालों के विरुद्ध थाना जरिया में मामला दर्ज कराया गया है।

एसडीएम रामसुरेश वर्मा ने बताया कि लेखपालों को निलंबित कर उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की गई है। थानाध्यक्ष जरिया रामाश्रय यादव ने बताया कि तहसीलदार की तहरीर पर चाराें लेखपालों के विरुद्ध फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला दर्ज किया गया है।

लेखपालों ने गुर्गों के जरिए खिलाए गुल
सरीला। राहत राशि के वितरण में धांधली उजागर होने पर लेखपालों के खेल में शामिल रहे उनके गुर्गों की नींद हराम हो गई है। पुलिस भी इनको ढूंढकर मामले की जांच करने में जुटी है। बताया जा रहा है कि राहत राशि के वितरण के समय लेखपालों ने अपने गुर्गे पाल रखे थे। जो लोगों से फर्जी चेक बनाने के नाम पर उगाही करते थे।


जब इसकी शिकायत अफसरों से की गई तो लेखपालों ने शिकायतकर्ताओं से मिलकर उन्हें भी फर्जी चेक थमाकर उनकी बोलती बंद कर दी थी। राहत राशि के वितरण में लेखपालों ने तो चांदी काटी ही, उनके गुर्गों की इमारतें तक खड़ी हो गई हैं। धांधली उजागर होने पर लोग चर्चा कर रहे हैं कि अगर सही जांच हुई तो कई लोगों के नाम लपेटे में आएंगे। जो लेखपालों के इस खेल में शामिल रहे हैं।

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