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Hamirpur News: नदी-तालाबों में नौ माह में 23 मौत, फिर भी नहीं चेता प्रशासन
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फोटो21एचएएमपी 35- तालाब के किनारे लगा चेतावनी बोर्ड। संवाद
फोटो21एचएएमपी 35- तालाब के किनारे लगा चेतावनी बोर्ड। संवाद
= गहरे पानी में न जाने की चेतावनी बोर्ड लगाकर हो रही खानापूर्ति
= ग्रामीण भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर नहीं बरत रहे सतर्कता
संवाद न्यूज
हमीरपुर। जिले में नदी, तालाब और नालों में डूबने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। जनवरी से सितंबर तक करीब नौ माह में अलग-अलग घटनाओं में 23 लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है। इसके बावजूद जलस्रोतों के किनारे सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं।
प्रशासन की ओर से कई जगह गहरे पानी में न जाने की चेतावनी के बोर्ड लगाकर खानापूर्ति की जा रही है। वहीं ग्रामीण भी लगातार हो रही घटनाओं से सबक लेते नजर नहीं आ रहे हैं और छोटे बच्चों को नदी-तालाबों में नहाने के लिए अकेले जाने देते हैं। ग्रामीण अनुज दुबे और शिवनारायन का कहना है कि जलस्रोतों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था, बैरिकेडिंग और निगरानी की जरूरत है।
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केस-1
20 जनवरी को युवक की मौत
मौदहा के मराठीपुरा स्थित मीरा तालाब में 20 जनवरी को 20 वर्षीय तौसीब पुत्र तौकीर डूब गया था। लोगों ने उसे बाहर निकालकर सीएचसी पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
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केस-2
25 मई को तीन बच्चों की गई जान
खंडेह गांव में रामजानकी मंदिर के पीछे स्थित तालाब में 25 मई को गर्मी से बचने के लिए नहाने गए तीन बच्चे गहरे पानी में डूब गए। हादसे में 11 वर्षीय प्रबल यादव, आठ वर्षीय आदित्य और 10 वर्षीय भोला की मौत हो गई।
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केस-3
चार जून को एक साथ तीन बच्चों की मौत
बिवांर थाना क्षेत्र के छानी खुर्द/छानी गांव स्थित अमृत सरोवर में चार जून को मां पार्वती के साथ गए 10 वर्षीय शिवेंद्र, आठ वर्षीय रुद्रांक्ष और पांच वर्षीय मांडवी नहाते समय गहरे पानी में डूब गए। तीनों को बाहर निकालकर सीएचसी लाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। 13 सितम्बर को कम्हरिया बन्धे में दो युवकों को डूबने से ग्रामीणों ने बचाया था। इस घटना के बाद एक बार फिर नदी-तालाबों में सुरक्षा व्यवस्था और बच्चों की निगरानी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
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केस-4
चंद्रावल में बुजुर्ग की गई जान
परछा गांव में 9-10 जून को 70 वर्षीय रामऔतार यादव भैंस चराने गए थे। नदी किनारे उनके कपड़े और जूते मिले। करीब 30 घंटे की तलाश के बाद घटनास्थल से करीब दो किलोमीटर दूर उनका शव बरामद हुआ।
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केस-5
बेटे को बचाकर पिता खुद बह गए
12-13 सितंबर को उरदना गांव के पास श्यामनाला के रपटा में 12 वर्षीय मोहित का पैर फिसल गया और वह तेज बहाव में बहने लगा। बेटे को बचाने के लिए उसके 45 वर्षीय पिता रामकिशोर पानी में कूद गए। उन्होंने बेटे को तो बचा लिया, लेकिन खुद तेज बहाव में बह गए। करीब 20 घंटे बाद उनका शव बरामद हुआ।
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केस-6
20 सितंबर को फिर चंद्रावल में हादसा, दो बच्चे लापता
परछछ गांव में 20 सितंबर को नहाने गई महिला नीलम और पांच बच्चों में से चार गहरे पानी में चले गए। ग्रामीणों ने नीलम, खुशी और ताशी को बचा लिया, जबकि 10 वर्षीय अंश और 11 वर्षीय अंशिका उर्फ गिल्ली तेज बहाव में बह गए। दोनों बच्चों के शव बाद में बरामद किए गए।
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इनसेट
घटनाओं के बाद भी बच्चों पर नहीं रखी जा रही निगरानी
जलस्रोतों में लगातार डूबने की घटनाओं में बड़ी संख्या बच्चों की है। इसके बावजूद गर्मी और खाली समय में बच्चे अकेले तालाबों व नदियों तक पहुंच रहे हैं। अभिभावकों द्वारा भी उनकी निगरानी नहीं की जा रही है। ग्रामीण प्रभाव यादव और सौरभ मिश्रा का कहना है कि प्रशासन के साथ अभिभावकों को भी बच्चों की सुरक्षा के प्रति गंभीर होना होगा, तभी ऐसी घटनाओं पर अंकुश लग सकेगा।
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= गहरे पानी में न जाने की चेतावनी बोर्ड लगाकर हो रही खानापूर्ति
= ग्रामीण भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर नहीं बरत रहे सतर्कता
संवाद न्यूज
हमीरपुर। जिले में नदी, तालाब और नालों में डूबने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। जनवरी से सितंबर तक करीब नौ माह में अलग-अलग घटनाओं में 23 लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है। इसके बावजूद जलस्रोतों के किनारे सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं।
प्रशासन की ओर से कई जगह गहरे पानी में न जाने की चेतावनी के बोर्ड लगाकर खानापूर्ति की जा रही है। वहीं ग्रामीण भी लगातार हो रही घटनाओं से सबक लेते नजर नहीं आ रहे हैं और छोटे बच्चों को नदी-तालाबों में नहाने के लिए अकेले जाने देते हैं। ग्रामीण अनुज दुबे और शिवनारायन का कहना है कि जलस्रोतों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था, बैरिकेडिंग और निगरानी की जरूरत है।
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केस-1
20 जनवरी को युवक की मौत
मौदहा के मराठीपुरा स्थित मीरा तालाब में 20 जनवरी को 20 वर्षीय तौसीब पुत्र तौकीर डूब गया था। लोगों ने उसे बाहर निकालकर सीएचसी पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
केस-2
25 मई को तीन बच्चों की गई जान
खंडेह गांव में रामजानकी मंदिर के पीछे स्थित तालाब में 25 मई को गर्मी से बचने के लिए नहाने गए तीन बच्चे गहरे पानी में डूब गए। हादसे में 11 वर्षीय प्रबल यादव, आठ वर्षीय आदित्य और 10 वर्षीय भोला की मौत हो गई।
केस-3
चार जून को एक साथ तीन बच्चों की मौत
बिवांर थाना क्षेत्र के छानी खुर्द/छानी गांव स्थित अमृत सरोवर में चार जून को मां पार्वती के साथ गए 10 वर्षीय शिवेंद्र, आठ वर्षीय रुद्रांक्ष और पांच वर्षीय मांडवी नहाते समय गहरे पानी में डूब गए। तीनों को बाहर निकालकर सीएचसी लाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। 13 सितम्बर को कम्हरिया बन्धे में दो युवकों को डूबने से ग्रामीणों ने बचाया था। इस घटना के बाद एक बार फिर नदी-तालाबों में सुरक्षा व्यवस्था और बच्चों की निगरानी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
केस-4
चंद्रावल में बुजुर्ग की गई जान
परछा गांव में 9-10 जून को 70 वर्षीय रामऔतार यादव भैंस चराने गए थे। नदी किनारे उनके कपड़े और जूते मिले। करीब 30 घंटे की तलाश के बाद घटनास्थल से करीब दो किलोमीटर दूर उनका शव बरामद हुआ।
केस-5
बेटे को बचाकर पिता खुद बह गए
12-13 सितंबर को उरदना गांव के पास श्यामनाला के रपटा में 12 वर्षीय मोहित का पैर फिसल गया और वह तेज बहाव में बहने लगा। बेटे को बचाने के लिए उसके 45 वर्षीय पिता रामकिशोर पानी में कूद गए। उन्होंने बेटे को तो बचा लिया, लेकिन खुद तेज बहाव में बह गए। करीब 20 घंटे बाद उनका शव बरामद हुआ।
केस-6
20 सितंबर को फिर चंद्रावल में हादसा, दो बच्चे लापता
परछछ गांव में 20 सितंबर को नहाने गई महिला नीलम और पांच बच्चों में से चार गहरे पानी में चले गए। ग्रामीणों ने नीलम, खुशी और ताशी को बचा लिया, जबकि 10 वर्षीय अंश और 11 वर्षीय अंशिका उर्फ गिल्ली तेज बहाव में बह गए। दोनों बच्चों के शव बाद में बरामद किए गए।
इनसेट
घटनाओं के बाद भी बच्चों पर नहीं रखी जा रही निगरानी
जलस्रोतों में लगातार डूबने की घटनाओं में बड़ी संख्या बच्चों की है। इसके बावजूद गर्मी और खाली समय में बच्चे अकेले तालाबों व नदियों तक पहुंच रहे हैं। अभिभावकों द्वारा भी उनकी निगरानी नहीं की जा रही है। ग्रामीण प्रभाव यादव और सौरभ मिश्रा का कहना है कि प्रशासन के साथ अभिभावकों को भी बच्चों की सुरक्षा के प्रति गंभीर होना होगा, तभी ऐसी घटनाओं पर अंकुश लग सकेगा।