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सिगरेट का धुआं बना रहा कैंसर रोगी

Mon, 30 May 2016 08:26 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Mon, 30 May 2016 08:26 PM IST
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world anti tobbaco day today
कैंसर - फोटो : amar ujala/file photo
तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए दुनिया भर में 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है। आंकड़ों के मुताबिक दुनिया में हर साल 6 मिलियन लोग तंबाकू व इससे जुड़े उत्पादों का सेवन कर मौत को गले लगाते हैं। वहीं ऐसे रोगियों की संख्या भी कम नहीं है जो खुद तो स्मोकिंग नहीं (पैसिव स्मोकिंग) करते हैं मगर ऐसे वातावरण में रहते हैं जहां स्मोकिंग करने वालों की संख्या ज्यादा है। 85 प्रतिशत लोग ऐसे ही कैंसर से पीड़ित हो रहे हैं।
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तंबाकू में लगभग 3 हजार रसायन होते हैं जिसमें से 108 रसायन कैंसर का कारण बनते हैं। तंबाकू व इससे जुड़े उत्पादों के सेवन से मुख, गला, स्वर यंत्र, भोजन नली, श्वांस नली, फेफड़े, आमाशय, पैंक्रियाज व मूत्राशय का कैंसर होने का खतरा होता है। इस कारण होने वाली मौतों का आंकड़ा वर्ष 2025 तक बढ़कर 10 मिलियन होने की आशंका है।
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तेजी से बढे़ं हैं रोगी
मेडिकल कॉलेज के ओपीडी में हर महीने लगभग 10 से 15 मरीज लंग कैंसर एवं 200 मरीज सीओपीडी के आते हैं। इसका मुख्य कारण धूम्रपान होता है। भारत में प्रति वर्ष लगभग 10.15 लाख लोग तंबाकू सेवन से मरते हैं। देश में लगभग 40 प्रतिशत लोग बीड़ी, 20 प्रतिशत सिगरेट एवं अन्य 40 प्रतिशत गुटखा, पान मसाला एवं गुल मंजन से प्रभावित हो रहे हैं। धूम्रपान से लगभग 400 प्रकार की बीमारियां एवं 40 प्रकार के कैंसर होते हैं। आज का युवा व्यवसायिक कारण एवं सामाजिक बदलाव से धूम्रपान की ओर आकर्षित होता जा रहा है।
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- डॉ. अश्वनी कुमार मिश्रा, विभागाध्यक्ष, टीबी एंड चेस्ट, मेडिकल कॉलेज

तंबाकू बड़ा कारण
कैंसर होने का सबसे प्रमुख कारण तंबाकू है। खासकर पूर्वांचल में खैनी के इस्तेमाल से मुंह कैंसर के रोगी तेजी से बढ़ रहे हैं। इसका प्रमुख लक्षण मुंह में छाले का ठीक न होना, जलन, आवाज बदल जाना, जीभ का बाहर न आना आदि है। ऐसे लक्षण कैंसर के हो सकते हैं। जिस तरह से लोगों का झुकाव धूम्रपान की ओर बढ़ रहा है। वह बहुत बड़ा खतरा है। दृढ़ा इच्छाशक्ति के जरिए तंबाकू, स्मोकिंग को छोड़ा जा सकता है। जिंदगी को चुनने के लिए तंबाकू को छोड़ना ही होगा, इस सोच के साथ लोग आगे बढ़े, तो रोगियों की संख्या कम की जा सकती है।
- डॉ. तैयर अहमद, वरिष्ठ दंत चिकित्सक
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