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शिमला से भी सर्द गोरखपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Thu, 04 Jan 2018 01:21 AM IST
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ठंड से कांपे लोग।
- फोटो : Amar Ujala
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हिमालय की तलहटी से आने वाली उत्तर-पश्चिम की बर्फीली हवाओं ने बुधवार को गोरखपुर को शिमला और कुल्लू से भी सर्द कर दिया। भारतीय मौसम विभाग ने जो आंकड़ा जारी किया है, उसके मुताबिक बुधवार को शिमला का अधिकतम पारा 13.3 और कुल्लू का 19 डिग्री सेल्सियस रहा, वहीं गोरखपुर का अधिकतम तापमान 12.8 डिग्री रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से आठ डिग्री सेल्सियस कम है। अधिकतम तापमान के लिहाज से देखें तो यूपी के बड़े शहरों की अपेक्षा गोरखपुर में सबसे ज्यादा ठंड महसूस की गई। सर्दी के मामले में दिल्ली भी गोरखपुर से पीछे रही।
गोरखपुर में बुधवार की सर्दी ने पिछले छह सालों का रिकार्ड तोड़ दिया। इससे पहले अधिकतम तापमान के लिहाज से नौ जनवरी 2011 सबसे सबसे सर्द दिन (9.8 डिग्री) रिकॉर्ड किया गया था। वातावरण में नमी शत प्रतिशत और दोपहर में 89 प्रतिशत रिकार्ड की गई। वायुमंडल के ऊपरी सतह पर धुआं और धुंध छाने की वजह से दिन भर धूप के दर्शन नहीं हो सके। पांच किलो मीटर प्रति घंटा की रफ्तार से बर्फीली हवाएं चलीं। इस कारण सिहरन बढ़ी और लोग दिन भर कांपते रहे। ज्यादातर शहरी घरों में दुबके रहे। बच्चे रजाई से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं कर सके। जो घर से बाहर निकले, वह गर्म कपड़ों से कसे, हाथ में दस्ताना और सिर पर टोपी लगाए मिले। सर्दी का असर सरकारी, गैर सरकारी दफ्तरों में भी देखने को मिला। तमाम कर्मचारी दफ्तर देर से पहुंचे। हीटर, ब्लोअर लगाकर सर्दी से निजात पाने की कोशिश की गई लेकिन फिर भी कामकाज निपटाने में दिक्कत हुई।
एक दिन में 3.5 डिग्री नीचे गिरा पारा
एक दिन में ही अधिकतम पारा 3.5 डिग्री सेल्सियस नीचे आ गया। मंगलवार को को अधिकतम तापमान 16.3 डिग्री था, जो बुधवार को 12.8 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। मौसम विज्ञानियों की मानें तो गोरखपुर की सर्दी ने तमाम रिकार्ड तोड़ दिए हैं। बुधवार को जो अधिकतम तापमान रिकार्ड हुआ, वह सामान्य से करीब 8 डिग्री सेल्सियस कम है। इस सीजन में सामान्य पारा 20.8 डिग्री सेल्सियस होता है।
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अधिकतम-न्यूनतम पारे का अंतर और कम हुआ
गलन भरी सर्दी की बड़ी वजह अधिकतम और न्यूनतम पारा के बीच का अंतर कम होना है। बुधवार को न्यूनतम पारा जहां 7.4 डिग्री रिकार्ड हुआ, वहीं अधिकतम पारा 12.8 डिग्री रहा। अब पारा के बीच महज 5.4 डिग्री सेल्सियस का अंतर रह गया है। न्यूनतम पारा भी सामान्य से दो डिग्री नीचे आ गया। इन दिनों में सामान्य न्यूनतम तापमान 9.4 डिग्री सेल्सियस होता है।
फसलों को पाला, रोग का खतरा
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार इस मौसम में अरहर, चना और मसूर की फसलों को पाला मारने का खतरा है। फसलों की हल्की सिंचाई करके पाला का असर कम कर सकते हैं। प्रति लीटर पानी में 20 ग्राम पोटाश मिलाकर फसलों पर छिड़काव किया जा सकता है। आलू में अगैती और पिछैती झुलसा रोग लगने का खतरा है। इसका सही उपचार नहीं हुआ तो पैदावार प्रभावित होगी।
सरसों की फसल पर कीट का हमला
तापमान गिरने की वजह से सरसों की फसलों पर अल्टरनेरिया ब्लाइट कीट ने हमला बोल दिया है। यह कीट सरसों के फूल और पत्तों को नष्ट कर देता है। कीटनाशक का छिड़काव करके फसलों को बचाया जा सकता है।
तालाबों में ऑक्सीजन की मात्रा कम
विज्ञानियों के अनुसार 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे पारा जाने पर तालाबों में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। ऐसे में मछलियों के मरने का खतरा रहता है। तालाब का पानी बदलकर ऑक्सीजन की मात्रा सही रखी जा सकती है। भीषण सर्दी में मछलियां भोजन भी कम कर देती हैं। वह तालाब के निचले हिस्से में चली जाती हैं। ऐसे में तालाब में मछलियों का चारा कम डाला जाए, क्योंकि पानी में मिलकर चारा सड़ जाता है। जो यह मछलियों के लिए नुकसानदायक है।
हिमालय की तलहटी से आने वाली गलनभरी हवाओं की गति तेज थी। इस वजह से पारा गिरा और गलन बढ़ गई। यह सिलसिला अगले कुछ दिनों तक जारी रहेगा। वातावरण में नमी की मात्रा ज्यादा रहेगी और पृथ्वी की ऊपरी सतह पर धुंध भी बरकरार रहेगी। घने कोहरे की संभावना बनी हुई है।
: प्रो. अनिरुद्ध दुबे, वरिष्ठ मौसम विज्ञानी
आने वाले दिनों के शहर के तापमान का पूर्वानुमान
दिनांक अधिकतम न्यूनतम पारा (डिग्री सेल्सियस)
4 जनवरी 14 6.9
5 जनवरी 16 7
6 जनवरी 16.9 6.9
7 जनवरी 17 6
8 जनवरी 17 6
9 जनवरी 16 6
स्रोत- भारतीय मौसम विभाग
यूपी के बड़े शहरों का अधिकतम पारा (डिग्री सेल्सियस)
वाराणसी 15.4
लखनऊ 15.5
कानपुर 15.6
आगरा 15.9
इलाहाबाद 20.3
गोरखपुर 12.8
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गोरखपुर में बुधवार की सर्दी ने पिछले छह सालों का रिकार्ड तोड़ दिया। इससे पहले अधिकतम तापमान के लिहाज से नौ जनवरी 2011 सबसे सबसे सर्द दिन (9.8 डिग्री) रिकॉर्ड किया गया था। वातावरण में नमी शत प्रतिशत और दोपहर में 89 प्रतिशत रिकार्ड की गई। वायुमंडल के ऊपरी सतह पर धुआं और धुंध छाने की वजह से दिन भर धूप के दर्शन नहीं हो सके। पांच किलो मीटर प्रति घंटा की रफ्तार से बर्फीली हवाएं चलीं। इस कारण सिहरन बढ़ी और लोग दिन भर कांपते रहे। ज्यादातर शहरी घरों में दुबके रहे। बच्चे रजाई से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं कर सके। जो घर से बाहर निकले, वह गर्म कपड़ों से कसे, हाथ में दस्ताना और सिर पर टोपी लगाए मिले। सर्दी का असर सरकारी, गैर सरकारी दफ्तरों में भी देखने को मिला। तमाम कर्मचारी दफ्तर देर से पहुंचे। हीटर, ब्लोअर लगाकर सर्दी से निजात पाने की कोशिश की गई लेकिन फिर भी कामकाज निपटाने में दिक्कत हुई।
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एक दिन में 3.5 डिग्री नीचे गिरा पारा
एक दिन में ही अधिकतम पारा 3.5 डिग्री सेल्सियस नीचे आ गया। मंगलवार को को अधिकतम तापमान 16.3 डिग्री था, जो बुधवार को 12.8 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। मौसम विज्ञानियों की मानें तो गोरखपुर की सर्दी ने तमाम रिकार्ड तोड़ दिए हैं। बुधवार को जो अधिकतम तापमान रिकार्ड हुआ, वह सामान्य से करीब 8 डिग्री सेल्सियस कम है। इस सीजन में सामान्य पारा 20.8 डिग्री सेल्सियस होता है।
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अधिकतम-न्यूनतम पारे का अंतर और कम हुआ
गलन भरी सर्दी की बड़ी वजह अधिकतम और न्यूनतम पारा के बीच का अंतर कम होना है। बुधवार को न्यूनतम पारा जहां 7.4 डिग्री रिकार्ड हुआ, वहीं अधिकतम पारा 12.8 डिग्री रहा। अब पारा के बीच महज 5.4 डिग्री सेल्सियस का अंतर रह गया है। न्यूनतम पारा भी सामान्य से दो डिग्री नीचे आ गया। इन दिनों में सामान्य न्यूनतम तापमान 9.4 डिग्री सेल्सियस होता है।
फसलों को पाला, रोग का खतरा
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार इस मौसम में अरहर, चना और मसूर की फसलों को पाला मारने का खतरा है। फसलों की हल्की सिंचाई करके पाला का असर कम कर सकते हैं। प्रति लीटर पानी में 20 ग्राम पोटाश मिलाकर फसलों पर छिड़काव किया जा सकता है। आलू में अगैती और पिछैती झुलसा रोग लगने का खतरा है। इसका सही उपचार नहीं हुआ तो पैदावार प्रभावित होगी।
सरसों की फसल पर कीट का हमला
तापमान गिरने की वजह से सरसों की फसलों पर अल्टरनेरिया ब्लाइट कीट ने हमला बोल दिया है। यह कीट सरसों के फूल और पत्तों को नष्ट कर देता है। कीटनाशक का छिड़काव करके फसलों को बचाया जा सकता है।
तालाबों में ऑक्सीजन की मात्रा कम
विज्ञानियों के अनुसार 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे पारा जाने पर तालाबों में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। ऐसे में मछलियों के मरने का खतरा रहता है। तालाब का पानी बदलकर ऑक्सीजन की मात्रा सही रखी जा सकती है। भीषण सर्दी में मछलियां भोजन भी कम कर देती हैं। वह तालाब के निचले हिस्से में चली जाती हैं। ऐसे में तालाब में मछलियों का चारा कम डाला जाए, क्योंकि पानी में मिलकर चारा सड़ जाता है। जो यह मछलियों के लिए नुकसानदायक है।
हिमालय की तलहटी से आने वाली गलनभरी हवाओं की गति तेज थी। इस वजह से पारा गिरा और गलन बढ़ गई। यह सिलसिला अगले कुछ दिनों तक जारी रहेगा। वातावरण में नमी की मात्रा ज्यादा रहेगी और पृथ्वी की ऊपरी सतह पर धुंध भी बरकरार रहेगी। घने कोहरे की संभावना बनी हुई है।
: प्रो. अनिरुद्ध दुबे, वरिष्ठ मौसम विज्ञानी
आने वाले दिनों के शहर के तापमान का पूर्वानुमान
दिनांक अधिकतम न्यूनतम पारा (डिग्री सेल्सियस)
4 जनवरी 14 6.9
5 जनवरी 16 7
6 जनवरी 16.9 6.9
7 जनवरी 17 6
8 जनवरी 17 6
9 जनवरी 16 6
स्रोत- भारतीय मौसम विभाग
यूपी के बड़े शहरों का अधिकतम पारा (डिग्री सेल्सियस)
वाराणसी 15.4
लखनऊ 15.5
कानपुर 15.6
आगरा 15.9
इलाहाबाद 20.3
गोरखपुर 12.8