ऑडियो वायरल: क्या वाटर पार्क के साझेदार रोहित को जीडीए की शह पर वाकई पुलिस उठा ले गई थी ?
दीपक अग्रवाल कहते हैं, रोहित के साथ जीडीए वालों ने ज्यादती की है, रोहित तो मुझे ऐसा ही बता रहे थे। सच क्या है, इन दिनों वाटर पार्क संचालकों और जीडीए अधिकारियों के बीच चल रही शह-मात की लड़ाई में इसका जवाब गुम हो गया है। लेकिन, यह तय है कि इस पूरे प्रकरण में खेल चल रहा है, जबरदस्त खेल। आखिर कौन खेल रहा है, यह खेल रोहित अग्रवाल या दीपक अग्रवाल ?
वायरल ऑडियो में करीब पांच मिनट के संवाद का लब्बोलुआब यह है कि जीडीए उपाध्यक्ष पुलिस के एक आला अधिकारी के साथ रोहित के घर पर गए थे और उन्हें डरा धमकाकर जबरन रजिस्ट्री दफ्तर उठा ले गए और फिर पार्क का रजिस्टर्ड अनुबंध खत्म करा दिया। रोहित आरोप लगा रहे कि मना करने पर पुलिस के आला अधिकारी ने उन्हें कई झूठी धाराओं में फंसाने की धमकी दी थी और उनक ा मोबाइल भी छीन लिया। पूरे संवाद में रोहित बोल कम और रो ज्यादा रहे हैं, जबकि दीपक अग्रवाल उन्हें कोर्ट के जरिए मुकदमा दर्ज कराने के साथ ही मुख्यमंत्री से शिकायत की सलाह दे रहें हैं। दोनों के बीच हुए संवाद को पढ़िए, समझने की कोशिश कीजिए आखिर क्या चल रहा है? वार्तालाप amarujala.com पर सुन सकते हैं।
ऑडियो क्लिप-(दीपक अग्रवाल- रोहित अग्रवाल के संवाद)
दीपक: हां भइया
रोहित: हां बोलिए। हम तो, एकदम मेरी तो गच्च हो गई है... एकदम मतलब
दीपक: नहीं तो ऐसा कैसे कि वीसी(जीडीए उपाध्यक्ष) खुद कैसे पुलिस लाकर जबरदस्ती करा लेगा भाई
रोहित: अरे वीसी आ गया भाई, कल उसके वहां से फोन आया था मेरे वहां। हम गए नहीं कि ऐसे ही बुलाया होगा
दीपक: अच्छा
रोहित: तो आज खुद टपक गया
दीपक: फिर क्या किया
रोहित: पौने दस बजे
दीपक: फिर
रोहित: पुलिस को लेकर आया था। पुलिस का कोई बड़ा अधिकारी था
दीपक: अच्छा
रोहित: कहा कि भइया चलकर तुरंत करो नहीं तो जो है इतनी धाराएं लगा देंगे कि रहोगे जेल में ही
दीपक: अरे, फिर क्या किया, कराया क्या ?
रोहित: कितना क्या, जो भी कागज तैयार कराया सबका बैकअप कराए, सब फोटो खिंचवाए, सब वे जो भी रजिस्ट्री ऑफिस का अधिकारी होता है, उसके दफ्तर में बैठकर सब काम कराए। मेरा फोन सा... छीन लिए। फोन जो है, रखे रहे सब। अभी घर छोड़कर गए हैं तो मेरा फोन दिए। मैं एकदम परेशान हो गया हूं।
दीपक: रोहित भइया आप डर क्यों रहे हैं। भारत में कानून है। एफआईआर कीजिए, इस तरह से वीसी ने किया है तो
रोहित: अरे! क्या हम एफआईआर करवाएं
दीपक: अरे! हम लोग तो साथ में हैं न । काहें चिंता कर रहे हैं। वीसी इस तरह किए हैं तो एफआईआर कीजिए। भाई कोई घर से उठाकर पुलिस अधिकारी के साथ ले आकर जबरदस्ती रजिस्ट्री ऑफिस में करा लेगा। आपका मोबाइल छीन लिया, आपको टार्चर किए तो एफआईआर कीजिए
रोहित: अरे! इ सब बहुत पुलिस की कहानी है, पुलिस में मेरी कोई सुनेगा?
दीपक: अरे ऐसा नही है रोहित भईया, जंगलराज है? आप बोलिए तो हम प्रेस वालों को बुलाते हैं। एफआईआर कराते हैं। आप काहें रो रहे हैं भाई ?
रोहित: नहीं भाई! हमको अब इस लफड़े में नहीं पड़ना है। हमकों आप माफ कर दीजिए
दीपक: क्या-क्या लिखवाए हैं सब भइया?
रोहित: हम केवल दस्तखत किए हैं
दीपक: अच्छा भइया, घर से जबरदस्ती उठा लाए सब? भाभी कुछ नहीं बोलीं ?
रोहित: भाभी का बोलेंगी, भाभी स्कूल चली जाती हैं... लड़का अपना पढ़ने चला जाता है
दीपक: अच्छा, आप अकेले थे घर पर क्या? बोलिए तो... कहिए हम बात करें, महराज जी से बात करें। एफआईआर लिखवाएं ?
रोहित: भइया, अब हम नहीं चाहते हैं महराज जी से... हम इस चीज से अब एकदम वो हो गए हैं। आप लोगों को जितना लड़ना है, आपस में लड़िए... हमकों भइया, हम 10-12 साल ही रहे थे, उसमें इन सब चीजों से पता नहीं क्या हुआ कि हम गए
दीपक: अरे! रोहित भइया रोइए नहीं, इस तरह अत्याचार कोई अधिकारी कर रहा है। रजिस्ट्री ऑफिस में तो आप उसके खिलाफ लड़ेंगे न भइया? कानून तो हैं न भारत में ?
रोहित: नहीं, नहीं हमकों नहीं लड़ना है। शासन-प्रशासन से हम कहां लड़ पाएंगे।
दीपक: आप कहां मिलेंगे हमसे?
रोहित: अब हम आज नहीं निकलेंगे नहीं
दीपक: चहिए, कल...कल मिलिए। आप रोइये नहीं... रोइये नहीं भइया। रोइये नहीं, बताइये इस तरह से घर से उठाकर लिखवा लेगा रजिस्ट्री ऑफिस में। हम तो यही राय देंगे कि रोहित भइया डरने की जरूरत नहीं है। महराज जी से बात हो, एफआईआर हो। कोर्ट में केस किया जाए
रोहित: पूरा जो है कॉलोनी में तमाशा हो गया
दीपक: मारे-पीटे भी हैं क्या?
रोहित: नहीं मारे-वारे नही हैं
दीपक: ओफ्फ...ओफ्फ... ई तो बड़ा सब एकदम गुंडाराज हो गया है यूपी में इ तो। आप रोइये नहीं रोहित भइया, रोइये नहीं प्लीज भइया। कल मिलिए भइया, हम तो यही कहेंगे भइया एक अप्लीकेशन डालिए कोर्ट में। अभी डिस्ट्रिक्ट जज साहब के वहां डाला जाए। सब उनको बताइये । जो भी लिखा-पढ़ी जबरदस्ती कराए हैं, सब खत्म हो जाएगा। जैसा आप कहिए?
रोहित: देखिए अब हम एकदम परेशान हो गए हैं।
दीपक: नहीं, नहीं रोहित भइया, घर से जबरदस्ती उठाकर ले जाना अधिकारी का पुलिस के साथ और रजिस्ट्री ऑफिस में लिखवाना तो पूरी तरह गैर कानूनी है। अपराध है इ तो। हम तो आपको यही राय देंगे कि इसके खिलाफ अप्लीकेशन डालिए
रोहित: अकेले आदमी हैं हम
दीपक: चलिए हम लोग हैं न चलिए आइये एसएसपी साहब से मिला जाए। महराज जी कल आ रहे हैं। उनसे मिला जाए।
रोहित: अभी देखिए... अभी तो पूरा शरीर कांप रहा है।
दीपक: अच्छा आप आराम करिए। हम मिलते हैं कल आपसे। कल मिलिए हमसे... ठीक न
रोहित: हम्म...
दीपक: ठीक...ठीक, ठीक
यह है वाटर पार्क का मामला
रामगढ़ताल के पास 12 एकड़ में फैले चंपा देवी पार्क में वाटर पार्क नीर निकुंज को लेकर जीडीए और मेसर्स केआर एम्यूजमेंट एंड रिसोर्टस के बीच 28 अक्तूबर 2005 को करार हुआ था। इस करार से संबंधित पूरक करार 19 अक्तूबर 2007 को हुआ था। चंपा देवी पार्क को लेकर अनुबंध की शर्तों का साझेदारों ने उल्लंघन किया जिसपर जीडीए उपाध्यक्ष ए. दिनेश कुमार ने आठ नवंबर को करार निरस्त कर दिया। आदेश के मुताबिक पार्क प्राधिकरण की संपत्ति है। इसका संचालन करने वालों का अस्तित्व सिर्फ कस्टोडियन के रूप में है। करार का मकसद पार्क का समुचित रखरखाव, वाटर पार्क एवं इन्वायरमेंटल पार्क को विकसित करना था। मगर अनुबंध की शर्तें तोड़कर वहां पांच विवाह घर संचालित किए जा रहे थे। अनुबंध में पार्क का एक एकड़ हिस्सा सार्वजनिक लोगों के लिए छोड़ने को कहा गया था। वहां पाथ-वे बनाना था। मगर उस हिस्से पर भी बाउंड्रीवाल करा लिया गया। सभी गेटों पर सिक्योरिटी गार्ड बैठा दिए गए जिससे आम आदमी पार्क के भीतर पहुंच ही नहीं पाता था।विवाह घर बने करार निरस्त होने की मूल वजह
शहर के 14 साल पुराने वाटर पार्क के बंद होने और साझेदारों का अनुबंध निरस्त होने की मूल वजह वहां खोले गए पांच विवाह घर बने। प्राधिकरण ने नीर निकुंज वाटर पार्क में अवैध तरीके से विवाह घर संचालित करने के आरोप में उसे सील कर दिया था। साझेदारों की अपील पर कमिश्नर ने तीन शादियां संपन्न होने तक के लिए सील खोलने और फिर उसे सील करने का जीडीए को निर्देश दिया था। संबंधित शादियां संपन्न होने के बाद जीडीए ने विवाह घर सील कर दिया मगर साझेदार फिर सील तोड़ वहां वैवाहिक व अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने लगे। इसपर प्राधिकरण ने मार्च 2019 में उनपर मुकदमा दर्ज करा दिया था। वहीं सीलबंदी की कार्रवाई के खिलाफ साझेदारों ने कमिश्नर कोर्ट में अपील दाखिल की थी मगर वह खारिज हो गई। इस आदेश के खिलाफ वाटर पार्क के साझेदार हाई कोर्ट भी गए थे लेकिन उन्हेें वहां से भी राहत नहीं मिली।पार्क खाली कराने के लिए जीडीए ने मांगा है पुलिस बल
जीडीए उपाध्यक्ष ने डीएम के. विजयेंद्र पांडियन को पत्र लिखकर मजिस्ट्रेट नामित करने का अनुरोध किया है ,ताकि चंपा देवी पार्क में वाटर पार्क, विवाह घर समेत जितने भी निर्माण या सामग्री है उसकी सूची तैयार की जा सके। इसी तरह उपाध्यक्ष ने एसएसपी डॉ सुनील गुप्ता को पत्र लिखकर पार्क खाली कराने और वहां कब्जा प्राप्त करने के लिए पर्याप्त पुलिस बल की मांग की है।मुझे इस मामले में कुछ नहीं बोलना। मुझे कुछ पता नहीं - रोहित अग्रवाल, साझेदार, वाटर पार्क
रोहित अग्रवाल जी ने मुझे बताया कि उन्हें धमकी देकर जीडीए उपाध्यक्ष जबरदस्ती घर से उठा ले गए और रजिस्ट्री दफ्तर में वाटर पार्क का रजिस्टर्ड अनुबंध निरस्त करा दिया। मैनें इस नाइंसाफी के खिलाफ उन्हें मुकदमा दर्ज कराने की राय दी थी। अब तो वे फोन भी नहीं उठा रहे।
- दीपक अग्रवाल, साझेदार, वाटर पार्क