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नालियों की गंदगी से मिलेगी राहत?: एआई करेगा प्लास्टिक की पहचान, रोबोटिक आर्म एक घंटे में उठाएगा 900 टुकड़े
Fri, 18 Sep 2026 03:36 PM IST
Rahul Kumar Tiwari
पुरुषोत्तम राय, गोरखपुर
पुरुषोत्तम राय, गोरखपुर
Published by: Rahul Kumar Tiwari
Updated Fri, 18 Sep 2026 03:36 PM IST
सार
नालियों में बहते प्लास्टिक कचरे को अब एआई पहचानकर रोबोटिक आर्म से बाहर निकलवाएगा। गोरखपुर और दिल्ली के शोधकर्ताओं ने यह तकनीक विकसित की है, जिसने परीक्षण में 97.4 प्रतिशत सटीकता हासिल की। जानिए, कैसे काम करेगा यह सिस्टम और क्या हैं इसकी खूबियां।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : AI
विस्तार
नालियों के पानी में बहते प्लास्टिक कचरे की पहचान अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) करेगी और उसे निकालने का काम रोबोटिक आर्म करेगा। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) और दिल्ली टेक्निकल विश्वविद्यालय के चार शोधकर्ताओं ने ऐसा एआई आधारित सिस्टम विकसित किया है। परीक्षण में सिस्टम ने प्लास्टिक कचरे की पहचान में 97.4 प्रतिशत सटीकता हासिल की है। इसे भारत सरकार की ओर से पेटेंट भी दिया गया है।
जेटसन एज डिवाइस और वास्तविक नाली के पानी में भी इसकी पहचान क्षमता का परीक्षण सफल रहा। सिस्टम विकसित करने वाली टीम में डॉ. अभिषेक वर्मा, दिनेश कुमार विश्वकर्मा, सुमित कुमार और प्रतीक सैनी शामिल हैं। डॉ. अभिषेक वर्मा कंप्यूटर साइंस विभाग में सहायक आचार्य हैं। अन्य तीनों शोधकर्ता दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी में कार्यरत हैं।
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जेटसन एज डिवाइस और वास्तविक नाली के पानी में भी इसकी पहचान क्षमता का परीक्षण सफल रहा। सिस्टम विकसित करने वाली टीम में डॉ. अभिषेक वर्मा, दिनेश कुमार विश्वकर्मा, सुमित कुमार और प्रतीक सैनी शामिल हैं। डॉ. अभिषेक वर्मा कंप्यूटर साइंस विभाग में सहायक आचार्य हैं। अन्य तीनों शोधकर्ता दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी में कार्यरत हैं।
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डॉ. अभिषेक के मुताबिक, इस तकनीक को 20 साल के लिए पेटेंट मिला है। अनुदान मिलने के बाद इसका पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की योजना है। ट्रांसफॉर्मर और सीएनएन आधारित कंप्यूटर विजन मॉडल, कैमरा और रोबोटिक आर्म को एकीकृत कर यह सिस्टम तैयार किया गया है। इसका इस्तेमाल नगर निगम की नालियों में पानी की सतह पर बहते प्लास्टिक कचरे को चुनकर बाहर निकालने में किया जा सकेगा। सिस्टम कचरे की तस्वीर या वीडियो लेकर पहले प्लास्टिक की पहचान करेगा।
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4,000 से अधिक वास्तविक तस्वीरों से प्रशिक्षित
सिस्टम को 1,000 से अधिक शहरी और ग्रामीण स्थानों से जुटाई गई 4,000 से अधिक वास्तविक प्लास्टिक की तस्वीरों से प्रशिक्षित किया गया है। विशेषज्ञों ने तस्वीरों का सत्यापन किया। एआई प्लास्टिक की बनावट, चमक, आकार और ज्यामिति के आधार पर उसे पत्ते और लकड़ी जैसे जैविक कचरे से अलग करता है। कम रोशनी में काम करने के लिए आईआर या नाइट विजन कैमरे का इस्तेमाल किया जा सकता है।
सिस्टम को 1,000 से अधिक शहरी और ग्रामीण स्थानों से जुटाई गई 4,000 से अधिक वास्तविक प्लास्टिक की तस्वीरों से प्रशिक्षित किया गया है। विशेषज्ञों ने तस्वीरों का सत्यापन किया। एआई प्लास्टिक की बनावट, चमक, आकार और ज्यामिति के आधार पर उसे पत्ते और लकड़ी जैसे जैविक कचरे से अलग करता है। कम रोशनी में काम करने के लिए आईआर या नाइट विजन कैमरे का इस्तेमाल किया जा सकता है।
एक घंटे में 600 से 900 टुकड़े उठाने की क्षमता
डॉ. अभिषेक के मुताबिक, सिस्टम एक घंटे में करीब 600 से 900 प्लास्टिक के टुकड़े उठा सकता है। वास्तविक क्षमता नाली के आकार और रोबोटिक आर्म पर निर्भर करेगी। सामान्य स्थिति में एक बार में 500 ग्राम से दो किलोग्राम तक भार उठाया जा सकेगा। मॉड्यूलर फ्रेम के जरिये इसे नालियों पर लगाया जा सकता है। सोलर पैनल से बैटरी चार्ज होगी। आईओटी डैशबोर्ड बिन भरने या सिस्टम में खराबी आने पर अलर्ट देगा।
डॉ. अभिषेक के मुताबिक, सिस्टम एक घंटे में करीब 600 से 900 प्लास्टिक के टुकड़े उठा सकता है। वास्तविक क्षमता नाली के आकार और रोबोटिक आर्म पर निर्भर करेगी। सामान्य स्थिति में एक बार में 500 ग्राम से दो किलोग्राम तक भार उठाया जा सकेगा। मॉड्यूलर फ्रेम के जरिये इसे नालियों पर लगाया जा सकता है। सोलर पैनल से बैटरी चार्ज होगी। आईओटी डैशबोर्ड बिन भरने या सिस्टम में खराबी आने पर अलर्ट देगा।
ऐसे काम करेगा एआई सिस्टम
डॉ. अभिषेक ने बताया कि सिस्टम का सिद्धांत 'पहचानो और उठाओ' है। कैमरा नाली के पानी की तस्वीर या वीडियो लेगा। गहन शिक्षण मॉडल उसमें मौजूद प्लास्टिक कचरे की पहचान करेगा। वस्तु की स्थिति और पानी में उसकी गहराई के आधार पर रोबोटिक आर्म के लिए स्थान तय होगा। इसके बाद आर्म ग्रिपर की मदद से प्लास्टिक को पकड़कर बिन में डाल देगा।
डॉ. अभिषेक ने बताया कि सिस्टम का सिद्धांत 'पहचानो और उठाओ' है। कैमरा नाली के पानी की तस्वीर या वीडियो लेगा। गहन शिक्षण मॉडल उसमें मौजूद प्लास्टिक कचरे की पहचान करेगा। वस्तु की स्थिति और पानी में उसकी गहराई के आधार पर रोबोटिक आर्म के लिए स्थान तय होगा। इसके बाद आर्म ग्रिपर की मदद से प्लास्टिक को पकड़कर बिन में डाल देगा।