फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   vinod vann

विनोद वन ः अजगर को खुराकी, तोते, हिरण भी बदहाल

Mon, 15 Jul 2019 02:21 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 15 Jul 2019 02:21 AM IST
विज्ञापन
vinod vann
विनोद वन : मांसाहारी अजगर को खिला रहे चना
विज्ञापन

विश्व प्रकाश शुक्ला
कुसम्ही। अजगर का जिक्र्र होते ही जेहन में एक ऐसे भयानक सांप की कल्पना आती है, जो मौका पाए तो जिंदा किसी भी जीव-जंतु का निगल ले। मगर पिंजड़े में बंद अजगर की बेबसी देखनी हो तो विनोद वन जाइए। विनोद वन में मांसाहारी अजगर के पिंजड़े में चने डाले जा रहे हैं। यह देखकर वन्य जीव प्रेमी हैरान हो गए। सवाल उठता है कि सप्ताह में चार किलो ग्राम मांस (मुर्गा, मछली या चूहा) खाने वाला एक अजगर आखिर चना क्यों खाएगा? सवाल किसी कर्मचारी से पूछें तो जवाब भी तपाक से मिलता है। वे कहते हैं बजट ही नहीं है। दस दिन में एक दिन मांस देते हैं, बाकी दिन सभी जानवरों की तरह इसे भी चना डाल देते हैं। ऐसा खुद के मन को संतोष देने के लिए करते हैं। बेहाल सिर्फ अजगर ही नहीं है, तोता और हिरण भी हैं।
शहर से सटे जंगल में बनाया गया विनोद वन कभी शहरियों की पहली पसंद होता था। मगर अब बदहाली ने सबकुछ बदल दिया है। आलम यह है कि वन के बीच में तीन अजगर, मोर और तोते रखे गए हैं। मगर इनकी खुराकी के लिए बजट ही नहीं आया है। अब वन अफसर जैसे-तैसे चने का इंतजाम कर मोर, तोते को पाल तो दे रहे है लेकिन अजगर की बदहाली दूर करने की व्यवस्था नहीं है। अजगर जिंदा रहें इस वजह से सप्ताह में एक दिन ही तीन अजगरों के बीच एक मुर्गा उनके पिंजड़े में डाला जाता है। इससे अजगर जिंदा तो हैं लेकिन कुपोषण के शिकार हो गए हैं। हिरणों का भी यही हाल है। घूमने आने वाले लोगों के पास हिरण जाते हैं। पर्यटक भी जाली के बाहर से उनकी ओर खाने का सामान फेंक देते हैं।
विज्ञापन

तोते भी जैसे-तैसे जिंदा
तोतों को पिंजड़ों में कैद किया गया लेकिन उनके बैठने का इंतजाम नहीं है। सिर्फ एक रस्सी बांधी गई है, जिस पर वह आराम से बैठ भी नहीं सकते हैं। इस वजह से पिंजड़ों की जालियों को पकड़कर लटके रहते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

पार्क भी बदहाल
पार्क में जानवरों की दशा ही नहीं सफाई और रख-रखाव भी भगवान भरोसे है। चंद कर्मचारियों के पास इस बड़े पार्क की सफाई का जिम्मा है। जिस वजह से बड़े-बड़े घास उग आए और लोग चाहकर भी आराम से बैठ नहीं सकते हैं। इस बदहाली की वजह से यहां पर्यटक भी घट रहे हैं।
एक हिरण की हो गई थी मौत
अभी कुछ दिनों पहले ही हिरण पानी की तलाश में जा रहे एक हिरण को कुत्तों ने मार डाला था। तब भी वन विभाग पर उंगली उठी थी लेकिन फिर सबकुछ मैनेज हो गया। जानवरों का रख-रखाव बड़ा सवाल बना हुआ है।

यह है निर्धारित बजट
- एक मांसाहारी जानवर पर सालाना 72 हजार
- शाकाहारी जानवर पर 70 हजार
- हिरण के लिए 1.20 लाख रुपये
ये होनी चाहिए डाइट
- हिरण को चोकर, भेली, घास, सोयाबीन
- तोता व अन्य पक्षियों के लिए चना
इस वित्तीय वर्ष में खुराकी का कोई बजट नहीं आया है। फिर भी जानवरों के खाने और रखरखाव की व्यवस्था की जा रही है। किसी भी जीव के कुपोषित होने की जानकारी नहीं आई है। जानवरों को चिड़ियाघर में शिफ्ट भी किया जाना है।
हेमंत, मुख्य वन संरक्षक
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed