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कमिश्नर कार्यालय, गाड़ी पर महिलाओं ने फेंका मैला
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Wed, 27 Apr 2016 08:58 PM IST
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कमिश्नर कार्यालय पर मैला फेकने वाली कुशीनगर की प्रदर्शनकारी महिलाओ को ले जाती महिला पुलिस।
- फोटो : mahesh kumar
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कुशीनगर से आई तीन महिलाओं ने बुधवार को कमिश्नर दफ्तर में अराजकता की सभी हदें पार कर दीं। अपने पिता की संपत्ति में बराबर का हिस्सा दिलाने के लिए उन्होंने पहले तो कमिश्नर पर दबाव बनाया और जब उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड़ा कि वह इस मामले में कुछ नहीं कर सकते तो महिलाएं नाराज हो गईं।
उन्होंने झोले में रखी मैले से भरी बोतल कमिश्नर कार्यालय के बाहर और उनकी गाड़ी पर फेंक दी। जब सुरक्षा गार्ड ने महिलाओं को रोकना चाहता तो उन्होंने उनपर भी मैला फेंकने की कोशिश की। करीब दो घंटे तक चले हंगामे के बाद पहुंची महिला थानाध्यक्ष सभी को हिरासत में ले लिया।
कुशीनगर के हनुमानगंज के बुलहवा गांव निवासी मूरत की तीन बेटियां हैं। मूरत ने बड़ी बेटी कुरैश को अपनी जमीन व मकान दे दिया। इससे नाराज उनकी दो अन्य बेटियां माला और मूरत ने थानाध्यक्ष हनुमानगंज से गुहार लगाई। उनका आरोप है कि थानाध्यक्ष ने उनकी फारियाद नहीं सुनी।
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दोनों बहनें कुशीनगर के जिलाधिकारी के पास गई पर उन्होंने यह कहकर कुछ करने से मना कर दिया कि जब उनके पिता ने ही अपनी बेटी को सब दे दिया तो वह क्या कर सकते हैं। माला और मूरत का कहना है कि उन्होंने कुछ रोज पहले कमिश्नर कार्यालय पर धरना भी दिया था। तब कमिश्नर ने एसडीएम खंड्डा को इस मामले के निस्तारण का निर्देश दिया था, लेकिन थानाध्यक्ष हनुमानगंज ने निस्तारण नहीं होने दिया।
बुधवार को माला और मूरत बुलहवां की पूर्व प्रधान साबिरा बेगम के साथ कमिश्नर कार्यालय पहुुुंचीं। उन्हें ज्ञापन दिया। इसमें कहा गया है कि थानाध्यक्ष उन लोगों का मामला हल नहीं होने दे रहे हैं। एक पेपर पर जबरिया हस्ताक्षर कराके दोनों बहनों को पिता की जमीन से बेदखल कर रहे हैं। कमिश्नर से उन्होंने मांग की कि पिता की जमीन में तीनों बहनों का बराबर हिस्सा करा दें।
कमिश्नर ने उनकी बातें सुनने के बाद कहा कि यह मामला दीवानी का है। वह इसमें कुछ नहीं कर सकते। इस पर महिलाएं बाहर आते ही मैला फेंकने लगी। पुलिस को सूचना देने के बाद भी पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को आने में करीब दो घंटे लग गए।
महिलाएं अपने पिता की संपत्ति दिलाने की बात कह रहीं थीं। यह प्रशासनिक अधिकारी का कार्य नहीं है। उनसे कहा कि वह दीवानी न्यायालय जाएं। उन्होंने जो हरकत की है वह बहुत गंभीर है। इसमें सभी की जिम्मेदारी तय होगी।
- पी गुरु प्रसाद, कमिश्नर
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उन्होंने झोले में रखी मैले से भरी बोतल कमिश्नर कार्यालय के बाहर और उनकी गाड़ी पर फेंक दी। जब सुरक्षा गार्ड ने महिलाओं को रोकना चाहता तो उन्होंने उनपर भी मैला फेंकने की कोशिश की। करीब दो घंटे तक चले हंगामे के बाद पहुंची महिला थानाध्यक्ष सभी को हिरासत में ले लिया।
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कुशीनगर के हनुमानगंज के बुलहवा गांव निवासी मूरत की तीन बेटियां हैं। मूरत ने बड़ी बेटी कुरैश को अपनी जमीन व मकान दे दिया। इससे नाराज उनकी दो अन्य बेटियां माला और मूरत ने थानाध्यक्ष हनुमानगंज से गुहार लगाई। उनका आरोप है कि थानाध्यक्ष ने उनकी फारियाद नहीं सुनी।
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दोनों बहनें कुशीनगर के जिलाधिकारी के पास गई पर उन्होंने यह कहकर कुछ करने से मना कर दिया कि जब उनके पिता ने ही अपनी बेटी को सब दे दिया तो वह क्या कर सकते हैं। माला और मूरत का कहना है कि उन्होंने कुछ रोज पहले कमिश्नर कार्यालय पर धरना भी दिया था। तब कमिश्नर ने एसडीएम खंड्डा को इस मामले के निस्तारण का निर्देश दिया था, लेकिन थानाध्यक्ष हनुमानगंज ने निस्तारण नहीं होने दिया।
बुधवार को माला और मूरत बुलहवां की पूर्व प्रधान साबिरा बेगम के साथ कमिश्नर कार्यालय पहुुुंचीं। उन्हें ज्ञापन दिया। इसमें कहा गया है कि थानाध्यक्ष उन लोगों का मामला हल नहीं होने दे रहे हैं। एक पेपर पर जबरिया हस्ताक्षर कराके दोनों बहनों को पिता की जमीन से बेदखल कर रहे हैं। कमिश्नर से उन्होंने मांग की कि पिता की जमीन में तीनों बहनों का बराबर हिस्सा करा दें।
कमिश्नर ने उनकी बातें सुनने के बाद कहा कि यह मामला दीवानी का है। वह इसमें कुछ नहीं कर सकते। इस पर महिलाएं बाहर आते ही मैला फेंकने लगी। पुलिस को सूचना देने के बाद भी पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को आने में करीब दो घंटे लग गए।
महिलाएं अपने पिता की संपत्ति दिलाने की बात कह रहीं थीं। यह प्रशासनिक अधिकारी का कार्य नहीं है। उनसे कहा कि वह दीवानी न्यायालय जाएं। उन्होंने जो हरकत की है वह बहुत गंभीर है। इसमें सभी की जिम्मेदारी तय होगी।
- पी गुरु प्रसाद, कमिश्नर