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स्मार्ट सिटी की सूची में जगह मिलना फिर मुश्किल
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sun, 07 May 2017 12:48 AM IST
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नगर निगम।
- फोटो : Amar Ujala
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जिन कमियों ने गोरखपुर नगर निगम को स्मार्ट सिटी की सूची से बाहर कर दिया था, एक साल बाद भी उन स्थितियों में बहुत सुधार नहीं हो सका है। ऐसे में स्मार्ट सिटी की अगली सूची में भी जगह बना पाना गोरखपुर के लिए मुश्किल हो सकता है। पिछली बार इस सूची में शामिल होने के लिए नगर निगम की सारी कवायद मात्र 72.5 अंक हासिल कर बाहर हो गई थी। उत्तर प्रदेश से 13 शहरों का चयन होना था, लेकिन गोरखपुर को 15वां स्थान हासिल हुआ। यह सब नगर निगम के अधिकारियों की लापरवाही और मनमानी रवैये के कारण हुआ था। नगर निगम सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, टैक्स, रेंट और राजस्व आदि में फिसल गया था। एक साल बीतने के बाद भी नगर निगम इसमें बहुत सुधार नहीं कर सका है।
कर राजस्व में गोरखपुर के थे जीरो नंबर
थोड़ी सी लापरवाही के कारण नगर निगम स्मार्ट सिटी की दौड़ से बाहर हो गया था। कर राजस्व और अन्य आंतरिक स्रोतों का अंशदान निर्धारित 20 प्रतिशत से कम होने से नगर निगम को इस कटेगरी में शून्य अंक हासिल हुए थे। स्मार्ट सिटी बनने की दौड़ में शामिल होने के लिए निर्धारित 15 कटेगरी में 100 नंबर का प्रावधान था, लेकिन गोरखपुर मात्र 72.5 अंक ही हासिल कर सका था। अगर कुछ मामलों में नगर निगम लापरवाही नहीं करता तो वह स्मार्ट सिटी में शामिल हो सकता था। टैक्स वसूली और अपने संसाधनों से आय के स्रोत तैयार नहीं करने की वजह से नगर निगम इस कटेगरी का नंबर नहीं पा सका। शहरी स्थानीय निकाय बजट का अंशदान 20 प्रतिशत से भी कम है। इसी वजह से इस कटेगरी में नगर निगम को शून्य अंक हासिल हुआ। अगर इस कटेगरी का 10 अंक नगर निगम हासिल कर लेता तो गोरखपुर 82.5 अंकों के साथ स्मार्ट सिटी में चयनित हो जाता। कर राजस्व वसूली के मामले में भी नगर निगम की स्थिति काफी बेहतर नहीं है।
आय के स्रोत विकसित नहीं कर सका निगम
स्मार्ट सिटी के चयन में नगर निगम के आय के स्रोतों का होना भी एक महत्वपूर्ण आधार है, लेकिन पिछले 10 सालों से आय के संसाधनों को बढ़ाने के लिए नगर निगम ने कुछ नहीं किया। इसका परिणाम है आज नगर निगम के सामने अपने ठेकेदारों का बकाया चुकाने में दिक्कतें आ रही हैं।
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ऐसे मिले थे नंबर
स्वच्छ भारत मिशन के तहत निर्मित शौचालयों में बढ़ोतरी 10 अंक
ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली 5 अंक
मासिक ई पत्रिका 5 अंक
इलेक्ट्रॅानिक रूप से सक्षम परियोजना-वार म्यूनिसिपल बजट व्यय सूचना 5 अंक
निर्वाचित नगर निगम परिषद का संकल्प 0 अंक
शहर के लोगों के साथ विचार विमर्श 0 अंक
सेवा आपूर्ति में विलंब के लिए पूरक दंड लगाना 5 अंक
गत तीन वित्तीय वर्षों के दौरान आंतरिक रूप से सृजित राजस्व का एकत्रीकरण 5 अंक
वेतन का भुगतान 5 अंक
लेखाओं की लेखा परीक्षा 5 अंक
कर राजस्व शुल्क, किराया और अन्य आंतरिक राजस्व स्रोतों के अंशदान का प्रतिशत 0 अंक
जल आपूर्ति की स्थापना और अनुरक्षण लागत का प्रतिशत 5 अंक
वित्तीय वर्ष 2014-15 में आंतरिक राजस्व स्रोतों के अंशदान का प्रतिशत 2.5 अंक
जेएनएनयूआरएम सुधार 10 अंक
जेएनएनयूआरएम के अंतर्गत मार्च 2012 तक स्वीकृत परियोजनाओं की पूर्णता 10 अंक
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कर राजस्व में गोरखपुर के थे जीरो नंबर
थोड़ी सी लापरवाही के कारण नगर निगम स्मार्ट सिटी की दौड़ से बाहर हो गया था। कर राजस्व और अन्य आंतरिक स्रोतों का अंशदान निर्धारित 20 प्रतिशत से कम होने से नगर निगम को इस कटेगरी में शून्य अंक हासिल हुए थे। स्मार्ट सिटी बनने की दौड़ में शामिल होने के लिए निर्धारित 15 कटेगरी में 100 नंबर का प्रावधान था, लेकिन गोरखपुर मात्र 72.5 अंक ही हासिल कर सका था। अगर कुछ मामलों में नगर निगम लापरवाही नहीं करता तो वह स्मार्ट सिटी में शामिल हो सकता था। टैक्स वसूली और अपने संसाधनों से आय के स्रोत तैयार नहीं करने की वजह से नगर निगम इस कटेगरी का नंबर नहीं पा सका। शहरी स्थानीय निकाय बजट का अंशदान 20 प्रतिशत से भी कम है। इसी वजह से इस कटेगरी में नगर निगम को शून्य अंक हासिल हुआ। अगर इस कटेगरी का 10 अंक नगर निगम हासिल कर लेता तो गोरखपुर 82.5 अंकों के साथ स्मार्ट सिटी में चयनित हो जाता। कर राजस्व वसूली के मामले में भी नगर निगम की स्थिति काफी बेहतर नहीं है।
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आय के स्रोत विकसित नहीं कर सका निगम
स्मार्ट सिटी के चयन में नगर निगम के आय के स्रोतों का होना भी एक महत्वपूर्ण आधार है, लेकिन पिछले 10 सालों से आय के संसाधनों को बढ़ाने के लिए नगर निगम ने कुछ नहीं किया। इसका परिणाम है आज नगर निगम के सामने अपने ठेकेदारों का बकाया चुकाने में दिक्कतें आ रही हैं।
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स्वच्छ भारत मिशन के तहत निर्मित शौचालयों में बढ़ोतरी 10 अंक
ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली 5 अंक
मासिक ई पत्रिका 5 अंक
इलेक्ट्रॅानिक रूप से सक्षम परियोजना-वार म्यूनिसिपल बजट व्यय सूचना 5 अंक
निर्वाचित नगर निगम परिषद का संकल्प 0 अंक
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गत तीन वित्तीय वर्षों के दौरान आंतरिक रूप से सृजित राजस्व का एकत्रीकरण 5 अंक
वेतन का भुगतान 5 अंक
लेखाओं की लेखा परीक्षा 5 अंक
कर राजस्व शुल्क, किराया और अन्य आंतरिक राजस्व स्रोतों के अंशदान का प्रतिशत 0 अंक
जल आपूर्ति की स्थापना और अनुरक्षण लागत का प्रतिशत 5 अंक
वित्तीय वर्ष 2014-15 में आंतरिक राजस्व स्रोतों के अंशदान का प्रतिशत 2.5 अंक
जेएनएनयूआरएम सुधार 10 अंक
जेएनएनयूआरएम के अंतर्गत मार्च 2012 तक स्वीकृत परियोजनाओं की पूर्णता 10 अंक