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नगर निगम : बस आदेश, जांच होती ही नहीं 

Mon, 25 Apr 2016 01:52 AM IST
yogeshwar / gorakhpur।
yogeshwar / gorakhpur। Updated Mon, 25 Apr 2016 01:52 AM IST
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nagar nigam ः  only order, no checking
‌फ्रॉड - फोटो : demo pic
गोरखपुर। नगर निगम में धांधली का मामला उजागर ही नहीं हो सकता है। 31 मार्च को बोर्ड की 14वीं बैठक में वार्ड नंबर 65 के पार्षद विजय राज ने उनके वार्ड में हुए कार्यों की जांच की मांग की थी, जिस पर मेयर डॉ. सत्या पांडेय ने जांच के आदेश देते हुए कमेटी भी बनाई थी, जिसे 21 अप्रैल तक रिपोर्ट देनी थी।
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समय सीमा तो बीत गई, लेकिन रिपोर्ट तो दूर की बात रही, जांच ही अब तक शुरू नहीं की गई। नगर निगम में यह पहला ऐसा मामला नहीं है, जब किसी काम की जांच का आदेश हुआ हो। इससे पहले भी कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जहां अधिकारियों ने जांच की बात तो कही लेकिन उसके बाद वह ठंडे बस्ते में चला गया।
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14वीं बोर्ड बैठक में वार्ड नंबर 65 के पार्षद विजय राज ने आरोप लगाते हुए कहा था कि नगर निगम की दुर्व्यवस्था के लिए अधिकारी जिम्मेदार हैं। उन्होंने उनके वार्ड में विगत चार वर्षों में हुए कामों की जांच की मांग की थी। मेयर ने कमेटी गठित कर सहायक नगर आयुक्त स्वर्ण सिंह, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी रबीश चंद्र और निर्माण विभाग के सहायक अभियंता वीसी पटेल को जांच आदेश दिया था।
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कमेटी को 21 अप्रैल तक रिपोर्ट देनी थी। लेकिन 22 अप्रैल बीत गया। न तो अधिकारी वार्ड में गए और न ही जांच हुई। इन दिनों नगर निगम में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि यहां धांधली करने वाले बड़ी ही आसानी से बच जाते हैं। क्योंकि जांच के नाम पर केवल खानापूरी ही की जाती है। 


बोर्ड की बैठक के बाद अधिकारियों से कई बार मिला लेकिन किसी ने कोई कार्रवाई नहीं की। सभी कामों की जांच होती तो बड़े-बड़े अफसर उसमें फंस जाते। उन्हें बचाने के लिए ही जांच नहीं हो रही है। 
- विजय राज, पार्षद 


अधिकारियों से इस संबंध में जवाब मांगा जाएगा। बोर्ड की बैठक में हुए निर्णय के बावजूद अधिकारी लिखित लेटर मांग रहे थे। 
- डॉ. सत्या पांडेय, मेयर 


वार्ड नंबर 65 में हुए कामों की जांच के संबंध में कोई लिखित आदेश नहीं मिला था। जांच कर भी लेते तो रिपोर्ट किसे देते।
- स्वर्ण सिंह, सहायक नगर आयुक्त
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