{"_id":"59e36f7f4f1c1b76678b5d38","slug":"muslims-also-celebrates-diwali","type":"story","status":"publish","title_hn":"मां का पंडाल बनेगा मोहब्बत का मकतब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मां का पंडाल बनेगा मोहब्बत का मकतब
आशुतोष मिश्र, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Mon, 16 Oct 2017 01:17 AM IST
विज्ञापन
लक्ष्मी पूजा के लिए पंडाल सजाते कलाकार।
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
‘तुम राम कहो, वो रहीम कहें, दोनों की ग़रज़ अल्लाह से है। तुम दीन कहो, वो धर्म कहें, मंशा तो उसी की राह से है।’ जिला अस्पताल में मां लक्ष्मी का दरबार सजाते युवाओं से मिलकर यह कविता याद आ गई। मोहम्मद मनीस और मोहम्मद अनीस की अगुवाई में सज रहा मां का पंडाल सही मायने में मोहब्बत का मकतब बनने की राह पर है। दीपोत्सव के दौरान पूजापाठ के साथ यह पंडाल लोगों को कौमी एकता का पाठ भी पढ़ाएगा।
जिला अस्पताल परिसर में होने वाली लक्ष्मी पूजा से एक दशक पहले मोहम्मद मनीस और मोहम्मद अनीस जुड़े। मां की पूजा की तैयारियों में बढ़ चढ़कर शिरकत करते रहे इन भाइयों को समिति के सदस्यों ने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दे दी। इन भाइयों के साथ असलम खान, मोहम्मद फरहान और मोहम्मद कमरुद्दीन भी मां के दरबार को भव्य रूप देने में जुटे हैं। समिति के हिंदू सदस्य सुनील यादव, रिशु उपाध्याय, अमन यादव, दीपक गौड़ आदि अध्यक्ष मोहम्मद मनीस से मिल रही जिम्मेदारी पूरे मनोयोग से निभाने में लगे हैं। युवाओं की ये टोली खुद से रूबरू होने वालों को पूर्वांचल की गंगा-जमुनी तहजीब याद दिला देती है। कहना न होगा कि दीपोत्सव पर इस पंडाल से उठने वाली रोशनी शहर में भाईचारे का प्रकाश भरने का काम करेगी।
एक-दूजे के सुख-दुख में साथ
बचपन से ही हम सभी दोस्त मिलकर दिवाली की खुशियां मनाते रहे हैं। हमेशा हमने एक-दूजे के सुख-दुख में साथ दिया। परिवार के लोगों ने भी कभी हमारे बीच के भाईचारे पर एतराज नहीं जताया।
विज्ञापन
- मोहम्मद मनीस, अध्यक्ष लक्ष्मी पूजा समिति
आरती में होते हैं सब एक साथ
कई सालों से हमारी मित्र मंडली जिला अस्पताल में लक्ष्मी पूजा आयोजन समिति से जुड़ी है। हर साल पूजा के दौरान आरती के वक्त सारा काम छोड़कर सभी दोस्त एक साथ आकर खड़े होते रहे हैं।
- मोहम्मद अनीस, उपाध्यक्ष लक्ष्मी पूजा समिति
एक-दूसरे की आस्था का सम्मान
लक्ष्मी पूजा आयोजन के दौरान जिस तरह मुस्लिम दोस्त कंधे से कंधा मिलाकर हमारा साथ देते हैं, उसी तरह से हम भी उनके त्योहार में साथ खड़े होते हैं। हम एक-दूसरे की आस्था का सम्मान करते हैं।
- दीपक गौड़, सदस्य लक्ष्मी पूजा समिति
दोस्त साथ न हों तो खुशियां फीकी
त्योहार की खुशी तभी है जब दोस्तों का साथ हो। अगर दोस्त साथ न हों तो खुशियां फीकी हो जाती हैं। हर मजहब मोहब्बत का संदेश देता है। मजहब को मोहब्बत के बीच दीवार बनाना ठीक नहीं।
- रिशु उपाध्याय, सदस्य लक्ष्मी पूजा समिति
विज्ञापन
जिला अस्पताल परिसर में होने वाली लक्ष्मी पूजा से एक दशक पहले मोहम्मद मनीस और मोहम्मद अनीस जुड़े। मां की पूजा की तैयारियों में बढ़ चढ़कर शिरकत करते रहे इन भाइयों को समिति के सदस्यों ने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दे दी। इन भाइयों के साथ असलम खान, मोहम्मद फरहान और मोहम्मद कमरुद्दीन भी मां के दरबार को भव्य रूप देने में जुटे हैं। समिति के हिंदू सदस्य सुनील यादव, रिशु उपाध्याय, अमन यादव, दीपक गौड़ आदि अध्यक्ष मोहम्मद मनीस से मिल रही जिम्मेदारी पूरे मनोयोग से निभाने में लगे हैं। युवाओं की ये टोली खुद से रूबरू होने वालों को पूर्वांचल की गंगा-जमुनी तहजीब याद दिला देती है। कहना न होगा कि दीपोत्सव पर इस पंडाल से उठने वाली रोशनी शहर में भाईचारे का प्रकाश भरने का काम करेगी।
विज्ञापन
एक-दूजे के सुख-दुख में साथ
बचपन से ही हम सभी दोस्त मिलकर दिवाली की खुशियां मनाते रहे हैं। हमेशा हमने एक-दूजे के सुख-दुख में साथ दिया। परिवार के लोगों ने भी कभी हमारे बीच के भाईचारे पर एतराज नहीं जताया।
विज्ञापन
- मोहम्मद मनीस, अध्यक्ष लक्ष्मी पूजा समिति
आरती में होते हैं सब एक साथ
कई सालों से हमारी मित्र मंडली जिला अस्पताल में लक्ष्मी पूजा आयोजन समिति से जुड़ी है। हर साल पूजा के दौरान आरती के वक्त सारा काम छोड़कर सभी दोस्त एक साथ आकर खड़े होते रहे हैं।
- मोहम्मद अनीस, उपाध्यक्ष लक्ष्मी पूजा समिति
एक-दूसरे की आस्था का सम्मान
लक्ष्मी पूजा आयोजन के दौरान जिस तरह मुस्लिम दोस्त कंधे से कंधा मिलाकर हमारा साथ देते हैं, उसी तरह से हम भी उनके त्योहार में साथ खड़े होते हैं। हम एक-दूसरे की आस्था का सम्मान करते हैं।
- दीपक गौड़, सदस्य लक्ष्मी पूजा समिति
दोस्त साथ न हों तो खुशियां फीकी
त्योहार की खुशी तभी है जब दोस्तों का साथ हो। अगर दोस्त साथ न हों तो खुशियां फीकी हो जाती हैं। हर मजहब मोहब्बत का संदेश देता है। मजहब को मोहब्बत के बीच दीवार बनाना ठीक नहीं।
- रिशु उपाध्याय, सदस्य लक्ष्मी पूजा समिति