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गोरखपुर महोत्सव में जायके के साथ खरीदारी का भी मौका
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 30 Jan 2016 02:18 AM IST
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महोत्सव में किचन के सामान से लेकर घर और गाड़ी खरीदने तक की सुविधा है। एक ही सेंटर पर कई नामचीन फूड कोर्ट में लोग जायके का लुत्फ उठाते दिखे तो स्टॉलों पर भी लोगों की भीड़ लगी रही। बर्तनों और घर के सजावटी सामानों के स्टॉलों के सामने महिलाओं की भीड़ नजर आ रही थी तो तमाम ऑटोमोबाइल कंपनियों के स्टॉलों के सामने लोग गाड़िया की खूबियां पूछते और समझते नजर आए। जीडीए के स्टॉल पर भी कुछ लोगों ने प्राधिकरण की आवासीय और व्यवसायिक योजनायों के बारे में जानकारी ली तो कुछ ने मौके पर ही रजिस्ट्रेशन भी कराया।
फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर हुई बहस
महोत्सव के दौरान शुक्रवार को दीक्षा भवन के प्रेक्षागृह में सोशल मीडिया की उपयोगिता और नुकसान पर परिचर्चा हुई जिसमें विभिन्न स्कूलाें के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। कुछ ने फेसबुक और इंस्टाग्राम से अपेक्षित दूरी बनाए रखने पर जोर दिया तो कुछ ने व्हाट्सएप को संचार क्रांति का बड़ा माध्यम बताया। ज्यूरी के सामने अलग-अलग स्कूलों के बच्चों ने अपने विचार रखे।
बिना आइने के मेकअप को लेकर बना रहा कौतूहल
कला संकाय में दोपहर दो बजे से महिलाओं के लिए प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इनमें बिना आइने के मेकअप को लेकर महिलाओं में काफी कौतूहल था। कार्यक्रम शुरू होने के पहले ही तमाम महिलाएं मंच के सामने जम गईं। इसी तरह मेहंदी रचाओ प्रतियोगिता के दौरान भी प्रतिभागियों द्वारा अलग-अलग डिजाइन में रचाई जा रही मेहंदी आकर्षण का केंद्र रही।
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भ्रूण हत्या और दहेज का मुद्दा छाया रहा
गोरखपुर। मूल्यांकन भवन में आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता के दौरान भ्रूण हत्या और दहेज का मुद्दा छाया रहा। ज्यादातर स्कूलों के प्रतियोगियों ने पोस्टर में इन्हीं कुरीतियों पर प्रहार किया।
विज्ञान मेला: सवालों के साथ पहुंचे जवाब लेकर लौटे
महोत्सव के दौरान गोरखपुर यूनिवर्सिटी के कला संकाय परिसर में लगे विज्ञान मेले में खूब रौनक रही। सैकड़ों की संख्या में पहुंचे छात्र-छात्राओं को जहां कई अनसुलझे सवालों के जवाब मिले वहीं विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों द्वारा कई अलग-अलग विषयों पर लगाई गई मॉडल प्रदर्शनी ने उनका ज्ञानवर्धन किया। वैज्ञानिकों ने तमाम तरह के अंधविश्वासों से पर्दा उठाया। मसलन जीभ में सुई कैसे आर-पार की जाती है, कैसे जलते कोयले पर चलकर जादूगर बाहर निकल जाते हैं। ऐसे तमाम करतबों में वैज्ञानिकों ने विस्तार से विज्ञान की भूमिका समझाई। मेले में विद्यार्थियों को घर और कल-कारखानों से निकलने वाले क बाड़ से ‘जुगाड़’ तैयार करने का तरीका सीखने का मौका मिला तो मोबाइल नक्षत्रशाला के जरिए उन्हें ब्रह्मांड में छुपे रहस्यों को सुलझाने में मदद मिली। मेले में गाजियाबाद क्षेत्रीय विज्ञान प्रौद्योगिकी केंद्र की सचल प्रयोगशाला के साथ ही विज्ञान आंचलिक केंद्र अलीगंज की बस भी तमाम नई जानकारियां देने में मददगार हुई। इस दौरान कठपुतली का प्रदर्शन, हाईड्रोपोनिक, फिंगर प्रिंट एनालिसिस और नाइट टेलिस्कोप के बारे में भी विद्यार्थियों को काफी कुछ सीखने का मौका मिला।
महोत्सव के मंच से भी उठी जाम की समस्या
गोरखपुर महोत्सव के मंच से भी शहर में जाम की समस्या का जिक्र हुआ। ऐसा किसी की शिकायत पर या घटना के जिक्र के दौरान नहीं हुआ बल्कि खुद अफसरों ने इसे अपने उद्बोधन का हिस्सा बनाया। सबसे पहले एसएसपी ने इसका जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें यहां ज्वाइन किए करीब सप्ताह भर का ही समय हुआ है, मगर अब तक की उनकी पड़ताल में जाम की समस्या एक बड़ी चुनौती के तौर पर सामने आई है। फिर क्या था आईजी, डीआईजी और डीएम ने भी इसे बड़ी समस्या बताते हुए शहर के लोगों को जल्द ही इससे निजात दिलाने का भरोसा दिलाया।
अफसरों ने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए ठोस रणनीति बनाई जाएगी। प्रयास किए जाएंगे कि एक साथ सड़कों पर भीड़ कम हो। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि स्कूल एक साथ न खुलें और न ही बंद हों। इस दिशा में पहल हो चुकी है। तमाम स्कूल इसका पालन कर रहे है। जो बचे हैं, उनका भी सर्वे कराके समय बदला जाएगा। एसएसपी ने कहा कि जाम से निपटने के लिए पूर्व में जो भी ब्लू प्रिंट तैयार हुआ है, उसका सख्ती से पालन कराने के साथ जल्द ही कुछ नए प्लान भी तैयार किए जाएंगे।
25 लाख छात्रों को जोड़ चुकी है ‘बिरादरी’
एक सुर-एक ताल कार्यक्रम का आयोजन करने वाली ‘मुंबई युवक बिरादरी’ की संचालिका लीना शेट्टी ने बताया कि पद्मश्री कांतिशाह ने ‘जोड़ो भारत’ अभियान के साथ ‘एक सुर, एक ताल’ की स्थापना की थी। 41 साल के सफर में इस कार्यक्रम ने शैक्षणिक, सांस्कृतिक, सामाजिक, कन्या बचाओ, जल और ऊर्जा संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने का काम किया है। बताया कि बिरादरी अब तक 25.25 लाख छात्र-छात्राओं को एक सुर-एक ताल कार्यक्रम से जोड़ चुकी है। गोरखपुर महोत्सव के दौरान इस कार्यक्रम में शरीक होने वाली छात्राओं की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह से उन्होंने अनुशासन की मिसाल कायम की है, उसकी जितनी भी प्रशंसा की जाए कम है।
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फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर हुई बहस
महोत्सव के दौरान शुक्रवार को दीक्षा भवन के प्रेक्षागृह में सोशल मीडिया की उपयोगिता और नुकसान पर परिचर्चा हुई जिसमें विभिन्न स्कूलाें के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। कुछ ने फेसबुक और इंस्टाग्राम से अपेक्षित दूरी बनाए रखने पर जोर दिया तो कुछ ने व्हाट्सएप को संचार क्रांति का बड़ा माध्यम बताया। ज्यूरी के सामने अलग-अलग स्कूलों के बच्चों ने अपने विचार रखे।
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बिना आइने के मेकअप को लेकर बना रहा कौतूहल
कला संकाय में दोपहर दो बजे से महिलाओं के लिए प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इनमें बिना आइने के मेकअप को लेकर महिलाओं में काफी कौतूहल था। कार्यक्रम शुरू होने के पहले ही तमाम महिलाएं मंच के सामने जम गईं। इसी तरह मेहंदी रचाओ प्रतियोगिता के दौरान भी प्रतिभागियों द्वारा अलग-अलग डिजाइन में रचाई जा रही मेहंदी आकर्षण का केंद्र रही।
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भ्रूण हत्या और दहेज का मुद्दा छाया रहा
गोरखपुर। मूल्यांकन भवन में आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता के दौरान भ्रूण हत्या और दहेज का मुद्दा छाया रहा। ज्यादातर स्कूलों के प्रतियोगियों ने पोस्टर में इन्हीं कुरीतियों पर प्रहार किया।
विज्ञान मेला: सवालों के साथ पहुंचे जवाब लेकर लौटे
महोत्सव के दौरान गोरखपुर यूनिवर्सिटी के कला संकाय परिसर में लगे विज्ञान मेले में खूब रौनक रही। सैकड़ों की संख्या में पहुंचे छात्र-छात्राओं को जहां कई अनसुलझे सवालों के जवाब मिले वहीं विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों द्वारा कई अलग-अलग विषयों पर लगाई गई मॉडल प्रदर्शनी ने उनका ज्ञानवर्धन किया। वैज्ञानिकों ने तमाम तरह के अंधविश्वासों से पर्दा उठाया। मसलन जीभ में सुई कैसे आर-पार की जाती है, कैसे जलते कोयले पर चलकर जादूगर बाहर निकल जाते हैं। ऐसे तमाम करतबों में वैज्ञानिकों ने विस्तार से विज्ञान की भूमिका समझाई। मेले में विद्यार्थियों को घर और कल-कारखानों से निकलने वाले क बाड़ से ‘जुगाड़’ तैयार करने का तरीका सीखने का मौका मिला तो मोबाइल नक्षत्रशाला के जरिए उन्हें ब्रह्मांड में छुपे रहस्यों को सुलझाने में मदद मिली। मेले में गाजियाबाद क्षेत्रीय विज्ञान प्रौद्योगिकी केंद्र की सचल प्रयोगशाला के साथ ही विज्ञान आंचलिक केंद्र अलीगंज की बस भी तमाम नई जानकारियां देने में मददगार हुई। इस दौरान कठपुतली का प्रदर्शन, हाईड्रोपोनिक, फिंगर प्रिंट एनालिसिस और नाइट टेलिस्कोप के बारे में भी विद्यार्थियों को काफी कुछ सीखने का मौका मिला।
महोत्सव के मंच से भी उठी जाम की समस्या
गोरखपुर महोत्सव के मंच से भी शहर में जाम की समस्या का जिक्र हुआ। ऐसा किसी की शिकायत पर या घटना के जिक्र के दौरान नहीं हुआ बल्कि खुद अफसरों ने इसे अपने उद्बोधन का हिस्सा बनाया। सबसे पहले एसएसपी ने इसका जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें यहां ज्वाइन किए करीब सप्ताह भर का ही समय हुआ है, मगर अब तक की उनकी पड़ताल में जाम की समस्या एक बड़ी चुनौती के तौर पर सामने आई है। फिर क्या था आईजी, डीआईजी और डीएम ने भी इसे बड़ी समस्या बताते हुए शहर के लोगों को जल्द ही इससे निजात दिलाने का भरोसा दिलाया।
अफसरों ने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए ठोस रणनीति बनाई जाएगी। प्रयास किए जाएंगे कि एक साथ सड़कों पर भीड़ कम हो। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि स्कूल एक साथ न खुलें और न ही बंद हों। इस दिशा में पहल हो चुकी है। तमाम स्कूल इसका पालन कर रहे है। जो बचे हैं, उनका भी सर्वे कराके समय बदला जाएगा। एसएसपी ने कहा कि जाम से निपटने के लिए पूर्व में जो भी ब्लू प्रिंट तैयार हुआ है, उसका सख्ती से पालन कराने के साथ जल्द ही कुछ नए प्लान भी तैयार किए जाएंगे।
25 लाख छात्रों को जोड़ चुकी है ‘बिरादरी’
एक सुर-एक ताल कार्यक्रम का आयोजन करने वाली ‘मुंबई युवक बिरादरी’ की संचालिका लीना शेट्टी ने बताया कि पद्मश्री कांतिशाह ने ‘जोड़ो भारत’ अभियान के साथ ‘एक सुर, एक ताल’ की स्थापना की थी। 41 साल के सफर में इस कार्यक्रम ने शैक्षणिक, सांस्कृतिक, सामाजिक, कन्या बचाओ, जल और ऊर्जा संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने का काम किया है। बताया कि बिरादरी अब तक 25.25 लाख छात्र-छात्राओं को एक सुर-एक ताल कार्यक्रम से जोड़ चुकी है। गोरखपुर महोत्सव के दौरान इस कार्यक्रम में शरीक होने वाली छात्राओं की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह से उन्होंने अनुशासन की मिसाल कायम की है, उसकी जितनी भी प्रशंसा की जाए कम है।