{"_id":"6a9dd343e27187d76509f05a","slug":"no-promotion-for-years-salary-also-at-risk-gorakhpur-news-c-7-gkp1038-1442858-2026-09-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gorakhpur News: वर्षों से पदोन्नति नहीं वेतन पर भी संकट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gorakhpur News: वर्षों से पदोन्नति नहीं वेतन पर भी संकट
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोरखपुर। पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ (पीआरकेएस) के महामंत्री विनोद कुमार राय ने पूर्वोत्तर रेलवे के कार्मिक विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन की उदासीनता और रेलवे बोर्ड के नियमों की अनदेखी से कर्मचारियों को पदोन्नति, परीक्षा और चिकित्सीय मामलों में नुकसान उठाना पड़ रहा है।
रेलवे बोर्ड ने विभिन्न कोटियों में पदोन्नति, विभागीय परीक्षा और पैनल बनाने के स्पष्ट नियम तय किए हैं। दूसरे रेल जोनों में इन नियमों के तहत कर्मचारियों को अवसर मिल रहे हैं लेकिन पूर्वोत्तर रेलवे में पर्याप्त रिक्तियां और योग्य कर्मचारी होने के बावजूद कई वर्षों से पदोन्नति के मामले लंबित हैं।
उन्होंने 25 और 50 प्रतिशत एलडीसीई कोटे की परीक्षाओं के बाद अभ्यर्थियों के प्राप्तांक सार्वजनिक नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए। इससे कर्मचारियों में प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर असंतोष है। सबसे गंभीर मामला बीमार कर्मचारियों का है। गंभीर बीमारी के कारण मूल पद पर काम करने में असमर्थ कर्मचारियों को महीनों और कई बार एक वर्ष से अधिक समय तक वैकल्पिक पद पर समायोजित नहीं किया जा रहा है। पीआरकेएस ने लंबित पदोन्नतियां तत्काल पूरी करने, परीक्षा के अंक सार्वजनिक करने और बीमार कर्मचारियों का शीघ्र समायोजन करने की मांग की है।
विज्ञापन
विज्ञापन
रेलवे बोर्ड ने विभिन्न कोटियों में पदोन्नति, विभागीय परीक्षा और पैनल बनाने के स्पष्ट नियम तय किए हैं। दूसरे रेल जोनों में इन नियमों के तहत कर्मचारियों को अवसर मिल रहे हैं लेकिन पूर्वोत्तर रेलवे में पर्याप्त रिक्तियां और योग्य कर्मचारी होने के बावजूद कई वर्षों से पदोन्नति के मामले लंबित हैं।
विज्ञापन
उन्होंने 25 और 50 प्रतिशत एलडीसीई कोटे की परीक्षाओं के बाद अभ्यर्थियों के प्राप्तांक सार्वजनिक नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए। इससे कर्मचारियों में प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर असंतोष है। सबसे गंभीर मामला बीमार कर्मचारियों का है। गंभीर बीमारी के कारण मूल पद पर काम करने में असमर्थ कर्मचारियों को महीनों और कई बार एक वर्ष से अधिक समय तक वैकल्पिक पद पर समायोजित नहीं किया जा रहा है। पीआरकेएस ने लंबित पदोन्नतियां तत्काल पूरी करने, परीक्षा के अंक सार्वजनिक करने और बीमार कर्मचारियों का शीघ्र समायोजन करने की मांग की है।
विज्ञापन