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कैंट स्टेशन पर ढाई घंटे खड़ी रही मंडुआडीह इंटरसिटी, यात्री परेशान
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कैंट स्टेशन पर ढाई घंटे खड़ी रही मंडुआडीह इंटरसिटी, यात्री परेशान
गोरखपुर। रेल प्रशासन के जिम्मेदारों की लापरवाही का खामियाजा मंडुआडीह से आ रही मंडुआडीह-गोरखपुर इंटरसिटी (15104) के यात्रियों को भुगतना पड़ा। शुक्रवार को ट्रेन को कैंट स्टेशन पर ढाई घंटे खड़ा कर दिया गया। ट्रेन यार्ड में आउटर की तरफ खड़ी थी। इसके एक तरफ दीवार तो दूसरी ओर बारिश के बाद बना कीचड़ था। आक्रोशित यात्री मजबूरी में ट्रेन में बैठे रहे। जब ट्रेन स्टेशन मास्टर के कमरे के सामने पहुंची तो यात्रियों ने रेल प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
मंडुआडीह इंटरसिटी निर्धारित समय से कैंट स्टेशन पर करीब 11 बजे पहुंच गई थी। लेकिन इसे आगे न बढ़ाकर रोक दिया गया। ट्रेन दक्षिणी यार्ड की ओर होने से यात्री नीचे भी उतर नहीं पाए। काफी देर तक इंतजार करने के बाद भी ट्रेन नहीं चली तो लोगों ने गार्ड से पूछा। उन्होंने सिग्नल न मिलने की बात कही। ट्रेन में बैठे-बैठे लोगों का धैर्य जवाब दे गया। परेशान यात्री ट्रेन में ही बैठे-बैठे रेल प्रशासन की व्यवस्था को कोसते रहे। करीब ढाई बजे ट्रेन को रवाना किया गया। हालांकि यह पहली बार नहीं है। अक्सर इंटरसिटी और पैसेंजर ट्रेनों को कैंट स्टेशन पर खड़ा कर दिया जाता है। कई बार तो यात्रियों ने जब स्टेशन पर हंगामा किया तब जाकर ट्रेन को बढ़ाया गया। जानकारों के अनुसार गोरखपुर जंक्शन पर प्लेटफार्म खाली रहने के बाद भी इंटरसिटी और पैसेंजर ट्रेन को नहीं लिया जाता है।
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गोरखपुर। रेल प्रशासन के जिम्मेदारों की लापरवाही का खामियाजा मंडुआडीह से आ रही मंडुआडीह-गोरखपुर इंटरसिटी (15104) के यात्रियों को भुगतना पड़ा। शुक्रवार को ट्रेन को कैंट स्टेशन पर ढाई घंटे खड़ा कर दिया गया। ट्रेन यार्ड में आउटर की तरफ खड़ी थी। इसके एक तरफ दीवार तो दूसरी ओर बारिश के बाद बना कीचड़ था। आक्रोशित यात्री मजबूरी में ट्रेन में बैठे रहे। जब ट्रेन स्टेशन मास्टर के कमरे के सामने पहुंची तो यात्रियों ने रेल प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
मंडुआडीह इंटरसिटी निर्धारित समय से कैंट स्टेशन पर करीब 11 बजे पहुंच गई थी। लेकिन इसे आगे न बढ़ाकर रोक दिया गया। ट्रेन दक्षिणी यार्ड की ओर होने से यात्री नीचे भी उतर नहीं पाए। काफी देर तक इंतजार करने के बाद भी ट्रेन नहीं चली तो लोगों ने गार्ड से पूछा। उन्होंने सिग्नल न मिलने की बात कही। ट्रेन में बैठे-बैठे लोगों का धैर्य जवाब दे गया। परेशान यात्री ट्रेन में ही बैठे-बैठे रेल प्रशासन की व्यवस्था को कोसते रहे। करीब ढाई बजे ट्रेन को रवाना किया गया। हालांकि यह पहली बार नहीं है। अक्सर इंटरसिटी और पैसेंजर ट्रेनों को कैंट स्टेशन पर खड़ा कर दिया जाता है। कई बार तो यात्रियों ने जब स्टेशन पर हंगामा किया तब जाकर ट्रेन को बढ़ाया गया। जानकारों के अनुसार गोरखपुर जंक्शन पर प्लेटफार्म खाली रहने के बाद भी इंटरसिटी और पैसेंजर ट्रेन को नहीं लिया जाता है।
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