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‘सफेद कपड़े वाले पहले मोहन सिंह को पढ़ें’
डॉ. राकेश राय, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Sat, 14 May 2016 08:32 PM IST
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पूर्वांचल संग्रहालय के लोकार्पण के दैैारान सांसद जया बच्चन, सांसद डिंपल यादव, सांसद कनकलता
- फोटो : shivharsh
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गोरखपुर यूनिवर्सिटी में शनिवार को लोकसभा सांसद और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव के साथ पूर्वांचल संग्रहालय का लोकार्पण करने आईं राज्यसभा सदस्य जया बच्चन सपाइयों को नसीहत दे गईं।
दीक्षा भवन में आयोजित कार्यक्रम में अपने छोटे से संबोधन में बात-बात पर नारेबाजी कर रहे सपाइयों को उन्होंने मोहन सिंह के आदर्शों पर चलने की सलाह दी। भवन में मौजूद सपा नेताओं को ‘सफेद वस्त्र वाला’ संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें पहले मोहन सिंह की किताबों को पढ़ना चाहिए और उनसे राजनीति की सीख लेनी चाहिए।
इसी क्रम में जया ने राज्यसभा में 50 सांसदों की विदाई समारोह के दौरान एक सांसद के उस बयान पर भी कटाक्ष किया, जिसमें उन्होंने कहा था राजनीतिज्ञ कभी विदा नहीं होते, विदा तो कन्याएं होती हैं। गोरखपुर के मंच से जया ने उस सांसद को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वह समय गया जब लड़कियों की विदाई होती थी, आजकल की लड़कियां विदा नहीं होतीं बल्कि विकास के झंडे को आगे बढ़ाने का काम कर रही हैं। उन्होंने खुद को और डिंपल यादव को पूर्वांचल से जोड़ने की कोशिश भी की।
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को दिवंगत मोहन सिंह के पुत्र समान बताते हुए उन्होंने जहां डिंपल को पूर्वांचल की बहू बताया। वहीं, खुद को इलाहाबाद की बहू बताकर पूर्वांचल से जोड़ा। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल की दो बहुएं एक बेटी (कनकलता) का हाथ मजबूत करने के लिए यहां आई हैं। मोहन सिंह ने भारतीय राजनीति को बतौर राजनेता जितना योगदान दिया, उसका 10 फीसदी भी दे दिया जाए तो देश के विकास की गति तेज हो जाएगी।
सांसद डिंपल यादव ने पूर्वांचल की धरती को ऐतिहासिक बताते हुए यहां से जुड़ी शख्सियतों के नाम गिनाए और कहा कि इस क्षेत्र में एक ऐसे संग्रहालय की बेहद जरूरत थी, जिसमें इलाके की स्मृतियां संजोईं जा सकें। मोहन सिंह और गोरखपुर यूनिवर्सिटी के प्रयास से यह संभव हो गया है।
मोहन सिंह को समाजवादी चिंतन का पुरोधा बताते हुए उन्होंने कहा कि उनकी खासियत की वजह से ही 2008 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ सांसद चुना गया था। डिंपल ने कहा कि समाजवादी चिंतकों ने लोकतंत्र को बनाए रखने के लिए हमेशा संघर्ष किया, मोहन सिंह उसकी महत्वपूर्ण कड़ी थे।
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दीक्षा भवन में आयोजित कार्यक्रम में अपने छोटे से संबोधन में बात-बात पर नारेबाजी कर रहे सपाइयों को उन्होंने मोहन सिंह के आदर्शों पर चलने की सलाह दी। भवन में मौजूद सपा नेताओं को ‘सफेद वस्त्र वाला’ संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें पहले मोहन सिंह की किताबों को पढ़ना चाहिए और उनसे राजनीति की सीख लेनी चाहिए।
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इसी क्रम में जया ने राज्यसभा में 50 सांसदों की विदाई समारोह के दौरान एक सांसद के उस बयान पर भी कटाक्ष किया, जिसमें उन्होंने कहा था राजनीतिज्ञ कभी विदा नहीं होते, विदा तो कन्याएं होती हैं। गोरखपुर के मंच से जया ने उस सांसद को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वह समय गया जब लड़कियों की विदाई होती थी, आजकल की लड़कियां विदा नहीं होतीं बल्कि विकास के झंडे को आगे बढ़ाने का काम कर रही हैं। उन्होंने खुद को और डिंपल यादव को पूर्वांचल से जोड़ने की कोशिश भी की।
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को दिवंगत मोहन सिंह के पुत्र समान बताते हुए उन्होंने जहां डिंपल को पूर्वांचल की बहू बताया। वहीं, खुद को इलाहाबाद की बहू बताकर पूर्वांचल से जोड़ा। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल की दो बहुएं एक बेटी (कनकलता) का हाथ मजबूत करने के लिए यहां आई हैं। मोहन सिंह ने भारतीय राजनीति को बतौर राजनेता जितना योगदान दिया, उसका 10 फीसदी भी दे दिया जाए तो देश के विकास की गति तेज हो जाएगी।
सांसद डिंपल यादव ने पूर्वांचल की धरती को ऐतिहासिक बताते हुए यहां से जुड़ी शख्सियतों के नाम गिनाए और कहा कि इस क्षेत्र में एक ऐसे संग्रहालय की बेहद जरूरत थी, जिसमें इलाके की स्मृतियां संजोईं जा सकें। मोहन सिंह और गोरखपुर यूनिवर्सिटी के प्रयास से यह संभव हो गया है।
मोहन सिंह को समाजवादी चिंतन का पुरोधा बताते हुए उन्होंने कहा कि उनकी खासियत की वजह से ही 2008 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ सांसद चुना गया था। डिंपल ने कहा कि समाजवादी चिंतकों ने लोकतंत्र को बनाए रखने के लिए हमेशा संघर्ष किया, मोहन सिंह उसकी महत्वपूर्ण कड़ी थे।