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विज्ञान के चमत्कार से रूबरू हुए विद्यार्थी
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Thu, 13 Oct 2016 08:50 PM IST
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एमजी पीजी कालेज मे इंस्पायर इंटर्नशिप कैम्प को सम्बोधित करते प्रशान्त नारायण ।
- फोटो : Shivharsh Dwivedi
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महात्मा गांधी पीजी कॉलेज में बृहस्पतिवार से पांच दिवसीय इंस्पायर कैंप की शुरुआत हुई। पहले दिन देश भर से आए वैज्ञानिकों ने शहर के डेढ़ दर्जन स्कलों के बच्चों को विज्ञान के चमत्कार से रूबरू कराया और उनमें विज्ञान के प्रति रुचि पैदा की। नई तकनीक की मिली जानकारी से कैंप में मौजूद 200 विद्यार्थी उत्साहित नजर आए।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में कॉलेज के प्राचार्य डॉ. शैलेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने स्वागत भाषण में आयोजन का औचित्य बताते हुए विज्ञान के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। उसके बाद मंकेश्वर नाथ पांडेय ने कॉलेज की ओर से विज्ञान के लिए किए गए प्रयास की चर्चा की। अमेरिका से आए राहुल नारायण ने विश्व में हो रहे तकनीकी विकास और उससे होने वाले लाभ की जानकारी विद्यार्थियों को दी। कॉलेज प्रबंधक प्रेम नारायण श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों को जीवन शैली में वैज्ञानिकता को जगह देने सलाह दी, जिससे जीवन शैली को उच्चीकृत किया जा सके।
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से आए पद्मश्री वैज्ञानिक प्रो. ओएन श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों को बताया कि विज्ञान सभी के अंदर है, जरूरत उसे प्रदर्शित या जागृत करने की है। प्रो. गंगा राम चौहान ने कुटीर उद्योगों में विज्ञान के इस्तेमाल के बारे में बताया। कॉलेज के अध्यक्ष श्रीकृष्ण ने विज्ञान और अध्यात्म के संबंध की चर्चा की और उसके फायदे भी गिनाए। उद्घाटन सत्र के संचालन की जिम्मेदारी डॉ. सविता रानी सिंह ने निभाई। इस दौरान डॉ. आलोक श्रीवास्तव, डॉ. गोपाल जी, डॉ. वीके वर्मा, डॉ. एएन ठाकुर, डॉ. उमेश गुप्ता, डॉ. शिखा श्रीवास्तव, आकांक्षा, रितेश श्रीवास्तव, डॉ. आभा राज आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने बताया कि नैनो टेकभनालॉजी का प्रयोग कैंसर के उपचार में भी कारगर सिद्ध हो रहा है। इस टेकभनालॉजी की मदद से कीमोथिरैपी की ऐसी तकनीक विकसित की जा रही है, जो सिर्फ कैंसर प्रभावित अंग पर प्रभाव डालेगी, शरीर के अन्य भाग पर उसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होगा। उन्होंने बताया कि मोबाइल और कंप्यूटर की बढ़ाई गई स्पीड भी नैनो टेकभनालॉजी की ही देन है। टेकभनालॉजी की मदद से स्पीड को 1000 गुना तक बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जो सिलिकॉन चिप वर्तमान में इस्तेमाल हो रही है, उसकी जगह बहुत जल्द नैनोट्यूब और नैनोग्राफिक ट्यूब का इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यूएसए में इसका इस्तेमाल हो रहा है।
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कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में कॉलेज के प्राचार्य डॉ. शैलेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने स्वागत भाषण में आयोजन का औचित्य बताते हुए विज्ञान के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। उसके बाद मंकेश्वर नाथ पांडेय ने कॉलेज की ओर से विज्ञान के लिए किए गए प्रयास की चर्चा की। अमेरिका से आए राहुल नारायण ने विश्व में हो रहे तकनीकी विकास और उससे होने वाले लाभ की जानकारी विद्यार्थियों को दी। कॉलेज प्रबंधक प्रेम नारायण श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों को जीवन शैली में वैज्ञानिकता को जगह देने सलाह दी, जिससे जीवन शैली को उच्चीकृत किया जा सके।
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बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से आए पद्मश्री वैज्ञानिक प्रो. ओएन श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों को बताया कि विज्ञान सभी के अंदर है, जरूरत उसे प्रदर्शित या जागृत करने की है। प्रो. गंगा राम चौहान ने कुटीर उद्योगों में विज्ञान के इस्तेमाल के बारे में बताया। कॉलेज के अध्यक्ष श्रीकृष्ण ने विज्ञान और अध्यात्म के संबंध की चर्चा की और उसके फायदे भी गिनाए। उद्घाटन सत्र के संचालन की जिम्मेदारी डॉ. सविता रानी सिंह ने निभाई। इस दौरान डॉ. आलोक श्रीवास्तव, डॉ. गोपाल जी, डॉ. वीके वर्मा, डॉ. एएन ठाकुर, डॉ. उमेश गुप्ता, डॉ. शिखा श्रीवास्तव, आकांक्षा, रितेश श्रीवास्तव, डॉ. आभा राज आदि मौजूद रहे।
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नैनो टेकभनालॉजी से बन रही टारगेटेड मेडिसिन : प्रो. ओएन
कैंप में शिरकत करने बनारस हिंदू यूनिवर्सटी से आए शांति स्वरूप भटनागर अवार्ड प्राप्त पद्मश्री वैज्ञानिक प्रो. ओएन श्रीवास्तव ने नैनो टेकभनालॉजी की चिकित्सा व्यवस्था में भूमिका बताई। उन्होंने बताया कि नैनो टेकभनालॉजी की मदद से अब टारगेटेड मेडिसिन तैयार की जा रही है, जो शरीर के उसी भाग पर असर करेगी, जिसमें बीमारी है। प्रो. श्रीवास्तव ने बुखार और दर्द में खाई जाने वाली पैरासिटामॉल टेबलेट की चर्चा करते हुए बताया कि इससे दर्द और बुखार तो दूर होता है लेकिन साइड इफेक्ट के तौर पर किडनी और लिवर की बीमारी मिल जाती है। नैनो टेकभनालॉजी से तैयार की गई दवाओं से यह समस्या दरकिनार हो जाएगी।उन्होंने बताया कि नैनो टेकभनालॉजी का प्रयोग कैंसर के उपचार में भी कारगर सिद्ध हो रहा है। इस टेकभनालॉजी की मदद से कीमोथिरैपी की ऐसी तकनीक विकसित की जा रही है, जो सिर्फ कैंसर प्रभावित अंग पर प्रभाव डालेगी, शरीर के अन्य भाग पर उसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होगा। उन्होंने बताया कि मोबाइल और कंप्यूटर की बढ़ाई गई स्पीड भी नैनो टेकभनालॉजी की ही देन है। टेकभनालॉजी की मदद से स्पीड को 1000 गुना तक बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जो सिलिकॉन चिप वर्तमान में इस्तेमाल हो रही है, उसकी जगह बहुत जल्द नैनोट्यूब और नैनोग्राफिक ट्यूब का इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यूएसए में इसका इस्तेमाल हो रहा है।