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यूपी: ग्लैंडर्स की बीमारी से ग्रसित घोड़े को डाक्टरों की निगरानी में मारा गया
Wed, 13 Feb 2019 08:41 PM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, संतकबीरनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, संतकबीरनगर
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 13 Feb 2019 08:41 PM IST
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घोड़े को इंजेक्शन देकर मारा गया
- फोटो : अमर उजाला
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संतकबीरनगर जिले के मलौली स्थित यादव ईंट भट्ठे पर दो घोड़े ग्लैंडर्स व फर्सी जैसी जानलेवा और संक्रामक बीमारी से ग्रसित थे। इनमें से एक घोड़े की 10 दिन पहले मौत हो चुकी है जबकि दूसरे को राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान हिसार (हरियाणा) की रिपोर्ट के आधार पर बुधवार को डॉक्टरों की टीम ने दूसरे घोड़े को भी जहर का इंजेक्शन लगाकर मार दिया।
इस संक्रामक बीमारी के यहां होने की सूचना से लोग सहम गए हैं। पशु चिकित्साधिकारी हैंसर बाजार डॉक्टर आरके निगम ने बताया कि मलौली में स्थित यादव ईंट भट्ठे पर काम करने के लिए रखे गए सात घोड़ों के खून की जांच करने के लिए राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान सिरसा रोड हिसार हरियाणा को भेजा गया था।
इसमें से दो घोड़ों के अंदर इस खतरनाक बीमारी की पुष्टि हुई थी। जांच रिपोर्ट आने से पहले ही इसमें से एक घोड़े की मौत हो चुकी थी। मामले की जानकारी डीएम को दी गई।
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इस संक्रामक बीमारी के यहां होने की सूचना से लोग सहम गए हैं। पशु चिकित्साधिकारी हैंसर बाजार डॉक्टर आरके निगम ने बताया कि मलौली में स्थित यादव ईंट भट्ठे पर काम करने के लिए रखे गए सात घोड़ों के खून की जांच करने के लिए राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान सिरसा रोड हिसार हरियाणा को भेजा गया था।
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इसमें से दो घोड़ों के अंदर इस खतरनाक बीमारी की पुष्टि हुई थी। जांच रिपोर्ट आने से पहले ही इसमें से एक घोड़े की मौत हो चुकी थी। मामले की जानकारी डीएम को दी गई।
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उनके आदेश पर बीमार एक घोड़े को बुधवार की दोपहर में जहर का इंजेक्शन लगाया गया जिससे उसकी मृत्यु हो गई। पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि ग्लैंडर्स व फर्सी नाम की यह संक्रामक बीमारी जानवरों से इंसानों में फैल जाती है।
यह अश्व वंशीय पशुओं के साथ-साथ मनुष्यों के लिए भी अत्यंत घातक एवं लाइलाज है। इसीलिए समय-समय पर घोड़ों के रक्त नमूनों की जांच होती रहती है। डॉक्टर आरके निगम के अनुसार अन्य घोड़े स्वस्थ हैं और अब इस रोग से किसी अन्य के प्रभावित होने का खतरा नहीं है।
यह अश्व वंशीय पशुओं के साथ-साथ मनुष्यों के लिए भी अत्यंत घातक एवं लाइलाज है। इसीलिए समय-समय पर घोड़ों के रक्त नमूनों की जांच होती रहती है। डॉक्टर आरके निगम के अनुसार अन्य घोड़े स्वस्थ हैं और अब इस रोग से किसी अन्य के प्रभावित होने का खतरा नहीं है।