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राज खोलने वाले तीन साल के दस्तावेज तो हाथ ही नहीं लगे
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रवि आर्म्स कार्पोरेशन के प्रोपराइटर की दुकान का सील तोडने के बाद जांच करते एडीएम सिटी राकेश कुम
राज खोलने वाले तीन साल के दस्तावेज तो हाथ ही नहीं लगे
अरुण चन्द
गोरखपुर। फर्जी लाइसेंस बनाने और उसपर शस्त्र भी खरीद लेने के सनसनीखेज मामले में बृहस्पतिवार को मास्टर माइंड प्रकाश नारायण पांडेय की दुकान में करीब दो घंटे तक चली जांच-पड़ताल के दौरान वे रिकार्ड हाथ ही नहीं लगे जो पूरे खेल का पर्दाफाश कर सकते थे। 2017 से लेकर अभी तक के स्टॉक और खरीद- बिक्त्रस्ी से जुड़े ज्यादातर अहम दस्तावेज दुकान से गायब थे। डीएम के. विजयेंद्र पांडियन की तरफ से गठित मजिस्ट्रेटी जांच कर रहे अफसरों ने भी इसे स्वीकारा है।
इसका खुलासा कुछ यूं हुआ- कई रिकार्ड देखने के बाद पसीने से लथपथ ज्वाइंट मजिस्ट्रेट प्रमुख कुमार ने रवि से पूछा कि इधर दो-तीन साल के नए रिकार्ड कहां रखे हैं तो रवि का जवाब था कि सर वो तो सारे रजिस्टर जमा कर दिए। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने चौंक कर पूछा कि अरे, कहां जमा कर दिए। रवि ने बताया कि शस्त्र कार्यालय में। 13 अगस्त को मेरे पिता के फोन पर सिटी मजिस्ट्रेट की कॉल आई थी। उन्होंने 2017 से अभी तक के सभी रजिस्टर मांगे थे। पिता जी के कहने पर मैने ही उसे जमा किए थे। चौंकते हुए एडीएम सिटी ने पूछा कि कैसे पता फोन पर सिटी मजिस्ट्रेट ने बात की और रजिस्टर तुमने कहां जमा किए। इसपर रवि बोला सर जैसा कि पिता जी ने मुझे बताया था कि फोन सिटी मजिस्ट्रेट के पेशकार के फोन से आया था। कॉल रिसीव करने पर असलहा बाबू ने कहा कि साहब बात करेंगे। अब साहब मतलब तो सिटी मजिस्ट्रेट ही न होगा सर। और दस्तावेज मैं ही लेकर गया था शस्त्र कार्यालय। उसने यह भी कहा कि साहब पेशकार के फोन की उस दिन की कॉल डिटेल चेक करा लीजिए सब पता चल जाएगा।
इसके बाद एडीएम सिटी राकेश कुमार श्रीवास्तव ने किसी से फोन पर बात की। पूछा कि रवि की दुकान से कुछ रजिस्टर जमा कराए गए थे क्या 13 अगस्त को। एक से डेढ़ मिनट की बात के बाद फोन कट गया और वहां मौजूद सभी अफसर एक-दूसरे का चेहरा देख दूसरे दस्तावेज एकत्रित करने में जुट गए। अब सवाल उठता है कि झूठ कौन बोल रहा है ? असलहा दफ्तर से जुड़े अफसर, बाबू या फिर पुलिस के शिकंजे में फंसे रवि गन हाउस के प्रोपराइटर का बेटा रवि पांडेय। बहरहाल, मामले की जांच जारी है। जांच सही दिशा में रही तो बड़े-बड़ों की गर्दन फंसेगी।
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पेशकार का महीने भर पहले हो चुका है तबादला
रवि ने यह भी दावा किया कि सिटी मजिस्ट्रेट के पेशकार का फोन चेक किया जाए तो सच सामने आ जाएगा। हालांकि सिटी मजिस्ट्रेट के पेशकार महमूद रजा का एक महीने पहले ही तबादला हो गया तब से पेशकार का पद खाली चल रहा है। सिटी मजिस्ट्रेट अजीत कुमार सिंह का भी तबादला हो चुका है।
14 अगस्त को खुलासा तो 13 को क्यों मंगाए रिकार्ड
रवि आर्म्स कार्पोरेशन के प्रोपराइटर के बेटे रवि पांडेय के बयान ने कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं। मसलन, अगर सिटी मजिस्ट्रेट ने रिकार्ड मांगे तो इसका खुलासा उन्होंने या शस्त्र कार्यालय के कर्मचारियों ने पहले क्यों नहीं किया? फर्जी शस्त्र लाइसेंस का मामला 14 अगस्त को सामने आया। तनवीर के खिलाफ मुकदमा भी उसी दिन दर्ज हुआ तो सिटी मजिस्ट्रेट ने रिकार्ड 13 अगस्त को ही क्यों मंगाए। सूत्र बताते हैं कि इस पूरे मामले में पहले आरोपी के तौर पर तनवीर पुलिस और प्रशासन के हत्थे 12 अगस्त को ही लग गया था। पुलिस के अलावा पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अजीत कुमार सिंह ने भी उससे पूछताछ की थी। दो दिन तक पूछताछ के बाद पुलिस ने 14 अगस्त की रात मुकदमा दर्ज किया और फिर उसी के साथ इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड बताया जा रहा रवि आर्म्स कार्पोरेशन का प्रोपराइटर प्रकाश नारायण पांडेय दुकान बंद कर फरार हो गया।
कोट---
तीन साल के रिकार्ड नहीं मिलने की भी जांच होगी : एडीएम सिटी
मजिस्ट्रेटी जांच का नेतृत्व कर रहे एडीएम सिटी राकेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि रवि ऑर्म्स कार्पोरेशन नामक दुकान का प्रोपराइटर फरार चल रहा था जिसकी वजह से 16 अगस्त को उसकी दुकान सील कर दी गई थी। बृहस्पतिवार को उसके दुकान की सील तोड़कर स्टॉक रजिस्टर और खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेज समेत सभी रिकार्ड जब्त कर लिए गए हैं। हालांकि 2017 से अभी तक के स्टॉक रजिस्टर या खरीद बिक्त्रस्ी से जुड़े कोई दस्तावेज दुकान में नहीं मिले। रवि के बयान की भी जांच की जा रही है। प्रारंभिक पूछताछ में पता चला है कि सिटी मजिस्ट्रेट या उनके कार्यालय से कोई फोन नहीं गया था। शस्त्र कार्यालय के कर्मचारियोें ने बताया कि उनके पास कोई दस्तावेज नहीं जमा कराए गए। जांच चल रही है। जल्द सभी तथ्य सामने आ जाएंगे।
पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट का कोट
झूठ बोल कर गुमराह कर रहा है रवि पांडेय : अजीत कुमार सिंह
रवि आर्म्स कार्पोरेशन के प्रोपराइटर प्रकाश नारायण पांडेय का बेटा रवि पांडेय झूठ बोल रहा है। वह गुमराह कर रहा है। 14 अगस्त को मामला खुलते ही वह और उसके पिता दुकान बंद कर फरार हो गए थे। हमने जब सभी दुकानों से दस्तावेज जब्त करने शुरू किए तो उसकी दुकान पर ताला लगा था। इसी वजह से उसकी दुकान सील की गई थी। जितनी भी दुकानों से दस्तावेज लिए गए हैं सभी को रिसीविंग दी गई है। अगर रवि आर्म्स कार्पोरेशन के दस्तावेज मैंने मंगाए थे तो वह रिसीविंग दिखाए। यही नहीं, अगर वह यह कह रहा है कि उसने शस्त्र कार्यालय में रिकार्ड जमा किए हैं तो शस्त्र कार्यालय के सीसीटीवी की फुटेज चेक कर ली जाए। वह जिस फोन से बात करना बता रहा है उसकी कॉल डिटेल चेक करा ली जाए। पुलिस सख्ती से पूछताछ करे तो वह सब सच-सच बयां कर देगा। - अजीत कुमार सिंह, पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट व वर्तमान में उप निदेशक मंडी
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अरुण चन्द
गोरखपुर। फर्जी लाइसेंस बनाने और उसपर शस्त्र भी खरीद लेने के सनसनीखेज मामले में बृहस्पतिवार को मास्टर माइंड प्रकाश नारायण पांडेय की दुकान में करीब दो घंटे तक चली जांच-पड़ताल के दौरान वे रिकार्ड हाथ ही नहीं लगे जो पूरे खेल का पर्दाफाश कर सकते थे। 2017 से लेकर अभी तक के स्टॉक और खरीद- बिक्त्रस्ी से जुड़े ज्यादातर अहम दस्तावेज दुकान से गायब थे। डीएम के. विजयेंद्र पांडियन की तरफ से गठित मजिस्ट्रेटी जांच कर रहे अफसरों ने भी इसे स्वीकारा है।
इसका खुलासा कुछ यूं हुआ- कई रिकार्ड देखने के बाद पसीने से लथपथ ज्वाइंट मजिस्ट्रेट प्रमुख कुमार ने रवि से पूछा कि इधर दो-तीन साल के नए रिकार्ड कहां रखे हैं तो रवि का जवाब था कि सर वो तो सारे रजिस्टर जमा कर दिए। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने चौंक कर पूछा कि अरे, कहां जमा कर दिए। रवि ने बताया कि शस्त्र कार्यालय में। 13 अगस्त को मेरे पिता के फोन पर सिटी मजिस्ट्रेट की कॉल आई थी। उन्होंने 2017 से अभी तक के सभी रजिस्टर मांगे थे। पिता जी के कहने पर मैने ही उसे जमा किए थे। चौंकते हुए एडीएम सिटी ने पूछा कि कैसे पता फोन पर सिटी मजिस्ट्रेट ने बात की और रजिस्टर तुमने कहां जमा किए। इसपर रवि बोला सर जैसा कि पिता जी ने मुझे बताया था कि फोन सिटी मजिस्ट्रेट के पेशकार के फोन से आया था। कॉल रिसीव करने पर असलहा बाबू ने कहा कि साहब बात करेंगे। अब साहब मतलब तो सिटी मजिस्ट्रेट ही न होगा सर। और दस्तावेज मैं ही लेकर गया था शस्त्र कार्यालय। उसने यह भी कहा कि साहब पेशकार के फोन की उस दिन की कॉल डिटेल चेक करा लीजिए सब पता चल जाएगा।
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इसके बाद एडीएम सिटी राकेश कुमार श्रीवास्तव ने किसी से फोन पर बात की। पूछा कि रवि की दुकान से कुछ रजिस्टर जमा कराए गए थे क्या 13 अगस्त को। एक से डेढ़ मिनट की बात के बाद फोन कट गया और वहां मौजूद सभी अफसर एक-दूसरे का चेहरा देख दूसरे दस्तावेज एकत्रित करने में जुट गए। अब सवाल उठता है कि झूठ कौन बोल रहा है ? असलहा दफ्तर से जुड़े अफसर, बाबू या फिर पुलिस के शिकंजे में फंसे रवि गन हाउस के प्रोपराइटर का बेटा रवि पांडेय। बहरहाल, मामले की जांच जारी है। जांच सही दिशा में रही तो बड़े-बड़ों की गर्दन फंसेगी।
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पेशकार का महीने भर पहले हो चुका है तबादला
रवि ने यह भी दावा किया कि सिटी मजिस्ट्रेट के पेशकार का फोन चेक किया जाए तो सच सामने आ जाएगा। हालांकि सिटी मजिस्ट्रेट के पेशकार महमूद रजा का एक महीने पहले ही तबादला हो गया तब से पेशकार का पद खाली चल रहा है। सिटी मजिस्ट्रेट अजीत कुमार सिंह का भी तबादला हो चुका है।
14 अगस्त को खुलासा तो 13 को क्यों मंगाए रिकार्ड
रवि आर्म्स कार्पोरेशन के प्रोपराइटर के बेटे रवि पांडेय के बयान ने कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं। मसलन, अगर सिटी मजिस्ट्रेट ने रिकार्ड मांगे तो इसका खुलासा उन्होंने या शस्त्र कार्यालय के कर्मचारियों ने पहले क्यों नहीं किया? फर्जी शस्त्र लाइसेंस का मामला 14 अगस्त को सामने आया। तनवीर के खिलाफ मुकदमा भी उसी दिन दर्ज हुआ तो सिटी मजिस्ट्रेट ने रिकार्ड 13 अगस्त को ही क्यों मंगाए। सूत्र बताते हैं कि इस पूरे मामले में पहले आरोपी के तौर पर तनवीर पुलिस और प्रशासन के हत्थे 12 अगस्त को ही लग गया था। पुलिस के अलावा पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अजीत कुमार सिंह ने भी उससे पूछताछ की थी। दो दिन तक पूछताछ के बाद पुलिस ने 14 अगस्त की रात मुकदमा दर्ज किया और फिर उसी के साथ इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड बताया जा रहा रवि आर्म्स कार्पोरेशन का प्रोपराइटर प्रकाश नारायण पांडेय दुकान बंद कर फरार हो गया।
कोट---
तीन साल के रिकार्ड नहीं मिलने की भी जांच होगी : एडीएम सिटी
मजिस्ट्रेटी जांच का नेतृत्व कर रहे एडीएम सिटी राकेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि रवि ऑर्म्स कार्पोरेशन नामक दुकान का प्रोपराइटर फरार चल रहा था जिसकी वजह से 16 अगस्त को उसकी दुकान सील कर दी गई थी। बृहस्पतिवार को उसके दुकान की सील तोड़कर स्टॉक रजिस्टर और खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेज समेत सभी रिकार्ड जब्त कर लिए गए हैं। हालांकि 2017 से अभी तक के स्टॉक रजिस्टर या खरीद बिक्त्रस्ी से जुड़े कोई दस्तावेज दुकान में नहीं मिले। रवि के बयान की भी जांच की जा रही है। प्रारंभिक पूछताछ में पता चला है कि सिटी मजिस्ट्रेट या उनके कार्यालय से कोई फोन नहीं गया था। शस्त्र कार्यालय के कर्मचारियोें ने बताया कि उनके पास कोई दस्तावेज नहीं जमा कराए गए। जांच चल रही है। जल्द सभी तथ्य सामने आ जाएंगे।
पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट का कोट
झूठ बोल कर गुमराह कर रहा है रवि पांडेय : अजीत कुमार सिंह
रवि आर्म्स कार्पोरेशन के प्रोपराइटर प्रकाश नारायण पांडेय का बेटा रवि पांडेय झूठ बोल रहा है। वह गुमराह कर रहा है। 14 अगस्त को मामला खुलते ही वह और उसके पिता दुकान बंद कर फरार हो गए थे। हमने जब सभी दुकानों से दस्तावेज जब्त करने शुरू किए तो उसकी दुकान पर ताला लगा था। इसी वजह से उसकी दुकान सील की गई थी। जितनी भी दुकानों से दस्तावेज लिए गए हैं सभी को रिसीविंग दी गई है। अगर रवि आर्म्स कार्पोरेशन के दस्तावेज मैंने मंगाए थे तो वह रिसीविंग दिखाए। यही नहीं, अगर वह यह कह रहा है कि उसने शस्त्र कार्यालय में रिकार्ड जमा किए हैं तो शस्त्र कार्यालय के सीसीटीवी की फुटेज चेक कर ली जाए। वह जिस फोन से बात करना बता रहा है उसकी कॉल डिटेल चेक करा ली जाए। पुलिस सख्ती से पूछताछ करे तो वह सब सच-सच बयां कर देगा। - अजीत कुमार सिंह, पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट व वर्तमान में उप निदेशक मंडी