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रवि गन हाउस से मिले 300 से अधिक शस्त्र लाइसेंस, सभी दस साल से ज्यादा पुराने
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रवि आर्म्स कार्पोरेशन के प्रोपराइटर की दुकान का सील तोडने से पहले आरोपी रवि पांडेय से जरूरी औपचा
रवि गन हाउस से मिले 300 से अधिक शस्त्र लाइसेंस, सभी दस साल से ज्यादा पुराने
गोरखपुर। मास्टरमाइंड प्रकाश नारायण की दुकान रवि आर्म्स कार्पोरेशन से गुरुवार को छानबीन में तीन सौ से अधिक पुराने शस्त्र लाइसेंस मिले। सभी लाइसेंसों की जिल्द यह गवाही दे रही थी कि वे आठ-दस साल से अधिक पुराने हैं। ये लाइसेंस दुकान के भीतर बने एक छोटे से केबिन में रखे गए थे। करीब 50 से 70 लाइसेंस की कोरी बुकलेट भी बरामद हुई है। इतनी बड़ी संख्या में शस्त्र लाइसेंस देख , दुकान का सर्च करने गए अफसर भी भौचक रह गए।
सटीक यूनिक आईडी कोड, आरोपितों के बयान में असलहा बाबू व अन्य कर्मचारियों के नाम और रवि आर्म्स कार्पोरेशन से तमाम तरह के दस्तावेज के साथ बरामद हुए शस्त्र लाइसेंस का जखीरा, ये सभी ठोस इशारा कर रहे हैं कि यह पूरा खेल कलेक्ट्रेट के कुछ कर्मचारियों की देख-रेख में फल-फूल रहा था। फर्जी लाइसेंस के मामले में जैसे-जैसे परत दर परत उधड़ रही है, प्रशासनिक अफसर-कर्मचारी भी कटघरे में खड़े नजर आ रहे हैं।
नियम के मुताबिक लाइसेंस सिर्फ शस्त्र रखने वाले के पास होने चाहिए। शस्त्र विक्रेता की दुकान पर लाइसेंस रखने या जमा करने का कोई प्रावधान ही नहीं है। असलहा जमा करने या नए शस्त्र खरीदने की दशा में भी सिर्फ लाइसेंस की फोटोकॉपी ही जमा कराई जाती है। ऐसे में दुकान से इतनी बड़ी संख्या में मिले पुराने शस्त्र लाइसेंस और लाइसेंस की नई बुकलेट यह संकेत करती है कि फर्जी लाइसेंस बनाने में इनका इस्तेमाल किया जाता था। जितने भी फर्जी लाइसेंस अब तक पकड़े गए उनपर यूनिक आईडी कोड किसी न किसी पुराने शस्त्र लाइसेंस के ही पड़े थे। इनमें कई लाइसेंस धारक मर गए तो कई दो साल पहले यूनिक आईडी कोड की व्यवस्था शुरू होने के दौरान आए ही नहीं थे। जो फर्जी लाइसेंस बनाए गए हैं, उनपर जारी होने की तिथि 2010 के पहले की है।
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बरामद लाइसेंस की भी होगी जांच: एडीएम
एडीएम सिटी राकेश कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि शस्त्र दुकान पर किसी का भी शस्त्र लाइसेंस नहीं रखा जा सकता है। बड़ी संख्या में मिले पुराने शस्त्र लाइसेंस ने हमें भी चौंकाया है। सभी को जब्त कर लिया गया है। जांच की जाएगी। तभी यह बताया जा सकेगा कि ये लाइसेंस कैसे रवि आर्म्स कार्पोरेशन के पास पहुंचे।
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गोरखपुर। मास्टरमाइंड प्रकाश नारायण की दुकान रवि आर्म्स कार्पोरेशन से गुरुवार को छानबीन में तीन सौ से अधिक पुराने शस्त्र लाइसेंस मिले। सभी लाइसेंसों की जिल्द यह गवाही दे रही थी कि वे आठ-दस साल से अधिक पुराने हैं। ये लाइसेंस दुकान के भीतर बने एक छोटे से केबिन में रखे गए थे। करीब 50 से 70 लाइसेंस की कोरी बुकलेट भी बरामद हुई है। इतनी बड़ी संख्या में शस्त्र लाइसेंस देख , दुकान का सर्च करने गए अफसर भी भौचक रह गए।
सटीक यूनिक आईडी कोड, आरोपितों के बयान में असलहा बाबू व अन्य कर्मचारियों के नाम और रवि आर्म्स कार्पोरेशन से तमाम तरह के दस्तावेज के साथ बरामद हुए शस्त्र लाइसेंस का जखीरा, ये सभी ठोस इशारा कर रहे हैं कि यह पूरा खेल कलेक्ट्रेट के कुछ कर्मचारियों की देख-रेख में फल-फूल रहा था। फर्जी लाइसेंस के मामले में जैसे-जैसे परत दर परत उधड़ रही है, प्रशासनिक अफसर-कर्मचारी भी कटघरे में खड़े नजर आ रहे हैं।
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नियम के मुताबिक लाइसेंस सिर्फ शस्त्र रखने वाले के पास होने चाहिए। शस्त्र विक्रेता की दुकान पर लाइसेंस रखने या जमा करने का कोई प्रावधान ही नहीं है। असलहा जमा करने या नए शस्त्र खरीदने की दशा में भी सिर्फ लाइसेंस की फोटोकॉपी ही जमा कराई जाती है। ऐसे में दुकान से इतनी बड़ी संख्या में मिले पुराने शस्त्र लाइसेंस और लाइसेंस की नई बुकलेट यह संकेत करती है कि फर्जी लाइसेंस बनाने में इनका इस्तेमाल किया जाता था। जितने भी फर्जी लाइसेंस अब तक पकड़े गए उनपर यूनिक आईडी कोड किसी न किसी पुराने शस्त्र लाइसेंस के ही पड़े थे। इनमें कई लाइसेंस धारक मर गए तो कई दो साल पहले यूनिक आईडी कोड की व्यवस्था शुरू होने के दौरान आए ही नहीं थे। जो फर्जी लाइसेंस बनाए गए हैं, उनपर जारी होने की तिथि 2010 के पहले की है।
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बरामद लाइसेंस की भी होगी जांच: एडीएम
एडीएम सिटी राकेश कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि शस्त्र दुकान पर किसी का भी शस्त्र लाइसेंस नहीं रखा जा सकता है। बड़ी संख्या में मिले पुराने शस्त्र लाइसेंस ने हमें भी चौंकाया है। सभी को जब्त कर लिया गया है। जांच की जाएगी। तभी यह बताया जा सकेगा कि ये लाइसेंस कैसे रवि आर्म्स कार्पोरेशन के पास पहुंचे।