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मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशियालिटी को हरी झंडी
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Thu, 28 Apr 2016 01:32 AM IST
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मेडिकल
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मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशियालिटी को सरकार ने मंजूरी दे दी है। लंबे समय से इसके लिए कवायद चल रही थी। करीब साल भर पहले सुपर स्पेशियालिटी की दौड़ से गोरखपुर मेडिकल कॉलेज बाहर हो गया था और इसकी जगह झांसी के मेडिकल कॉलेज को चुन लिया गया था, मगर कॉलेज प्रशासन के प्रयास से अब न सिर्फ इसकी मंजूरी मिल गई है बल्कि निर्माण के लिए पहली किस्त के रूप में 82 करोड़ रुपये भी जारी कर दिए गए हैं।
गंभीर रोग से पीड़ित लोगों के लिए मेडिकल कॉलेजों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें, इसके लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत देश के कई मेडिकल कॉलेजों को उच्चीकृत करने का फैसला किया था।
इसमें 2011 में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और झांसी मेडिकल कॉलेज को चुना गया था। इस प्रक्रिया में गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशियालिटी शुरू करने के लिए डेढ़ सौ करोड़ रुपये देने की घोषणा की गई थी। इसमें 1.20 करोड़ रुपये केंद्र सरकार को देने है जबकि 30 करोड़ राज्य सरकार को। अब केंद्र सरकार ने इसकी मंजूरी देते हुए 82 करोड़ की किस्त जारी कर दी है। सेंट्रल पीडब्ल्यूडी को काम कराने का जिम्मा मिला है।
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योजना के तहत मेडिकल कॉलेज में बाल चिकित्सा संस्थान के बगल में चार मंजिली इमारत का निर्माण होगा जिसमें 160 बेड होंगे। हालांकि इस जमीन पर चिकित्सा संस्थान के निर्माण में लगे मजदूर रहते हैं, लेकिन मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने उनके लिए दूसरी जगह का निर्धारण कर दिया है।
2012 में भेजा गया था प्रस्ताव
मंजूरी के बाद जून 2012 में मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने केंद्र सरकार को 220 करोड़ करोड़ का प्रस्ताव भेजा दिया था। इसकी पड़ताल के लिए तीन सदस्यीय केंद्रीय टीम ने कॉलेज का दौरा भी किया था। इसके बाद यह मामला ठंडा पड़ गया। 2014 में इस मद में महज डेढ़ सौ करोड़ रुपये स्वीकृत हुए। इस प्रयास को तब और धक्का लगा जब लखनऊ में हुई बैठक के दौरान प्राचार्य को बताया गया कि गोरखपुर मेडिकल कॉलेज को फिलहाल इस सुविधा से केंद्र सरकार ने वंचित कर दिया है। अब यह सुविधा झांसी मेडिकल कॉलेज को उपलब्ध कराई जाएगी।
ये मिलनी हैं सुविधाएं
कार्डियोलॉजी, प्लास्टिक सर्जरी, नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी व न्यूरो सर्जरी और बर्न के लिए 20 बेड के वार्ड। इन सभी विभागों के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त माड्यूलर ओटी। सभी विभागों की ओपीडी के लिए सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक।
सुपर स्पेशियालिटी सेवा के लिए गोरखपुर मेडिकल कॉलेज को मंजूरी मिल गई है। केंद्र सरकार ने 82 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। मई से इस योजना पर काम शुरू हो जाएगा।
- प्रो. राजीव मिश्रा, प्राचार्य, बीआरडी मेडिकल कॉलेज
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गंभीर रोग से पीड़ित लोगों के लिए मेडिकल कॉलेजों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें, इसके लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत देश के कई मेडिकल कॉलेजों को उच्चीकृत करने का फैसला किया था।
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इसमें 2011 में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और झांसी मेडिकल कॉलेज को चुना गया था। इस प्रक्रिया में गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशियालिटी शुरू करने के लिए डेढ़ सौ करोड़ रुपये देने की घोषणा की गई थी। इसमें 1.20 करोड़ रुपये केंद्र सरकार को देने है जबकि 30 करोड़ राज्य सरकार को। अब केंद्र सरकार ने इसकी मंजूरी देते हुए 82 करोड़ की किस्त जारी कर दी है। सेंट्रल पीडब्ल्यूडी को काम कराने का जिम्मा मिला है।
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योजना के तहत मेडिकल कॉलेज में बाल चिकित्सा संस्थान के बगल में चार मंजिली इमारत का निर्माण होगा जिसमें 160 बेड होंगे। हालांकि इस जमीन पर चिकित्सा संस्थान के निर्माण में लगे मजदूर रहते हैं, लेकिन मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने उनके लिए दूसरी जगह का निर्धारण कर दिया है।
2012 में भेजा गया था प्रस्ताव
मंजूरी के बाद जून 2012 में मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने केंद्र सरकार को 220 करोड़ करोड़ का प्रस्ताव भेजा दिया था। इसकी पड़ताल के लिए तीन सदस्यीय केंद्रीय टीम ने कॉलेज का दौरा भी किया था। इसके बाद यह मामला ठंडा पड़ गया। 2014 में इस मद में महज डेढ़ सौ करोड़ रुपये स्वीकृत हुए। इस प्रयास को तब और धक्का लगा जब लखनऊ में हुई बैठक के दौरान प्राचार्य को बताया गया कि गोरखपुर मेडिकल कॉलेज को फिलहाल इस सुविधा से केंद्र सरकार ने वंचित कर दिया है। अब यह सुविधा झांसी मेडिकल कॉलेज को उपलब्ध कराई जाएगी।
ये मिलनी हैं सुविधाएं
कार्डियोलॉजी, प्लास्टिक सर्जरी, नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी व न्यूरो सर्जरी और बर्न के लिए 20 बेड के वार्ड। इन सभी विभागों के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त माड्यूलर ओटी। सभी विभागों की ओपीडी के लिए सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक।
सुपर स्पेशियालिटी सेवा के लिए गोरखपुर मेडिकल कॉलेज को मंजूरी मिल गई है। केंद्र सरकार ने 82 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। मई से इस योजना पर काम शुरू हो जाएगा।
- प्रो. राजीव मिश्रा, प्राचार्य, बीआरडी मेडिकल कॉलेज