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सोता रहा मेडिकल कॉलेज, लैप्स हो गए 3.50 करोड़
राजन राय, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Sun, 02 Apr 2017 01:07 AM IST
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मेडिकल कॉलेज।
- फोटो : Amar Ujala
दवा मद में मिले ढाई करोड़ समेत मेडिकल कॉलेज का साढ़े तीन करोड़ रुपये का फंड जिम्मेदारों की लापरवाही की वजह से शासन को वापस चला गया। अलग-अलग 20 से अधिक मदों में मेडिकल कॉलेज को 31 मार्च की रात 10 बजे तक ये फंड मिले थे, मगर इनमें से एक का भी कॉलेज इस्तेमाल नहीं कर सका। कॉलेज की तरफ से जब तक बिल अपलोड किए गए, तब तक रात के 12 बजे तक की तय समय सीमा समाप्त हो चुकी थी।
पिछले साल भी कॉलेज प्रशासन की सुस्ती की वजह से छह करोड़ रुपये वापस हो गए थे। उसमें भी मोटी रकम दवा की ही थी। इसी तरह कृषि विभाग को मिले 10 लाख रुपये का फंड भी वापस हो गया। इसमें नौ लाख रुपये तो विभाग के अफसरों-कर्मचारियों के वेतन मद के थे। आखिरी दिन फंड मिलने को लेकर सभी महकमे सतर्क रहते हैं। ज्यादातर महकमों को अपने मंत्रालयों से ये फंड मिलने की सूचना भी मिल जाती है। ऐसे में फंड लैप्स न हो जाए, इसलिए शुक्रवार को भी संबंधित महकमों के कर्मचारी सुबह से रात तक सक्रिय रहे।
कई विभागों को तो रात 11 बजे फंड मिला और उन्होंने तत्काल बिल अपलोड कर उसे ट्रेजरी से अप्रूव भी करा लिया, मगर मेडिकल कॉलेज और कृषि विभाग पिछड़ गए। उधर वेतन मद में मिली रकम वापस हो जाने से दोनों ही महकमों के कर्मचारियों में काफी रोष भी है। अब इस रकम को वापस पाने के लिए फिर से नए सिरे से कवायद करनी पड़ेगी।
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पिछले साल भी कॉलेज प्रशासन की सुस्ती की वजह से छह करोड़ रुपये वापस हो गए थे। उसमें भी मोटी रकम दवा की ही थी। इसी तरह कृषि विभाग को मिले 10 लाख रुपये का फंड भी वापस हो गया। इसमें नौ लाख रुपये तो विभाग के अफसरों-कर्मचारियों के वेतन मद के थे। आखिरी दिन फंड मिलने को लेकर सभी महकमे सतर्क रहते हैं। ज्यादातर महकमों को अपने मंत्रालयों से ये फंड मिलने की सूचना भी मिल जाती है। ऐसे में फंड लैप्स न हो जाए, इसलिए शुक्रवार को भी संबंधित महकमों के कर्मचारी सुबह से रात तक सक्रिय रहे।
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कई विभागों को तो रात 11 बजे फंड मिला और उन्होंने तत्काल बिल अपलोड कर उसे ट्रेजरी से अप्रूव भी करा लिया, मगर मेडिकल कॉलेज और कृषि विभाग पिछड़ गए। उधर वेतन मद में मिली रकम वापस हो जाने से दोनों ही महकमों के कर्मचारियों में काफी रोष भी है। अब इस रकम को वापस पाने के लिए फिर से नए सिरे से कवायद करनी पड़ेगी।
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