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लालच में नष्ट हो रहा जंगल : डॉ. उपरेती
गोरखप़ुर। अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 10 Feb 2016 01:31 AM IST
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गोरखपुर। मारवाड़ बिजनेस स्कूल में मंगलवार को जूलॉजी विभाग की ओर से ‘मैन एंड बायोस्फेयर’ विषय पर दो दिवसीय नेशनल सेमिनार का शुभारंभ हुआ। पहले दिन की शुरुआत केंद्रीय गन्ना शोध संस्थान, लखनऊ के चीफ साइंटिस्ट डॉ. डीके उपरेती के संबोधन से हुई। बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने कहा कि हमारे देश के जंगल लालच में नष्ट हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति यदि अपनी जरूरत के मुताबिक जंगलों का प्रयोग करें तो उसका पर्यावरण पर प्रभाव नहीं पड़ेगा। लेकिन दु:खद यह है कि लालच के प्रभाव में आकर लोग जंगल को तेजी से समाप्त कर रहे हैं और उसका दुष्प्रभाव भी खुद ही झेल रहे हैं। जंगल की उपयोगिता सभी को समझनी होगी तभी पर्यावरण को दूषित होने से बचाया जा सकता है। संगोष्ठी की अध्यक्षता गोरखपुर यूनिवर्सिटी के जूलॉजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. सीपीएम त्रिपाठी ने की।
उन्होंने कहा कि यदि हमारी पृथ्वी से जीव-जंतु समाप्त हो गए तो जैव विविधता प्रभावित होगी और हमारा जीवन ही समाप्त हो जाएगा। डॉ. आरके उपाध्याय ने बताया कि हमारे ईको सिस्टम का प्रमुख अंग मानव प्रजातियां हैं। पहले दिन 109 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया और 18 शोध प्रबंध प्रस्तुत किए गए। इस दौरान अतिथियों ने स्मारिका का लोकार्पण भी किया। स्वागत भाषण प्राचार्य डॉ. संतोष त्रिपाठी ने तो धन्यवाद ज्ञापन प्रो. बीएल सर्राफ का रहा। संचालन की जिम्मेदारी डॉ. पूनम ओझा ने निभाई।
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उन्होंने कहा कि व्यक्ति यदि अपनी जरूरत के मुताबिक जंगलों का प्रयोग करें तो उसका पर्यावरण पर प्रभाव नहीं पड़ेगा। लेकिन दु:खद यह है कि लालच के प्रभाव में आकर लोग जंगल को तेजी से समाप्त कर रहे हैं और उसका दुष्प्रभाव भी खुद ही झेल रहे हैं। जंगल की उपयोगिता सभी को समझनी होगी तभी पर्यावरण को दूषित होने से बचाया जा सकता है। संगोष्ठी की अध्यक्षता गोरखपुर यूनिवर्सिटी के जूलॉजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. सीपीएम त्रिपाठी ने की।
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उन्होंने कहा कि यदि हमारी पृथ्वी से जीव-जंतु समाप्त हो गए तो जैव विविधता प्रभावित होगी और हमारा जीवन ही समाप्त हो जाएगा। डॉ. आरके उपाध्याय ने बताया कि हमारे ईको सिस्टम का प्रमुख अंग मानव प्रजातियां हैं। पहले दिन 109 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया और 18 शोध प्रबंध प्रस्तुत किए गए। इस दौरान अतिथियों ने स्मारिका का लोकार्पण भी किया। स्वागत भाषण प्राचार्य डॉ. संतोष त्रिपाठी ने तो धन्यवाद ज्ञापन प्रो. बीएल सर्राफ का रहा। संचालन की जिम्मेदारी डॉ. पूनम ओझा ने निभाई।
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