{"_id":"5d5862728ebc3e899507ce86","slug":"fake-arms-license-gorakhpur-city-news-gkp317990153","type":"story","status":"publish","title_hn":"फर्जी लाइसेंस पर असलहा खरीदे जाने का मामला,","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फर्जी लाइसेंस पर असलहा खरीदे जाने का मामला,
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फर्जी लाइसेंस पर असलहा खरीदे जाने के मामले में
पुलिस की जांच के दायरे में सरकारी कर्मचारी भी
गोरखपुर। फर्जी लाइसेंस पर असलहा खरीदे जाने की जांच में सरकारी कर्मचारी भी फंस सकते हैं। पुलिस असलहों और गोली के खरीद फरोख्त का ब्योरा रखने वाले बाबू से भी पूछताछ की तैयारी कर रही है। वहीं, पूरे प्रकरण की परत दर परत जांच के लिए एसएसपी ने एक विशेष टीम भी गठित की है, जिसने जांच शुरू कर दी है। एसपी ऑफिस में आने वाले आवेदन की जांच और पूर्व में जांच कर डीएम दफ्तर भेजे गए कागजात भी पलटे जा रहे हैं। पुलिस को पूरा संदेह है कि सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से ही लाइसेंस जारी हुए हैं।
आरोपियों के अलग-अलग थाना क्षेत्र के होने की वजह से हुक्म तहरीरी भेजकर सहयोग मांगा गया है। आरोपियों के घरों के अलावा पुलिस उनके रिश्तेदारों के घर भी दस्तक दे रही है। पुलिस की तीन अलग-अलग टीमें गिरफ्तारी के लिए लगाई गईं हैं। पुलिस अभी इस पूरे खेल का मास्टर माइंड गोपीनाथ को ही मान रही है। उसका मानना है कि गोपीनाथ के पकड़े जाने के बाद ही पूरा खेल खुलकर सामने आएगा। गोपी ही यह बताएगा कि आखिर किस कर्मचारी के कहने पर एक विशेष गन हाउस का चुनाव लाइसेंस और असलहा खरीदने के लिए किया गया था। उधर, एसएसपी ने एलआईयू को भी जिम्मेदारी सौंपी है। वह गोपनीय जांच कर प्रकरण में साक्ष्य जुटा रहे हैं।
यह है मामला
शिकायत के बाद तीन लोगों के नाम सामने आए थे जिन्होंने फर्जी लाइसेंस हासिल कर उसपर असलहे खरीदे हैं। कैंट पुलिस ने इस प्रकरण में असलहा बाबू प्रथम राम सिंह की तहरीर पर रवि आर्म्स के मालिक, शिवम मिश्रा, विकास तिवारी और तनवीर खान के खिलाफ केस दर्ज किया है। इसमें से तनवीर को गिरफ्तार कर पुलिस ने जेल भेजा है और अन्य आरोपी अभी फरार है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पुलिस की जांच के दायरे में सरकारी कर्मचारी भी
गोरखपुर। फर्जी लाइसेंस पर असलहा खरीदे जाने की जांच में सरकारी कर्मचारी भी फंस सकते हैं। पुलिस असलहों और गोली के खरीद फरोख्त का ब्योरा रखने वाले बाबू से भी पूछताछ की तैयारी कर रही है। वहीं, पूरे प्रकरण की परत दर परत जांच के लिए एसएसपी ने एक विशेष टीम भी गठित की है, जिसने जांच शुरू कर दी है। एसपी ऑफिस में आने वाले आवेदन की जांच और पूर्व में जांच कर डीएम दफ्तर भेजे गए कागजात भी पलटे जा रहे हैं। पुलिस को पूरा संदेह है कि सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से ही लाइसेंस जारी हुए हैं।
आरोपियों के अलग-अलग थाना क्षेत्र के होने की वजह से हुक्म तहरीरी भेजकर सहयोग मांगा गया है। आरोपियों के घरों के अलावा पुलिस उनके रिश्तेदारों के घर भी दस्तक दे रही है। पुलिस की तीन अलग-अलग टीमें गिरफ्तारी के लिए लगाई गईं हैं। पुलिस अभी इस पूरे खेल का मास्टर माइंड गोपीनाथ को ही मान रही है। उसका मानना है कि गोपीनाथ के पकड़े जाने के बाद ही पूरा खेल खुलकर सामने आएगा। गोपी ही यह बताएगा कि आखिर किस कर्मचारी के कहने पर एक विशेष गन हाउस का चुनाव लाइसेंस और असलहा खरीदने के लिए किया गया था। उधर, एसएसपी ने एलआईयू को भी जिम्मेदारी सौंपी है। वह गोपनीय जांच कर प्रकरण में साक्ष्य जुटा रहे हैं।
विज्ञापन
यह है मामला
शिकायत के बाद तीन लोगों के नाम सामने आए थे जिन्होंने फर्जी लाइसेंस हासिल कर उसपर असलहे खरीदे हैं। कैंट पुलिस ने इस प्रकरण में असलहा बाबू प्रथम राम सिंह की तहरीर पर रवि आर्म्स के मालिक, शिवम मिश्रा, विकास तिवारी और तनवीर खान के खिलाफ केस दर्ज किया है। इसमें से तनवीर को गिरफ्तार कर पुलिस ने जेल भेजा है और अन्य आरोपी अभी फरार है।
विज्ञापन