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रातभर बिजली बिन ‘रोए’ सुबह हुई तो सोए
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Tue, 20 Jun 2017 08:37 PM IST
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बिजली
- फोटो : amar ujala
नार्मल इलाके में रहने वाले परवेज सोमवार को इफ्तार की तैयारी में थे तभी बिजली गुल हो गई। पसीने से भीगकर किसी तरह इफ्तार किया फिर बत्ती आने का इंतजार करने लगे। घर में उमस के चलते रहना कठिन था इसलिए वक्त सड़क पर टहलते हुए बीता। इस बीच बत्ती गुल क्यों हैं, ये जानने की कोशिश में वह उपकेंद्र पर फोन लगाने लगे। नंबर व्यस्त जा रहा था। काफी कोशिश पर कॉल लगी तो पता चला कि मछली मंडी के पास तार टूटा है।
11 बजे हालात से समझौता करके परवेज घर पहुंचे तो परिवारवाले उमस से तड़पते मिले। गर्मी से तंग बीबी बेडरूम में बच्चों को संभालने में पसीने-पसीने हो रही थी। घंटों से गर्मी झेल रहे सात और चार साल के उनके दोनों बेटे बिस्तर पर लेटने के लिए तैयार नहीं थे। बीबी-बच्चों के संवाद में चिड़चिड़ाहट साफ झलक रही थी। काफी समझाने के बाद जब मजबूर होकर परवेज ने बच्चों को डांट-डपट लगाई तब वह आंख मूंदकर सोने का नाटक करने लगे। परवेज भी बिस्तर पर लेटे, लेकिन गर्मी ने नींद नहीं आने दी। सहरी का वक्त हुआ तो नींद से बोझिल पलकों के साथ बिस्तर छोड़ा। बिजली महकमे को कोसते हुए सहरी निपटाई फिर इबादत में जुट गए। सुबह बड़े बेटे को स्कूल जाने के लिए तैयार करना कठिन हो गया। परवेज ने बताया कि नींद पूरी न होने से बेटा स्कूल जाने को तैयार ही नहीं था। किसी तरह उसे समझाकर स्कूल रवाना किया। इस बीच 7.05 पर बिजली आ चुकी थी। इसके बाद डेढ़-दो घंटे की नींद लेकर थकान उतारी। नार्मल के विपिन, सुजीत, साहिल के साथ भी कमोवेश कुछ ऐसा ही बीता था। सिनेमा रोड इलाके में रात दो बजे लोगों की नींद बिजली के साथ उड़ गई। यूनिवर्सिटी उपकेंद्र से जुड़े इस फीडर को कई बार चालू करने की कोशिश की गई लेकिन लाइन सुचारु नहीं हो सकी। बिजली की आंखमिचौली के बीच सुबह 11.15 तक इलाके के लोगों को सांसत झेलनी पड़ी। डेढ़ घंटे सप्लाई के बाद 33 केवी मेन लाइन ब्रेकडाउन में जाने से एक बार फिर बत्ती गुल हो गई।
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11 बजे हालात से समझौता करके परवेज घर पहुंचे तो परिवारवाले उमस से तड़पते मिले। गर्मी से तंग बीबी बेडरूम में बच्चों को संभालने में पसीने-पसीने हो रही थी। घंटों से गर्मी झेल रहे सात और चार साल के उनके दोनों बेटे बिस्तर पर लेटने के लिए तैयार नहीं थे। बीबी-बच्चों के संवाद में चिड़चिड़ाहट साफ झलक रही थी। काफी समझाने के बाद जब मजबूर होकर परवेज ने बच्चों को डांट-डपट लगाई तब वह आंख मूंदकर सोने का नाटक करने लगे। परवेज भी बिस्तर पर लेटे, लेकिन गर्मी ने नींद नहीं आने दी। सहरी का वक्त हुआ तो नींद से बोझिल पलकों के साथ बिस्तर छोड़ा। बिजली महकमे को कोसते हुए सहरी निपटाई फिर इबादत में जुट गए। सुबह बड़े बेटे को स्कूल जाने के लिए तैयार करना कठिन हो गया। परवेज ने बताया कि नींद पूरी न होने से बेटा स्कूल जाने को तैयार ही नहीं था। किसी तरह उसे समझाकर स्कूल रवाना किया। इस बीच 7.05 पर बिजली आ चुकी थी। इसके बाद डेढ़-दो घंटे की नींद लेकर थकान उतारी। नार्मल के विपिन, सुजीत, साहिल के साथ भी कमोवेश कुछ ऐसा ही बीता था। सिनेमा रोड इलाके में रात दो बजे लोगों की नींद बिजली के साथ उड़ गई। यूनिवर्सिटी उपकेंद्र से जुड़े इस फीडर को कई बार चालू करने की कोशिश की गई लेकिन लाइन सुचारु नहीं हो सकी। बिजली की आंखमिचौली के बीच सुबह 11.15 तक इलाके के लोगों को सांसत झेलनी पड़ी। डेढ़ घंटे सप्लाई के बाद 33 केवी मेन लाइन ब्रेकडाउन में जाने से एक बार फिर बत्ती गुल हो गई।
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चूहे ने गुल कर दी बिजली
तारामंडल के जीडीए पश्चिमी फीडर की बत्ती एक चूहे के चलते घंटों गुल रही। सुबह आठ बजे उपकेंद्र के इनकमिंग नंबर एक में चूहा मर गया। इसके चलते जीडीए पश्चिमी फीडर की सप्लाई ठप हो गई। चूहे के चलते इनकमिंग का कांट्रेक्टर भी खराब हो गया। मरम्मत में दो घंटे का वक्त लगा। इधर सप्लाई चालू हुई तो एलआईसी के पास ट्रांसफार्मर फुंक गया। इसके बाद फिर बत्ती गुल हो गई। लाइन चालू करने की कोशिश चल ही रही थी कि पानमती के पास पोल टूटने की सूचना मिली। इस तरह बिजली की आंखमिचौली के बीच शाम सवा छह बजे तक जीडीए पश्चिमी फीडर से जुड़े कई मोहल्ले के लोग परेशान होते रहे।
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