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5000 विद्यार्थियों का फंस सकता है प्रतिपूर्ति शुल्क
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5000 विद्यार्थियों की फंस सकती है शुल्क प्रतिपूर्ति
गोरखपुर। गोरखपुर मंडल के 60 डिग्री कॉलेजों के करीब 5000 विद्यार्थियों की शुल्क प्रतिपूर्ति फंस सकती है। इन कॉलेजों ने गोरखपुर यूनिवर्सिटी को विद्यार्थियों का गलत ब्योरा भेजा है। 31 अगस्त तक ब्योरा का ऑनलाइन सत्यापन होना है। इस बीच सत्यापन नहीं हुआ तो इन विद्यार्थियों की शुल्क प्रतिपूर्ति रोक दी जाएगी।
गोरखपुर विश्वविद्यालय को गलत जानकारी भेजने वालों में गोरखपुर के 25, देवरिया के 23 और कुशीनगर के 12 कॉलेज हैं। इन कॉलेजों की ओर से भेजे गए ऑनलाइन आवेदन में सलेक्शन ऑफ स्टूडेंट और परीक्षा के प्रकार का कॉलम गलत भरा गया है। स्नातक और परास्तक के विद्यार्थियों को शुल्क की डेढ़ गुना प्रतिपूर्ति दी जाती है। मसलन, अगर शुल्क 5000 रुपये है तो शुल्क प्रतिपूर्ति 7500 रुपये मिलेगी। विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने 26 अगस्त को पत्र लिखकर कॉलेजों को गड़बड़ी की जानकारी दे दी है। हालांकि अभी किसी कॉलेज ने ब्योरा सही नहीं किया है।
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विश्वविद्यालय से अब नहीं ठीक का सकती त्रुटि
गोरखपुर। डिग्री कॉलेजों से गलत ब्यूरो आने पर पहले विश्वविद्यालय के संबद्धता विभाग में ही त्रुटि ठीक करने की व्यवस्था थी। लेकिन नए साफ्टवेयर में अब विश्वविद्यालय के पास से अधिकार छिन लिया गया है।
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गोरखपुर। गोरखपुर मंडल के 60 डिग्री कॉलेजों के करीब 5000 विद्यार्थियों की शुल्क प्रतिपूर्ति फंस सकती है। इन कॉलेजों ने गोरखपुर यूनिवर्सिटी को विद्यार्थियों का गलत ब्योरा भेजा है। 31 अगस्त तक ब्योरा का ऑनलाइन सत्यापन होना है। इस बीच सत्यापन नहीं हुआ तो इन विद्यार्थियों की शुल्क प्रतिपूर्ति रोक दी जाएगी।
गोरखपुर विश्वविद्यालय को गलत जानकारी भेजने वालों में गोरखपुर के 25, देवरिया के 23 और कुशीनगर के 12 कॉलेज हैं। इन कॉलेजों की ओर से भेजे गए ऑनलाइन आवेदन में सलेक्शन ऑफ स्टूडेंट और परीक्षा के प्रकार का कॉलम गलत भरा गया है। स्नातक और परास्तक के विद्यार्थियों को शुल्क की डेढ़ गुना प्रतिपूर्ति दी जाती है। मसलन, अगर शुल्क 5000 रुपये है तो शुल्क प्रतिपूर्ति 7500 रुपये मिलेगी। विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने 26 अगस्त को पत्र लिखकर कॉलेजों को गड़बड़ी की जानकारी दे दी है। हालांकि अभी किसी कॉलेज ने ब्योरा सही नहीं किया है।
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विश्वविद्यालय से अब नहीं ठीक का सकती त्रुटि
गोरखपुर। डिग्री कॉलेजों से गलत ब्यूरो आने पर पहले विश्वविद्यालय के संबद्धता विभाग में ही त्रुटि ठीक करने की व्यवस्था थी। लेकिन नए साफ्टवेयर में अब विश्वविद्यालय के पास से अधिकार छिन लिया गया है।
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