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संदिग्ध हाल में जले पति-पत्नी, दोनों की मौत
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर।
Updated Sat, 03 Sep 2016 12:47 AM IST
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- फोटो : demo
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चिलुआताल के रामपुर चक गांव में बृहस्पतिवार की रात संदिग्ध हाल में कमरे में दंपती झुलस गए। आवाज सुनकर पहुंचे पड़ोस के लोगों ने दरवाजा तोड़कर दोनों को बाहर निकालने के साथ ही मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। वहां देर रात दोनों ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। युवक बंगलूरू में रहकर मजदूरी करता था। एक महीने पहले ही वह घर आया था।
चिलुआताल प्रतिनिधि के अनुसार रामपुर चक का रहने वाला शर्मा निषाद (37) प्लंबर का काम करता था। बृहस्पतिवार की रात 10 बजे भोजन करने के बाद शर्मा और उसकी पत्नी मनीषा (35) बरामदे में तीनों बच्चों को अपने बाबा के पास सुलाकर कमरे में चले गए। 11 बजे के करीब कमरे से धुआं उठने के साथ ही चिल्लाने की आवाज आने पर आसपास के लोग जुट गए। दरवाजा तोड़कर लोगों ने गंभीर रूप से झुलसे दंपती को बाहर निकालने के साथ ही उन्हें मेडिकल कॉलेज पहुंचाया। वहां रात करीब पौने तीन बजे दोनों की मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। शर्मा छह भाइयों में पांचवें नंबर का था। सीओ गोरखनाथ डीएन शुक्ला ने बताया मामले की छानबीन चल रही है।
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चिलुआताल प्रतिनिधि के अनुसार रामपुर चक का रहने वाला शर्मा निषाद (37) प्लंबर का काम करता था। बृहस्पतिवार की रात 10 बजे भोजन करने के बाद शर्मा और उसकी पत्नी मनीषा (35) बरामदे में तीनों बच्चों को अपने बाबा के पास सुलाकर कमरे में चले गए। 11 बजे के करीब कमरे से धुआं उठने के साथ ही चिल्लाने की आवाज आने पर आसपास के लोग जुट गए। दरवाजा तोड़कर लोगों ने गंभीर रूप से झुलसे दंपती को बाहर निकालने के साथ ही उन्हें मेडिकल कॉलेज पहुंचाया। वहां रात करीब पौने तीन बजे दोनों की मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। शर्मा छह भाइयों में पांचवें नंबर का था। सीओ गोरखनाथ डीएन शुक्ला ने बताया मामले की छानबीन चल रही है।
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अनाथ हो गए बच्चे
शर्मा निषाद के सभी भाई अलग-अलग रहते हैं। परिवार में उनके अलावा तीन बच्चे संदीप (10), संतोष (8), सचिन (6) है। बंगलूरू में प्लंबर का काम करने वाले शर्मा निषाद की मौत के बाद परिवार के साथ ही रिश्तेदार बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। पिता लालचंद ने बताया कि रात तक स्थिति सामान्य थी। अचानक हुई घटना से परिवार के लोग सन्न रह गए हैं।
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