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पोस्टमार्टम के लिए घंटों करते रहे मिन्नतें

Mon, 17 Oct 2016 12:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Mon, 17 Oct 2016 12:25 AM IST
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Ruckus for postmartum
पोस्टमार्टम के लिए डाँक्‍टर से बात करते मृतकों के परिजन। - फोटो : Rajesh Kumar
पहले कुदरत ने कहर ढाया और जान जाने के बाद डॉक्टरों की जिद ने दुर्दशा कर दी। सड़क हादसे में जान गंवाने वाले तीन शख्स की लाश पहचान के लिए तीन दिन से पड़ी सड़ रही थी। रविवार को पोस्टमार्टम होना था। मगर डॉक्टर अपने नियमों की दुहाई देने लगे और पोस्टमार्टम लटक गया। इनके पीछे कोई रोने वाला नहीं था, मगर तीन शव ऐसे भी थे, जिनके घर वाले अपने बीच से चले गए लोगों के शव को जल्द घर ले जाना चाहते थे। घंटों हंगामा हुआ, लोग भी जुट गए, जिसने सुना सब फफक पड़े, मगर डॉक्टरों पर इसका कोई असर नहीं हुआ। करीब तीन घंटे बाद सरकारी आदेश की कॉपी आने के बाद ही पोस्टमार्टम हुआ।
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रविवार को छह शवों का पोस्टमार्टम होना था। इनमेें 19 और 26 साल की दो महिलाओं और एक खोराबार में हादसे में जान गंवाने वाले शख्स के शव थे, बाकी लाशें लावारिस थीं। सुबह से ही घरवाले पोस्टमार्टम के लिए डॉक्टरों के इंतजार में बैठे थे। करीब साढ़े तीन बजे पहुंचे डॉ. बीपी राय ने आते ही बता दिया कि वह पोस्टमार्टम नहीं कर सकते हैं। वजह भी थी, बताया कि उम्र 59 की हो चुकी है और 55 के बाद पोस्टमार्टम नहीं कर सकते। शिकायत भी कर चुका हूं फिर भी भेज दिया गया। डॉक्टर के बयान से नाराज घर वाले हंगामा करने लगे और एक ने डीएम और सीएमओ को फोन कर दिया।
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प्रशासनिक अफसरों के दबाव के बाद दूसरे डॉ. राजीव कुमार पहुंचे। मगर उन्होंने आदेशों का हवाला देकर पोस्टमार्टम से इन्कार कर दिया। उनका तर्क था कि मौखिक नहीं लिखित आदेश मिलेगा तभी पोस्टमार्टम करेंगे। खैर 5:30 बजे के करीब सीएमओ का सरकारी आदेश पहुंचा तब पोस्टमार्टम शुरू हुआ। दोनों डॉक्टरों के अपने-अपने तर्क और सरकारी आदेश के चक्कर में तीन घंटे तक घर वाले परेशान होकर घूमते रहे।
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