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एसडीएम को ही बेच दी दूसरे की जमीन
अरुण चन्द, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Sat, 30 Apr 2016 07:48 PM IST
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- फोटो : डेमो पिक
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जमीन के बंटवारे से लेकर उससे जुड़े तमाम फर्जीवाड़े सुलझाने वाले एसडीएम को ही जालसाजों ने अपना शिकार बना लिया। शहर के जालसाजों ने उन्हें दूसरे की जमीन बेच दी। एसडीएम को जमीन मिली ही नहीं और 25 लाख रुपये से अधिक का चूना भी लग गया। गनीमत यह रही कि समय से मामला पकड़ में आ गया वर्ना मुकदमा भी झेलना पड़ जाता।
प्रशासनिक दखल की वजह से फिलहाल बैनामा निरस्त होने के साथ ही फर्जी विक्रेता और एक गवाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश हुआ है।
खजनी में तैनात एसडीएम अभय कुमार मिश्र की पत्नी निर्मला ने दो फरवरी 2016 को सदर तहसील के जंगल रामलखन गांव के हरिश्चंद्र से गांव की ही करीब 50 डिसमिल जमीन का बैनामा कराया था। रजिस्ट्री कार्यालय सदर क्षेत्र प्रथम में हुए इस बैनामे में जंगल सिकरी उर्फ खोराबार के कैलाश और खोराबार के गुलाब ने हरिश्चंद्र की तरफ से गवाही दी थी। बैनामा होने के बाद जब एसडीएम के घर वाले जमीन पर निर्माण कराने पहुंचे तो यह जानकार उनके होश फाख्ता हो गए कि किसी फर्जी व्यक्ति ने हरिश्चंद्र बनकर उन्हें जमीन बेची थी।
एसडीएम की पत्नी ने इसकी लिखित शिकायत एआईजी स्टांप से की। उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच शुरू की और संबंधित बैनामे से जुड़े सभी लोगों यानी क्रेता, विक्रेता, गवाह और दस्तावेज लेखक को पत्र भेजकर प्रमाणपत्रों के साथ बयान देने के लिए बुलाया। इनके अलावा सब रजिस्ट्रार सदर प्रथम क्षेत्र को भी विलेख के दस्तावेजों के साथ बुलाया गया।
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असली हरिश्चंद्र ने एआईजी स्टांप रमाशंकर सिंह के सामने जमीन के दस्तावेजों के साथ ही अपना आधार कार्ड और वोटर आईडी प्रस्तुत किया। ऑनलाइन जांच में दोनों आईडी सही मिलने के साथ ही जमीन के कागजात भी दुरुस्त मिले। इसके बाद जब हरिश्चंद्र की जगह खड़ा होकर बैनामा करने वाले जालसाज के आधार कार्ड की जांच की गई तो वह फर्जी मिला। यहीं नहीं, दोनों की फोटो भी अलग-अलग मिली।
इसके बाद एआईजी स्टांप ने इस मामले में आदेश जारी करते हुए फर्जी हरिश्चंद्र और गवाह कैलाश को इस पूरे मामले में दोषी बताते हुए सब रजिस्ट्रार को इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने और बैनामा निरस्त करने का निर्देश दिया। यही नहीं, उन्होंने इसके लिए सब रजिस्ट्रार को भी जिम्मेदार बताते हुए उन्हें चेतावनी जारी की है। उनका कहना है कि जमीन बेचने वाला असली है या नहीं, यह जांचने की जिम्मेदारी सब रजिस्ट्रार की है।
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प्रशासनिक दखल की वजह से फिलहाल बैनामा निरस्त होने के साथ ही फर्जी विक्रेता और एक गवाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश हुआ है।
खजनी में तैनात एसडीएम अभय कुमार मिश्र की पत्नी निर्मला ने दो फरवरी 2016 को सदर तहसील के जंगल रामलखन गांव के हरिश्चंद्र से गांव की ही करीब 50 डिसमिल जमीन का बैनामा कराया था। रजिस्ट्री कार्यालय सदर क्षेत्र प्रथम में हुए इस बैनामे में जंगल सिकरी उर्फ खोराबार के कैलाश और खोराबार के गुलाब ने हरिश्चंद्र की तरफ से गवाही दी थी। बैनामा होने के बाद जब एसडीएम के घर वाले जमीन पर निर्माण कराने पहुंचे तो यह जानकार उनके होश फाख्ता हो गए कि किसी फर्जी व्यक्ति ने हरिश्चंद्र बनकर उन्हें जमीन बेची थी।
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एसडीएम की पत्नी ने इसकी लिखित शिकायत एआईजी स्टांप से की। उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच शुरू की और संबंधित बैनामे से जुड़े सभी लोगों यानी क्रेता, विक्रेता, गवाह और दस्तावेज लेखक को पत्र भेजकर प्रमाणपत्रों के साथ बयान देने के लिए बुलाया। इनके अलावा सब रजिस्ट्रार सदर प्रथम क्षेत्र को भी विलेख के दस्तावेजों के साथ बुलाया गया।
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असली हरिश्चंद्र ने एआईजी स्टांप रमाशंकर सिंह के सामने जमीन के दस्तावेजों के साथ ही अपना आधार कार्ड और वोटर आईडी प्रस्तुत किया। ऑनलाइन जांच में दोनों आईडी सही मिलने के साथ ही जमीन के कागजात भी दुरुस्त मिले। इसके बाद जब हरिश्चंद्र की जगह खड़ा होकर बैनामा करने वाले जालसाज के आधार कार्ड की जांच की गई तो वह फर्जी मिला। यहीं नहीं, दोनों की फोटो भी अलग-अलग मिली।
इसके बाद एआईजी स्टांप ने इस मामले में आदेश जारी करते हुए फर्जी हरिश्चंद्र और गवाह कैलाश को इस पूरे मामले में दोषी बताते हुए सब रजिस्ट्रार को इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने और बैनामा निरस्त करने का निर्देश दिया। यही नहीं, उन्होंने इसके लिए सब रजिस्ट्रार को भी जिम्मेदार बताते हुए उन्हें चेतावनी जारी की है। उनका कहना है कि जमीन बेचने वाला असली है या नहीं, यह जांचने की जिम्मेदारी सब रजिस्ट्रार की है।