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नेपाल के युवक से लाखों की ठगी
गोरखप़ुर। अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 10 Feb 2016 08:56 PM IST
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गोरखपुर। बेरोजगारों को रोजगार मुहैया कराने के नाम पर नेपाल मूल के युवक से लाखों की ठगी का मामला प्रकाश में आया है। ठगी का यह धंधा नेपाल से लेकर गोरखपुर और वाराणसी तक फैला है। इसका पर्दाफाश जाल में फंसे नेपाल मूल के शंभू गड़ेरिया ने किया। वह अपने दो लाख रुपये मांगने पहुंचा था। उसे 12 हजार भारतीय रुपये देकर कहा गया कि वह अब बाद में आए। दोबारा आने पर उसे ऑफिस से भगा दिया गया। शंभू की शिकायत पर पुलिस मामले की जांच कर रही है।
नेपाल के नवल परासी के हंकुई गांव निवासी शंभू गड़ेरिया को शाहपुर के मिलन चौराहे पर एक संस्था से जुड़ा नेपाल का युवक भारत लेकर आया था। नौकरी के नाम पर उसे एक हफ्ते की ट्रेनिंग कराई गई। उससे कहा गया कि कपड़े का बिजनेस करना है, एक हफ्ते तक ट्रेनिंग कराने के बाद उससे कहा गया कि वह दो लाख रुपये जमा करे। शंभू का आरोप है कि उसने 1.75 लाख नेपाली करेंसी युवक को नेपाल के रहने वाले राधेश्याम निवासी गुंडी रुपन्देही नवलपरासी नेपाल के सामने दिया।
पैसा मिलने के बाद संस्था के मैनेजमेंट ने शंभू को एक कार्ड जारी किया और कहा कि आठ हजार भारतीय रुपये उसे और देना होगा, फिर उसको नौकरी मिलेगी। शंभू ने ये रुपये भी उन्हें दे दिए। इसके बाद संस्था के अधिकारियों ने उससे कहा कि वह पांच और बेरोजगारों को ट्रेनिंग के लिए ले आए और ट्रेनिंग पूरी होने के बाद दो-दो लाख जमा कराए। उसके बाद दो माह तक 27- 27 हजार रुपये, दस माह तक 80 -80 हजार रुपये तथा दो साल तक 1.20 लाख रुपये महीना तनख्वाह मिलेगी। शंभू उनकी ठगी के इस जाल को समझ गया और अपने रुपये मांगने लगा।
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इस पर उसे सिर्फ 12 हजार रुपये दिए गए। शंभू ने इसकी शिकायत सीओ कैंट अभय कुमार मिश्र से की है। उसका कहना था कि कई और लोग भी इनकी जाल में फंस गए थे।
युवक ने पादरी बाजार पुलिस चौकी पर इसकी शिकायत की है। मामले की जांच की जा रही है। संस्था से जुड़े लोगों से भी पूछताछ की जाएगी।
-अभय कुमार मिश्रा, सीओ कैंट
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नेपाल के नवल परासी के हंकुई गांव निवासी शंभू गड़ेरिया को शाहपुर के मिलन चौराहे पर एक संस्था से जुड़ा नेपाल का युवक भारत लेकर आया था। नौकरी के नाम पर उसे एक हफ्ते की ट्रेनिंग कराई गई। उससे कहा गया कि कपड़े का बिजनेस करना है, एक हफ्ते तक ट्रेनिंग कराने के बाद उससे कहा गया कि वह दो लाख रुपये जमा करे। शंभू का आरोप है कि उसने 1.75 लाख नेपाली करेंसी युवक को नेपाल के रहने वाले राधेश्याम निवासी गुंडी रुपन्देही नवलपरासी नेपाल के सामने दिया।
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पैसा मिलने के बाद संस्था के मैनेजमेंट ने शंभू को एक कार्ड जारी किया और कहा कि आठ हजार भारतीय रुपये उसे और देना होगा, फिर उसको नौकरी मिलेगी। शंभू ने ये रुपये भी उन्हें दे दिए। इसके बाद संस्था के अधिकारियों ने उससे कहा कि वह पांच और बेरोजगारों को ट्रेनिंग के लिए ले आए और ट्रेनिंग पूरी होने के बाद दो-दो लाख जमा कराए। उसके बाद दो माह तक 27- 27 हजार रुपये, दस माह तक 80 -80 हजार रुपये तथा दो साल तक 1.20 लाख रुपये महीना तनख्वाह मिलेगी। शंभू उनकी ठगी के इस जाल को समझ गया और अपने रुपये मांगने लगा।
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इस पर उसे सिर्फ 12 हजार रुपये दिए गए। शंभू ने इसकी शिकायत सीओ कैंट अभय कुमार मिश्र से की है। उसका कहना था कि कई और लोग भी इनकी जाल में फंस गए थे।
युवक ने पादरी बाजार पुलिस चौकी पर इसकी शिकायत की है। मामले की जांच की जा रही है। संस्था से जुड़े लोगों से भी पूछताछ की जाएगी।
-अभय कुमार मिश्रा, सीओ कैंट