{"_id":"56e47b154f1c1bfa7a8b4581","slug":"fire-on-father-and-son-in-khorabar","type":"story","status":"publish","title_hn":"नाली के विवाद ने खड़ी कर दी दुश्मनी की दीवार ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
नाली के विवाद ने खड़ी कर दी दुश्मनी की दीवार
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sun, 13 Mar 2016 01:55 AM IST
विज्ञापन
घायल अरविंद।
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजनीतिक महत्वाकांक्षा पूरी करने के लिए बलराम और अवधेश का परिवार एक दूसरे का दुश्मन बन गया। इससे पहले दोनों परिवार साथ मिलकर प्रधानी का चुनाव लड़ते थे। अवधेश इन्हीं लोगों की मदद से 2005 के पंचायत चुनाव में कैथवलिया गांव के प्रधान बने थे। मामूली बात पर विवाद होने के बाद दोनों एक-दूसरे के विरोधी हो गए। इनके विवाद में पूरा गांव भी दो खेमे बंट गया।
शनिवार की सुबह कैथवलिया गांव में बलराम और उनके बेटे अरविंद को गोली मारने की घटना के बाद गांव में तनाव फैल गया। सूचना के बाद जुटे समर्थकों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग शुरू कर दी। ग्राम प्रधान अवधेश यादव का आरोपी बेटा अनिकेत हाईस्कूल का छात्र है। वारदात के बाद वह फरार हो गया। पुलिस ने उसके घर दबिश देकर भाई गुर्जन यादव, भांजे चंद्रकेश यादव के साथ ही दो सहयोगियों राधेश्याम चौरसिया और बृजेश जायसवाल को हिरासत में ले लिया। गांव के लोगों ने बताया कि वर्ष 2005 के पंचायत चुनाव में दोनों परिवार के लोग साथ मिलकर प्रधानी का चुनाव लड़े थे।
बलराम, उनके बेटे अरविंद और जितेंद्र की मदद से अवधेश प्रधान चुने गए, लेकिन कुछ समय बाद नाली निर्माण को लेकर दोनों परिवारों के बीच मनमुटाव हो गया। 13 मार्च 2005 को चौरीचौरा के टेल्हनापार में बाइक सवार बदमाशों ने अवधेश को गोली मार दी। इस घटना में उन्होंने बलराम के बेटे जितेंद्र को नामजद कर दिया। इसके बाद दोनों परिवारों के बीच की दोस्ती दुश्मनी में बदल गई। 2010 के चुनाव में सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई।
विज्ञापन
अवधेश और जितेंद्र ने अपने-अपने प्रत्याशी उतारे। अवधेश का समर्थित उम्मीदवार विजयी हुआ। 2015 के पंचायत चुनाव में अवधेश के खिलाफ जितेंद्र प्रधानी का चुनाव लड़ा लेकिन हार गया। चुनाव में प्रचार के दौरान कई बार दोनों के समर्थक आमने-सामने आए, लेकिन विवाद टल गया। इसी रंजिश में शनिवार को अवधेश के बेटे अनिकेत ने जितेंद्र के बड़े भाई अरविंद और पिता बलराम को गोली मार दी। इस घटना के बाद से गांव में तनाव फैल गया।
विज्ञापन
शनिवार की सुबह कैथवलिया गांव में बलराम और उनके बेटे अरविंद को गोली मारने की घटना के बाद गांव में तनाव फैल गया। सूचना के बाद जुटे समर्थकों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग शुरू कर दी। ग्राम प्रधान अवधेश यादव का आरोपी बेटा अनिकेत हाईस्कूल का छात्र है। वारदात के बाद वह फरार हो गया। पुलिस ने उसके घर दबिश देकर भाई गुर्जन यादव, भांजे चंद्रकेश यादव के साथ ही दो सहयोगियों राधेश्याम चौरसिया और बृजेश जायसवाल को हिरासत में ले लिया। गांव के लोगों ने बताया कि वर्ष 2005 के पंचायत चुनाव में दोनों परिवार के लोग साथ मिलकर प्रधानी का चुनाव लड़े थे।
विज्ञापन
बलराम, उनके बेटे अरविंद और जितेंद्र की मदद से अवधेश प्रधान चुने गए, लेकिन कुछ समय बाद नाली निर्माण को लेकर दोनों परिवारों के बीच मनमुटाव हो गया। 13 मार्च 2005 को चौरीचौरा के टेल्हनापार में बाइक सवार बदमाशों ने अवधेश को गोली मार दी। इस घटना में उन्होंने बलराम के बेटे जितेंद्र को नामजद कर दिया। इसके बाद दोनों परिवारों के बीच की दोस्ती दुश्मनी में बदल गई। 2010 के चुनाव में सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई।
विज्ञापन
अवधेश और जितेंद्र ने अपने-अपने प्रत्याशी उतारे। अवधेश का समर्थित उम्मीदवार विजयी हुआ। 2015 के पंचायत चुनाव में अवधेश के खिलाफ जितेंद्र प्रधानी का चुनाव लड़ा लेकिन हार गया। चुनाव में प्रचार के दौरान कई बार दोनों के समर्थक आमने-सामने आए, लेकिन विवाद टल गया। इसी रंजिश में शनिवार को अवधेश के बेटे अनिकेत ने जितेंद्र के बड़े भाई अरविंद और पिता बलराम को गोली मार दी। इस घटना के बाद से गांव में तनाव फैल गया।