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कपड़े की दुकान और गोदाम में लगी भीषण आग
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Fri, 20 May 2016 08:53 PM IST
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गीत प्रेस रोड पर कपड़े की दुकान में आग के बाद बिखरा सामान।
- फोटो : shivharsh
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गीता प्रेस के पास स्थित कपड़े की दुकान और गोदाम में शुक्रवार को भोर में आग लग गई। आग कितनी भयावह थी, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसे काबू करने में फायर ब्रिगेड को आठ घंटे लग गए। यही नहीं, आग से घिरे मकान की दूसरी मंजिल पर सो रहे मकान मालिक के परिवार को भी फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
गीता प्रेस के पास राकेश चंद श्रीवास्तव का दुर्गा नाम से कटरा है। पहली मंजिल पर राकेश और उनके छोटे भाई अनुराग अपने परिवार के साथ रहते हैं। नीचे स्थित 15 दुकानें व्यापारियों ने किराए पर ले रखी हैं। बेतियाहाता में रहने वाले व्यापारी रामदेव तुलस्यान और रायगंज निवासी मनीष की इसी कटरे में टेक्सटाइल की दुकानें और गोदाम हैं। दोनों ही थोक और फुटकर के कारोबारी हैं।
इसी बीच शुक्रवार को भोर में करीब साढ़े तीन बजे बिजली कटने पर राकेश के भाई अनुराग की नींद खुली। उन्हें बदबू महसूस हुई और धुंआ भी दिखा तो वे कमरे से बाहर निकल गए। गेट के पास आग की लपटें देखकर उन्होंने शोर मचाना शुरू कर दिया। आवाज सुनकर राकेश के घरवाले जग गए। इसके अलावा आसपास के लोग भी बाहर निकल आए।
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भोर में 3:40 पर उन्होंने घटना की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम में दी। चार बजे फायर बिग्रेड की टीम मौके पर पहुंची। इसके बाद ऊपर फंसे लोगों को बाहर निकालने की कोशिश शुरू हुई। इस दौरान राकेश चंद, उनकी पत्नी आभा, बेटा तरुण (12) छत के पीछे से कूदकर नीचे चले आ गए, लेकिन अनुराग की मां और परिवार कमरे में ही फंसा रह गया जिन्हें फायर ब्रिगेड की टीम ने सुरक्षित बाहर निकाला।
नौ टैंकर पानी लगा, हाइडेंट का भी सहारा लेना पड़ा
बेकाबू आग को बुझाने में पानी के नौ टैंकर खाली हो गए। इस दौरान माया सिने प्लेक्स और गीता प्रेस में मौजूद वाटर हाइड्रेंट की मदद भी लेनी पड़ी, तब जाकर स्थिति कंट्रोल में आ पाई। आसपास के लोग भी आग के विकराल होने से सहम गए थे।
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गीता प्रेस के पास राकेश चंद श्रीवास्तव का दुर्गा नाम से कटरा है। पहली मंजिल पर राकेश और उनके छोटे भाई अनुराग अपने परिवार के साथ रहते हैं। नीचे स्थित 15 दुकानें व्यापारियों ने किराए पर ले रखी हैं। बेतियाहाता में रहने वाले व्यापारी रामदेव तुलस्यान और रायगंज निवासी मनीष की इसी कटरे में टेक्सटाइल की दुकानें और गोदाम हैं। दोनों ही थोक और फुटकर के कारोबारी हैं।
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इसी बीच शुक्रवार को भोर में करीब साढ़े तीन बजे बिजली कटने पर राकेश के भाई अनुराग की नींद खुली। उन्हें बदबू महसूस हुई और धुंआ भी दिखा तो वे कमरे से बाहर निकल गए। गेट के पास आग की लपटें देखकर उन्होंने शोर मचाना शुरू कर दिया। आवाज सुनकर राकेश के घरवाले जग गए। इसके अलावा आसपास के लोग भी बाहर निकल आए।
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भोर में 3:40 पर उन्होंने घटना की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम में दी। चार बजे फायर बिग्रेड की टीम मौके पर पहुंची। इसके बाद ऊपर फंसे लोगों को बाहर निकालने की कोशिश शुरू हुई। इस दौरान राकेश चंद, उनकी पत्नी आभा, बेटा तरुण (12) छत के पीछे से कूदकर नीचे चले आ गए, लेकिन अनुराग की मां और परिवार कमरे में ही फंसा रह गया जिन्हें फायर ब्रिगेड की टीम ने सुरक्षित बाहर निकाला।
नौ टैंकर पानी लगा, हाइडेंट का भी सहारा लेना पड़ा
बेकाबू आग को बुझाने में पानी के नौ टैंकर खाली हो गए। इस दौरान माया सिने प्लेक्स और गीता प्रेस में मौजूद वाटर हाइड्रेंट की मदद भी लेनी पड़ी, तब जाकर स्थिति कंट्रोल में आ पाई। आसपास के लोग भी आग के विकराल होने से सहम गए थे।