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हत्या की साजिश में पूर्व मंत्री को उम्रकैद
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर।
Updated Fri, 05 Aug 2016 01:18 AM IST
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पूर्व मंत्री जीतेंद्र जायसवाल ऊर्फ पप्पू भईया को आजीवन कारावास की सजा होने के बाद दीवान कचहरी कोर्ट से जेल जाते ।
- फोटो : Shivharsh Dwivedi
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अपर सत्र न्यायाधीश ने ग्राम प्रधान की हत्या के 22 साल पुराने मामले में दोषी पाए गए पूर्व मंत्री जितेंद्र जायसवाल उर्फ पप्पू जायसवाल और शूटर मिराज को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोनों पर 20-20 हजार का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड न देने पर दोनों को छह-छह माह की सजा अलग से भुगतनी होगी। कोर्ट ने मिराज के पास से हत्या में प्रयुक्त असलहा बरामद होने पर उसे दो साल की कैद की सजा अलग सुनाई है।
घटना सात सितंबर 1994 की है। दिन में तकरीबन 11 बजे जंगल धूसड़ के प्रधान खदेरू निषाद पूर्व मंत्री के पिपराइच रोड पादरी बाजार स्थित कार्यालय के सामने से गुजर रहे थे तभी उनके कार्यालय से निकलकर एक बदमाश ने उन्हें रोक लिया और गोली मार दी। उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात के बाद भाग रहे बदमाश को ग्रामीणों ने पकड़ लिया। उसकी धुनाई करने के बाद उसे पुलिस को सौंप दिया। पुलिस ने उसके पास से वारदात में प्रयुक्त कट्टा भी बरामद किया। पूछताछ में उसने अपना नाम मिराज बताया।
घटना के बाद ग्राम प्रधान के पिता भग्गन निषाद ने तहरीर में आरोप लगाया कि जमीन की रंजिश में पूर्व मंत्री जितेंद्र जायसवाल ने उनके बेटे की हत्या कराई है। हत्या के पूर्व जितेंद्र जायसवाल ने खुले मंच से कहा था कि यदि ग्राम प्रधान सुलह नहीं करते हैं तो अपने आदमियों से उनकी हत्या करा दूंगा। इसकी जानकारी खदेरू निषाद ने वारदात के पूर्व जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, पुलिस महानिरीक्षक और मुख्यमंत्री को लिखित रूप से दी थी, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई और उसकी हत्या कर दी गई। अपर सत्र न्यायाधीश सीताराम वर्मा की अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी प्रवीण कुमार सिन्हा ने दलील पेश की।
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जितेंद्र जायसवाल पिपराइच विधानसभा से लगातार तीन बार निर्दलीय विधायक (1993, 96 और 2006) चुने गए थे। वह दो मुख्यमंत्री रामप्रकाश गुप्ता और राजनाथ सिंह की सरकार में राज्यमंत्री भी बनाए गए थे।
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घटना सात सितंबर 1994 की है। दिन में तकरीबन 11 बजे जंगल धूसड़ के प्रधान खदेरू निषाद पूर्व मंत्री के पिपराइच रोड पादरी बाजार स्थित कार्यालय के सामने से गुजर रहे थे तभी उनके कार्यालय से निकलकर एक बदमाश ने उन्हें रोक लिया और गोली मार दी। उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात के बाद भाग रहे बदमाश को ग्रामीणों ने पकड़ लिया। उसकी धुनाई करने के बाद उसे पुलिस को सौंप दिया। पुलिस ने उसके पास से वारदात में प्रयुक्त कट्टा भी बरामद किया। पूछताछ में उसने अपना नाम मिराज बताया।
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घटना के बाद ग्राम प्रधान के पिता भग्गन निषाद ने तहरीर में आरोप लगाया कि जमीन की रंजिश में पूर्व मंत्री जितेंद्र जायसवाल ने उनके बेटे की हत्या कराई है। हत्या के पूर्व जितेंद्र जायसवाल ने खुले मंच से कहा था कि यदि ग्राम प्रधान सुलह नहीं करते हैं तो अपने आदमियों से उनकी हत्या करा दूंगा। इसकी जानकारी खदेरू निषाद ने वारदात के पूर्व जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, पुलिस महानिरीक्षक और मुख्यमंत्री को लिखित रूप से दी थी, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई और उसकी हत्या कर दी गई। अपर सत्र न्यायाधीश सीताराम वर्मा की अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी प्रवीण कुमार सिन्हा ने दलील पेश की।
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जितेंद्र जायसवाल पिपराइच विधानसभा से लगातार तीन बार निर्दलीय विधायक (1993, 96 और 2006) चुने गए थे। वह दो मुख्यमंत्री रामप्रकाश गुप्ता और राजनाथ सिंह की सरकार में राज्यमंत्री भी बनाए गए थे।