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क्राइम मैपिंग से अपराधियों की घेरेबंदी करेगी पुलिस
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Tue, 26 Apr 2016 09:41 PM IST
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कार्यशाला मे उपस्थित पुलिस के अधिकारी।
- फोटो : rajesh kumar
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वेब बेस्ड क्राइम मैपिंग से पुलिस बदमाशों की घेरेबंदी करेगी। मंगलवार को यूनिवर्सिटी के दीक्षा भवन में क्राइम मैपिंग पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ। इसका शुभारंभ आईजी पीएसी एवं तकनीकी सेवा आशुतोष पांडेय ने किया। उन्होंने जोन के सभी डीआईजी, पुलिस कप्तान, सीओ और थानेदार को व्यवस्था की जानकारी देने के साथ ही अपने यहां जल्द से जल्द इस व्यवस्था को शुरू कराने का निर्देश दिया।
सुबह 11 बजे दीक्षा भवन में शुरू हुई कार्यशाला में क्राइम मैपिंग से अपराध पर नियंत्रण करने की जानकारी दी गई। प्रोजेक्टर पर अपराध के आंकड़ों को दिखाने के बाद इसके तरीके पर चर्चा हुई। आईजी आशुतोष पांडेय ने मातहतों को हत्या, लूट, अपहरण के अपराध में दिन और समय का क्या महत्व है, इसे समझाया। अपराध पर नियंत्रण के लिए आंकड़ों का विवरण जरूरी बताया।
थानेदारों को उन्होंने बताया कि घटना होने के बाद इसके दिन, समय और तरीके को तत्काल डीसीआबी में सूचित किया जाए। साइबर क्राइम से निपटने के लिए सभी पुलिस कप्तान और थानेदार से डिजिटल वालंटियर की टीम बनाने को कहा गया जो फेसबुक, व्हाट्स एप, यू ट्यूब पर फैलाए जाने वाली अफवाह पर नजर रखने के साथ ही तत्काल इसकी जानकारी अधिकारियों को दें, जिससे समय रहते कार्रवाई की जा सके।
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शाम चार बजे तक चली कार्यशाला में आईजी जोन एचआर शर्मा, डीआईजी शिवसागर सिंह, एसएसपी अनंत देव, एसपी गोंडा प्रदीप कुमार, एसपी संतकबीरनगर शैलेश पांडेय, एसपी श्रावस्ती हेमंत कुटियाल के अलावा सिद्धार्थनगर, महराजगंज, कुशीनगर के पुलिस कप्तान, सीओ और थानेदार शामिल मौजूद रहे।
बातचीत में मशगूल थे मातहत
कार्यशाला के दौरान मंच से जब अपराध पर विस्तार से चर्चा की जा रही थी तो बेपरवाह मातहत कानाफूंसी में लगे हुए थे। एसएसपी अनंत देव ने आवाज देकर मातहतों को मना किया लेकिन वे नहीं माने। अंत में आईजी आशुतोष पांडेय को बोलना पड़ा। इसके बाद कानाफूंसी बंद हुई।
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सुबह 11 बजे दीक्षा भवन में शुरू हुई कार्यशाला में क्राइम मैपिंग से अपराध पर नियंत्रण करने की जानकारी दी गई। प्रोजेक्टर पर अपराध के आंकड़ों को दिखाने के बाद इसके तरीके पर चर्चा हुई। आईजी आशुतोष पांडेय ने मातहतों को हत्या, लूट, अपहरण के अपराध में दिन और समय का क्या महत्व है, इसे समझाया। अपराध पर नियंत्रण के लिए आंकड़ों का विवरण जरूरी बताया।
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थानेदारों को उन्होंने बताया कि घटना होने के बाद इसके दिन, समय और तरीके को तत्काल डीसीआबी में सूचित किया जाए। साइबर क्राइम से निपटने के लिए सभी पुलिस कप्तान और थानेदार से डिजिटल वालंटियर की टीम बनाने को कहा गया जो फेसबुक, व्हाट्स एप, यू ट्यूब पर फैलाए जाने वाली अफवाह पर नजर रखने के साथ ही तत्काल इसकी जानकारी अधिकारियों को दें, जिससे समय रहते कार्रवाई की जा सके।
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शाम चार बजे तक चली कार्यशाला में आईजी जोन एचआर शर्मा, डीआईजी शिवसागर सिंह, एसएसपी अनंत देव, एसपी गोंडा प्रदीप कुमार, एसपी संतकबीरनगर शैलेश पांडेय, एसपी श्रावस्ती हेमंत कुटियाल के अलावा सिद्धार्थनगर, महराजगंज, कुशीनगर के पुलिस कप्तान, सीओ और थानेदार शामिल मौजूद रहे।
बातचीत में मशगूल थे मातहत
कार्यशाला के दौरान मंच से जब अपराध पर विस्तार से चर्चा की जा रही थी तो बेपरवाह मातहत कानाफूंसी में लगे हुए थे। एसएसपी अनंत देव ने आवाज देकर मातहतों को मना किया लेकिन वे नहीं माने। अंत में आईजी आशुतोष पांडेय को बोलना पड़ा। इसके बाद कानाफूंसी बंद हुई।