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थाने में मुंशी और सिपाही भिड़े, हाथापाई
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Mon, 09 Jan 2017 01:10 AM IST
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औचक निरीक्षण का हवाला देकर फर्जी सीआईडी इंस्पेक्टर दुकानदारों से दो हजार रुपये तक ऐंठ रहा था।
- फोटो : Demo Pic
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एक तरफ क्राइम मीटिंग में थानेदार अनुशासन और कार्रवाई की सीख ले रहे थे तो दूसरी तरफ थाने में सिपाही और मुंशी हाथापाई कर रहे थे। फरियादियों के सामने ही दोनों भिड़ गए। यही नहीं सिपाही ने जूता निकालकर मुंशी को मारने के लिए दौड़ा लिया। दूसरे सिपाही और दरोगा ने बीच-बचाव कर किसी तरह से मामले को शांत कराया। उधर थानेदार कार्रवाई के लिए रिपोर्ट तैयार करने की बात कह रहे हैं।
गुलरिहा थाने के सिपाही रमाकांत यादव साल भर से हल्का नंबर एक में तैनात है। रविवार दोपहर 12 बजे के करीब वह थाने पहुंचे तो मुंशी राकेश मिश्र ने उनसे हल्के में नोटिस तामील कराने और जांच की बात कही। इसी बात पर सिपाही भड़क गया और मुंशी को गाली देने लगा। गाली सुनकर मुंशी भी भौचक्का रह गया और दोनों में बहस शुरू हो गई। इस पर रमाकांत ने खुद को एक एमएलसी का रिश्तेदार बताते हुए जूता निकाल लिया और राकेश को मारने के लिए दौड़ा लिया। यह नजारा देख वहां मौजूद फरियादी और दूसरे सिपाही दंग रह गए। लोगों ने बीच-बचाव कर दोनों को शांत कराया।
बताया जाता है कि एमएलसी की धौंस दिखाकर सिपाही रमाकांत थाने का रूटीन काम करने से भी इन्कार कर देता है। शिकायत पर प्रभारी भी चुप्पी साध लेते हैं, जिस वजह से उसका हौसला बढ़ गया और रविवार को तो विभाग का अनुशासन ही तार-तार कर दिया।
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गुलरिहा थाने के सिपाही रमाकांत यादव साल भर से हल्का नंबर एक में तैनात है। रविवार दोपहर 12 बजे के करीब वह थाने पहुंचे तो मुंशी राकेश मिश्र ने उनसे हल्के में नोटिस तामील कराने और जांच की बात कही। इसी बात पर सिपाही भड़क गया और मुंशी को गाली देने लगा। गाली सुनकर मुंशी भी भौचक्का रह गया और दोनों में बहस शुरू हो गई। इस पर रमाकांत ने खुद को एक एमएलसी का रिश्तेदार बताते हुए जूता निकाल लिया और राकेश को मारने के लिए दौड़ा लिया। यह नजारा देख वहां मौजूद फरियादी और दूसरे सिपाही दंग रह गए। लोगों ने बीच-बचाव कर दोनों को शांत कराया।
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बताया जाता है कि एमएलसी की धौंस दिखाकर सिपाही रमाकांत थाने का रूटीन काम करने से भी इन्कार कर देता है। शिकायत पर प्रभारी भी चुप्पी साध लेते हैं, जिस वजह से उसका हौसला बढ़ गया और रविवार को तो विभाग का अनुशासन ही तार-तार कर दिया।
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