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सीबीआई ने सील किया सीओ कॉन दफ्तर का रिकॉर्ड रूम
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 23 Jan 2016 10:30 PM IST
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गोरखपुर। बिहार के छपरा-थावे अमान परिवर्तन के कार्य में करीब 20 करोड़ के ठेके के टेंडर में अनियमितता की जांच करने आई सीबीआई की टीम ने दूसरे दिन चीफ इंजीनियर निर्माण (सीओ कॉन) दफ्तर का रिकार्ड रूम सील कर दिया। इस दौरान तीन टेंडर से जुड़े कागजात जब्त कर लिए गए और कुछ अधिकारियों से पूछताछ की गई।
वहीं छपरा में भी सीबीआई की एक टीम ने पूरे दिन ठेके से संबंधित कागजों की जांच की और इससे जुड़े लोगों के बयान दर्ज किए। रेलवे सूत्रों के मुताबिक अमान परिवर्तन कार्य में 20 करोड़ रुपये का टेंडर अधिकारियों ने मैनेज कर चहेते ठेकेदार को दिला दिया था। लेकिन शिकायत के बाद बड़े अधिकारियों के दखल पर टेंडर निरस्त कर दोबारा दो हिस्सों में कार्य को बांटकर टेंडर निकाला गया था।
पहले ठेका हथियाने वाली फर्म के अलावा एनईआर के एक अधिकारी के रिश्तेदार ने भी टेंडर के लिए निविदा जमा की। हालांकि, पहली फर्म को ही प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों ने ठेका मैनेज करा लिया। अनियमितता की शिकायत पर रेलवे प्रशासन ने विजिलेंस जांच शुरू करा दी।
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जांच रिपोर्ट में कुछ अहम सुराग लगने पर केस सीबीआई को सौंप दिया गया। सीबीआई की टीम ने छपरा और गोरखपुर में शुक्रवार एक साथ छापे की कार्रवाई शुरू की। शनिवार को सीओ कॉन दफ्तर के रिकॉर्ड रूम को सील कर दिया गया।
एक और मामले में चल रही सीबीआई जांच
गोरखपुर। बिहार में दो पुलों के निर्माण के ठेके में अनियमितता और कार्य की जांच भी सीबीआई कर रही है। दो साल पहले सीबीआई ने इस मामले में सीओ कॉन ओंकार सिंह सहित कई अधिकारियों व ठेकेदार को गिरफ्तार भी किया था। अभी भी उस मामले में जांच पूरी नहीं हो सकी है। बिहार में ही एक और ठेके की जांच रेलवे में चर्चा बनी हुई है।
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वहीं छपरा में भी सीबीआई की एक टीम ने पूरे दिन ठेके से संबंधित कागजों की जांच की और इससे जुड़े लोगों के बयान दर्ज किए। रेलवे सूत्रों के मुताबिक अमान परिवर्तन कार्य में 20 करोड़ रुपये का टेंडर अधिकारियों ने मैनेज कर चहेते ठेकेदार को दिला दिया था। लेकिन शिकायत के बाद बड़े अधिकारियों के दखल पर टेंडर निरस्त कर दोबारा दो हिस्सों में कार्य को बांटकर टेंडर निकाला गया था।
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पहले ठेका हथियाने वाली फर्म के अलावा एनईआर के एक अधिकारी के रिश्तेदार ने भी टेंडर के लिए निविदा जमा की। हालांकि, पहली फर्म को ही प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों ने ठेका मैनेज करा लिया। अनियमितता की शिकायत पर रेलवे प्रशासन ने विजिलेंस जांच शुरू करा दी।
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जांच रिपोर्ट में कुछ अहम सुराग लगने पर केस सीबीआई को सौंप दिया गया। सीबीआई की टीम ने छपरा और गोरखपुर में शुक्रवार एक साथ छापे की कार्रवाई शुरू की। शनिवार को सीओ कॉन दफ्तर के रिकॉर्ड रूम को सील कर दिया गया।
एक और मामले में चल रही सीबीआई जांच
गोरखपुर। बिहार में दो पुलों के निर्माण के ठेके में अनियमितता और कार्य की जांच भी सीबीआई कर रही है। दो साल पहले सीबीआई ने इस मामले में सीओ कॉन ओंकार सिंह सहित कई अधिकारियों व ठेकेदार को गिरफ्तार भी किया था। अभी भी उस मामले में जांच पूरी नहीं हो सकी है। बिहार में ही एक और ठेके की जांच रेलवे में चर्चा बनी हुई है।